डिमेंशिया का डायबिटीज, बीपी और धूम्रपान से संबंध, स्टडी ने बताया किन लोगों को है ज्यादा खतरा
Dementia Risk Factors: डिमेंशिया याद्दाश्त कमजोर होने की कंडीशन है जो बढ़ती उम्र में लोगों को प्रभावित करती है. हालिया स्टडी का कहना है कि डिमेंशिया का खतरा कुछ लाइफस्टाइल फैक्टर्स और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से बढ़ सकता है.
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SC: स्कूलों में खेल शिक्षा को अनिवार्य करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में बच्चों के खेल और शारीरिक शिक्षा से जुड़े एक अहम मामले पर सुनवाई हुई. याचिका में मांग की गई है कि खेल और फिजिकल लिटरेसी यानी शारीरिक गतिविधियों से जुड़ी शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया जाए. इसके साथ ही देशभर के स्कूलों में खेल शिक्षा को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाने की मांग भी की गई है.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने की सुनवाई
मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने की. सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन एमिकस क्यूरी के तौर पर कोर्ट की मदद कर रहे थे. उन्होंने बताया कि याचिका में खेल के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने समेत कई मांगें रखी गई हैं. सुनवाई के दौरान चार अर्जुन पुरस्कार विजेताओं की ओर से भी मामले में शामिल होने की बात सामने आई. उनके वकील ने बताया कि उनकी तरफ से इंप्लीडमेंट एप्लीकेशन दाखिल की गई है.
अदालत ने दो हफ्तों का दिया राज्यों को समय
कोर्ट ने इस मामले में पहले दाखिल की गई रिपोर्ट का भी जिक्र किया. एमिकस क्यूरी ने बताया कि 17 मार्च 2022 को एक रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई थी. इस पर कोर्ट ने रिपोर्ट की सॉफ्ट कॉपी सभी राज्यों और मामले से जुड़े दूसरे पक्षों के वकीलों के साथ साझा करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने इसके लिए दो हफ्ते का समय दिया है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी उसका रुख पूछा. कोर्ट ने जानना चाहा कि इस मांग पर केंद्र का क्या पक्ष है. केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज पेश हुए. उन्होंने कहा कि केंद्र की तरफ से अभी इस मामले में जवाब दाखिल किया जाना बाकी है.
सुप्रीम कोर्ट ने की याचिका की सराहना
कोर्ट ने खेल को लेकर दायर इस याचिका की मांग को सराहनीय बताया. बेंच ने कहा कि आज के डिजिटल दौर में बच्चे धीरे-धीरे मैदान और खेलों से दूर होते जा रहे हैं. बच्चों का ज्यादा समय डिजिटल गतिविधियों में बीत रहा है. ऐसे में स्कूलों में खेल को जरूरी जगह देना अहम है. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर स्कूलों में खेल को अनिवार्य पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाता है तो यह बच्चों के लिए काफी जरूरी कदम होगा. सुनवाई के दौरान स्कूलों में खेल के मैदानों की जरूरत पर भी बात हुई. केंद्र की ओर से पेश ASG केएम नटराज ने भी माना कि स्कूलों में खेल और पर्याप्त मैदान होना जरूरी है.
स्कूलों में खेल शिक्षा को जरूरी करने की मांग
इस मामले का मूल सवाल यही है कि क्या बच्चों के लिए खेल को पढ़ाई की तरह ही जरूरी माना जाना चाहिए. याचिका में कहा गया है कि बच्चों का विकास केवल किताबों और कक्षा की पढ़ाई से नहीं होता. शारीरिक गतिविधियां भी उनके विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. खेल से बच्चों की फिटनेस बेहतर होती है और उनमें अनुशासन, टीम भावना और लगातार मेहनत करने की आदत विकसित होती है. इसके अलावा खेल बच्चों को मोबाइल और अन्य डिजिटल साधनों से कुछ समय दूर रखने में भी मदद कर सकते हैं.
22 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अभी खेल के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित करने का कोई फैसला नहीं दिया है. फिलहाल कोर्ट ने मामले को आगे सुनने का फैसला किया है और सभी पक्षों से जरूरी सामग्री व जवाब मांगे हैं. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को तय की है. उस दिन केंद्र सरकार का रुख और मामले से जुड़े दूसरे पक्षों की दलीलें महत्वपूर्ण होंगी. इसके बाद कोर्ट इस बात पर आगे विचार कर सकता है कि स्कूलों में खेल शिक्षा को किस तरह जरूरी बनाया जा सकता है और बच्चों के खेल से जुड़े अधिकार को कानूनी तौर पर किस रूप में देखा जाए.
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