पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को असीम शक्तियां मिल रही हैं। पाकिस्तान की सरकार ने उनके हाथ में अब परमाणु की कमान दे दी है और इन सबके बीच जब यह गतिविधि पाकिस्तान में जारी है। पाकिस्तान में दूसरी तरफ हंगामा है और खबरें हैं। खबरें हैं पुष्टि नहीं करते हैं कि कुछ कार्गो मिलिट्री विमान जो तुर्किए और चीन के हैं, वह पाकिस्तान पहुंच रहे हैं। उनमें क्या ऐसा संदिग्ध सामान है? यह अपने आप में सवाल है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ भी बने हुए हैं और तो और वह अपना प्रमोशन एक बार और करवा रहे हैं। अब उन्हें पाकिस्तान की फेडरल कमेटी ने नए डिफेंस फोर्सेस एक्ट 2026 के मुताबिक जो है नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट 2010 में संशोधन को हरी झंडी दी और बताया यह जा रहा है कि सैन्य कमांड स्ट्रक्चर पर बड़ा असर पड़ेगा। इसका जो बदलाव है आसिम मुनीर के पाकिस्तान में परमाणु कमांड पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा और इसमें सीडीएफ की भूमिका बढ़ जाएगी। पाकिस्तान के परमाणु बटन की चाबी आसिम मुनीर के हाथ आ जाएगी। जो प्रस्तावित बदलाव आया सामने उसमें यह है कि जो चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ फोर्सेस है सीडीएफ उसके पद और उसके मुख्यालय को वैधानिक आधार दिया जाएगा। इसके तहत सीडीएफ हेड क्वार्टर की संरचना, अधिकार, प्रशासनिक व्यवस्था, स्टाफिंग, संयुक्त सैन्य योजना तीनों सेनाओं के बीच समन्वय से जुड़े और तय किए जाएंगे। यानी कि पाकिस्तान के न्यूक्लियर एसेट्स का कंट्रोल सीडीएफ के पास होगा।
बटन किसके पास होगा
आसिम मुनीर के हाथ में परमाणु स्टोरेज की चाबी आ जाएगी। पाकिस्तान अगर किसी संकट में फंस गया और उसे ऐसा लगता है जैसा कि वो तो बात-ब बात पर कहता है कि परमाणु चला देंगे परमाणु है हमारे पास। इससे उसकी जिम्मेदारी आप समझ सकते हैं कि कितना गैर जिम्मेदार है वो। लेकिन उसके बावजूद भी वो फंसता है और फैसला होता है कि किसी के खिलाफ उसे परमाणु हथियार इस्तेमाल करना है। तो इसका इकलौता फैसला जो है वो सैन्य अधिकारी के पास नहीं होगा। ऐसा बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सबसे ऊपर जो है वो नेशनल कमांड अथॉरिटी होगी इस चेन में जिसकी अध्यक्षता वहां पीएम करते हैं। परमाणु नीति और हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े अंतिम फैसले का अधिकार इसी शीर्ष संस्था के पास रहता है। इसके बाद सैन्य स्तर पर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस यानी मौजूदा स्थिति में आसिम मुनीर की भूमिका हो जाती है। नए ढांचे में सीडीएफ को तीनों सेनाओं के संयुक्त सैन्य कमांड रणनीतिक बलों की निगरानी से जोड़ा गया है। उनके नीचे कमांडर नेशनल स्ट्रेटेजिक कमांड सेनाओं के ऑपरेशनल कमांड की जिम्मेदारी जो है वह संभालता है और सीएनएस सी की नियुक्ति जो है वो प्रधानमंत्री जो है और सीडीएफ की सिफारिश पर की जाती है। इसी तरह से सीडीएफ यानी कि जिस पद को अभी आसिम मुनीर के पास है वो बहुत अहम हो जाता है। यानी कि चाबी जो है वो रहेगा आसिम मुनीर के पास और बटन जो रहेगा वो आपके पीएम के पास रहेगा। यानी कि परमाणु पावर में जो बंटवारा लगना था वो दोनों ने आपस में लगा लिया है। और इस बदलाव को अगर हम समझे तो सै जो उनका सतवा संवैधानिक संशोधन है पाकिस्तान में सीडीएफ का जो पद बनाया गया और सीजीसीएससी को खत्म किया गया।
चीन और तुर्की के सैन्य विमान पाकिस्तान पहुंचे?
