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50 साल बाद भी मुकेश की आवाज का जादू कायम, अब Gen Z तक पहुंचेगे उनके संगती का जादू

Mukesh 50th death anniversary: हिंदी सिनेमा में कुछ आवाजें ऐसी रही हैं, जिन्हें वक्त कभी पुराना नहीं कर पाया. मुकेश चंद माथुर, जिन्हें दुनिया प्यार से मुकेश के नाम से जानती है, उन्हीं आवाजों में से एक हैं. उनके गाए गाने आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।.चाहे ‘कभी कभी मेरे दिल में’, ‘दोस्त दोस्त ना रहा’ जैसे इमोशनल नगमे हों या फिर राज कपूर पर फिल्माए गए उनके गाने, मुकेश की आवाज ने हर दौर के लोगों को अपनी ओर खींचा है. अब उनकी संगीत विरासत को नई पीढ़ी और खासकर Gen Z तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है.

दरअसल, 27 अगस्त 2026 को मुकेश की 50वीं डेथ एनिवर्सरी है. इस मौके पर महाराष्ट्र सरकार ने उनकी संगीत विरासत को याद करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए ‘दिवंगत गायक मुकेश गौरव समिति’ का गठन किया है. ये समिति मुंबई में मुकेश के संगीत योगदान को याद करने के साथ-साथ कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी करेगी. 

मुकेश के सुरों से Gen Z को जोड़ने का प्लान

मुकेश की पहचान सिर्फ हिंदी फिल्मों के सिंगर के तौर पर नहीं थी. उन्होंने मराठी म्यूजिक में भी अपनी आवाज का रंग बिखेरा था. उनकी सिंगिंग की सबसे खास बात उनकी सादगी और आवाज में महसूस होने वाली भावनाएं थीं. यही वजह है कि उनके गाए गानें आज भी लोगों को अपनी ओर खींचते हैं. अब सरकार चाहती है कि मुकेश की आवाज और संगीत से आज की युवा पीढ़ी भी जुड़े. इसके लिए समिति उनके फेमस हिंदी और मराठी गानों पर बेस्ड संगीत समारोह और खास सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेगी. इन कार्यक्रमों में मुकेश के गीतों को नए दौर के कलाकारों की आवाज में भी पेश किया जा सकता है.

नए सिंगर्स को मिलेगा ये मौका

मुकेश की विरासत को आगे बढ़ाने की इस पहल में सिर्फ पुराने गानों को याद करना ही शामिल नहीं है. समिति का फोकस नई सिंगर्स को मौका देने पर भी रहेगा. इसके तहत यंग सिंगर्स और म्यूजिक सीखने वाले स्टूडेंट के लिए सिंगिंग कॉम्पिटिशन आयोजित किए जाएंगे. वहीं, जो लोग अच्छा परफॉर्म करेंगे उन्हें गिफ्ट भी दिए जाएंगे. ऐसा करने से एक तरफ मुकेश के सदाबहार गानों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा, तो दूसरी तरफ उन यंग जनरेशन को भी मंच मिलेगा, जो म्यूजिक की दुनिया में अपना करियर बनाना चाहते हैं.

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ये लोग समिति में शामिल

महाराष्ट्र सरकार की ओर से बनाई गई इस समिति में कई खास नाम शामिल हैं. महाराष्ट्र के कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है. वहीं शिवसेना नेता अमेय घोले और मुकेश के पोते और अभिनेता नील नितिन मुकेश समिति के सदस्य होंगे. मुंबई शहर के जिलाधिकारी को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है.इसे लेकर मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा कि मुकेश की आवाज आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जिंदा है.

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वंदे मातरम पर सियासी घमासान शुरू, गृहमंत्री शाह ने कहा- कांग्रेस ने लिया देश विरोधी फैसला

Vande Mataram: एक बार फिर वंदे मातरम पर सियासी घमासान शुरू हो गया है. कांग्रेस वर्किंग कमेटी बैठक के बाद से बीजेपी ने कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है. बीजेपी नेताओं के बाद अब गृहमंत्री अमित शाह ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा है. अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने देश विरोधी फैसला लिया है. 

दरअसल, बीते दिन दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक हुई. इस दौरान कांग्रेस ने वंदे मातरम पर अहम फैसला लिया था. कांग्रेस ने वंदे मातरम के दो छंद गाने की बात कही थी. इसके बाद विवाद शुरू हो गया है. बीजेपी ने कांग्रेस को आड़े हाथों ले लिया. गुरूवार को गृहमंत्री अमित शाह तमिलनाडु दौरे पर हैं. CWC के प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कल कांग्रेस वर्किंग कमिटी ने देश-विरोधी फैसला लिया. 1937 के अपने प्रस्ताव को मानते हुए, कांग्रेस ने वंदे मातरम के सिर्फ दो पद गाने का फैसला किया. हाल ही में संसद में बिल पास होकर पूरे वंदे मातरम गीत को मान्यता मिली है. साथ ही वंदे मातरम के लिए राष्ट्रगान के बराबर सम्मान का कानून बना है. ऐसे में कांग्रेस का नया कानून नहीं मानने के फैसले से सियासी विवाद शुरू हो गया है. 

'कांग्रेस ने देश के बंटवारे की नींव रखी थी'

अमित शाह ने कहा कि मैं देश को याद दिलाना चाहता हूं कि 1937 में मुसलमानों को खुश करने के लिए वंदे मातरम को बांटकर कांग्रेस ने देश के बंटवारे की नींव रखी थी. आज नरेंद्र मोदी सरकार ने राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए कांग्रेस की उस गलती को सुधारा है और इसे कानूनी आधार भी दिया है. कांग्रेस का यह फैसला उसकी तुष्टिकरण की नीति को साबित करता है. उन्होंने न सिर्फ बंकिम बाबू की इस रचना का अपमान किया है, बल्कि उन लाखों लोगों का भी अपमान किया है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी जान दी. आज कांग्रेस पार्टी अपने 1937 के प्रस्ताव को तो लागू कर रही है, लेकिन संसद द्वारा बनाए गए कानून को नकार रही है.

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कांग्रेस फिर तुष्टिकरण की राजनीति को आगे बढ़ा रही- शाह 

एएनआई से बात करते हुए अमित शाह ने कहा कि मुझे हैरानी है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी एक बार फिर तुष्टिकरण की राजनीति को आगे बढ़ा रही है. देश एक बार वंदे मातरम को दो हिस्सों में बंटने देने की गलती कर चुका है और हमने इसके नतीजे भुगते हैं. अब देश को कांग्रेस पार्टी के इस फैसले के खिलाफ एकजुट होना चाहिए और कहना चाहिए कि उनकी तुष्टिकरण की राजनीति अब नहीं चलेगी. BJP कांग्रेस पार्टी के इस फैसले की निंदा करती है. 

कांग्रेस का बचाव तो बीजेपी का वार 

वंदे मातरम पर कांग्रेस के रुख के बारे में पार्टी नेता और केरल के मंत्री रमेश चेन्निथला का कहना है कि कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति नहीं कर रही है; बल्कि बीजेपी तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है. इसके अलावा कांग्रेस के प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि यह सिर्फ वंदे मातरम का विरोध नहीं है, बल्कि हमारे क्रांतिकारियों के खिलाफ भी है. अब कांग्रेस ही मुस्लिम लीग बन गई है. यह सब मुस्लिम लीग के दबाव में हो रहा है. यह गांधी की कांग्रेस नहीं, बल्कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कांग्रेस है. राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता का मामला चल रहा है. पिछले 12 सालों में राहुल गांधी के बयानों पर नजर डालें, उनमें से कोई भी भारत के पक्ष में नहीं है.

क्या हुआ था कांग्रेस की बैठक में?

बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक हुई. बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा था कि इस बारे में कोई कन्फ्यूजन नहीं है. आज CWC की बैठक में हमने इस पर चर्चा की. हमारा रुख बिल्कुल साफ है. 1937 में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल, जो उस समय के शीर्ष नेता थे, ने जो भी फैसले लिए थे, हम उन्हीं फैसलों को मानेंगे. हम इस बात को लेकर बिल्कुल साफ हैं कि हमारी कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता वही करेंगे. यही हमारा फैसला है. 

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