इन सब के बीच जो फ्लाइट ट्रैकिंग डाटा है और कुछ मीडिया हाउसेस हैं जिसकी हम स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सकते हैं। वो एक अटकल लगा रहे हैं। अटकल यह है कि बीते 60 घंटों के भीतर चीन और तुर्की के सैन्य विमान जो हैं वह पाकिस्तान पहुंचे हैं जिसमें संभावित हथियार सैन्य उपकरण की आपूर्ति को लेकर अटकलें हैं। ओपन सोर्स फ्लाइट ट्रैकिंग डाटा की पड़ताल में तस्वीर थोड़ी अलग है। ज्यादा सावधानी से जो है वह अगर हम उसे पेश करें तो जांच जो है फ्लाइट ट्रैकिंग डाटा की उसके मुताबिक तुर्की के एक सैन्य परिवहन विमान को लेकर तो जानकारी आई है कि टर्किश एयरफोर्स का एयरबस A400 एम एल्टास विमान जिसका रजिस्ट्रेशन जो है और वो तमाम चीजें मौजूद हैं। पाकिस्तान से जुड़ी उड़ान में ट्रैक किया गया है। ओपन सोर्स मिलिट्री एिएशन ट्रैकिंग के मुताबिक यह विमान 18 अगस्त के आसपास पाकिस्तान में था और वहां से बाद में वो वापस लौट आया।
मसरूर और नूर खान एयरबेस पर लैंडिंग
तुर्की का सैन्य विमान जो है जो मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि 60 घंटे से ट्रांसपोर्ट हुआ है 60 घंटे तक चाइना और टर्की से तो उसमें कम से कम एक टर्की का ये विमान तो एस्टैब्लिश देखिए सैन्य परिवहन विमान इस दौरान पाकिस्तान पहुंचता है ये एस्टैब्लिश होता है। टर्किश एयरफोर्स का एक और A400 एम विमान जो है वो भी सक्रिय पाया गया। लेकिन वो एग्जैक्टली कैसे वहां पहुंचा नहीं पहुंचा इसको पुष्टि नहीं कर पाएंगे क्योंकि कई बार अब ये जो बदमाशी ये कर रहे हैं कि ट्रांसफॉर्डर बंद कर देते हैं अपना अपना डाटा छिपा लेते हैं और डार्क मोड में उड़ान भरते हैं। तो ये भी एक बड़ा खेल है ताकि कोई दुनिया उसको पकड़ नहीं पाए। इसके अलावा चाइना के वाई20 सैन्य परिवहन विमान को लेकर भी रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि नूर खान और पाकिस्तान के एयरफोर्स के मसरूर एयरबेस पर ये पहुंचे हैं। लेकिन सार्वजनिक रूप से इसकी हम स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सकते हैं।
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रूस का ब्रह्मास्त्र बता रहा है कि यूक्रेन से जंग अभी और लंबी चलने वाली है। पिछले हफ्ते यूक्रेनी ड्रोंस ने जिस तरह मॉस्को में तबाही मचाई जंग के मैदान में रूसी सैनिकों को खदेड़-खदेड़ कर मारा उसका जवाब रूस की सेना ने तैयार कर लिया है। पेंटासे एसएमडी नाम का यह एयर डिफेंस सिस्टम अब युद्ध के मोर्चे पर तैनात होगा तो ड्रोन से लेकर बैलस्टिक मिसाइल तक इसकी रेंज को पार नहीं कर पाएगी। यह सब कुछ हवा में ही ध्वस्त कर देगा। रूस यूक्रेन की जंग में मिसाइलों से भी घातक साबित हुए हैं ड्रोन। खासतौर से यूक्रेन को सप्लाई किए गए यूरोपियन ड्रोन जिन्होंने इसी हफ्ते मॉस्को में भयंकर तबाही मचाई थी। 16 अगस्त की रात को यूक्रेन ने जिस तरह मॉस्को पर 1000 से ज्यादा ड्रोन हमले किए उससे मॉस्को का पूरा एयर डिफेंस सिस्टम चरमरा गया। लेकिन अब रूस ने बनाया यूक्रेनी ड्रोंस का कार। ब्रह्मास की तरह है रूस का पेंटसीर एसएमडी।
पेंटसीर एमएसडी को ब्रह्मास्त्र क्यों कहा जा रहा है?
यह इसकी खूबियां बताती है। यह जहां भी तैनात होगा वहां से कोई भी ड्रोन गुजर नहीं सकता। पेंटसी को खासतौर पर बड़े पैमाने पर होने वाले हवाई हमलों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। इसकी सबसे अहम खासियतों में से एक है ड्रोन के झुंड यानी बड़ी गिनती में एक साथ आने वाले यूए से मुकाबला करने की क्षमता। फिटसीन को मुख्य रूप से कम दूरी के हवाई खतरों से सुरक्षा के लिए बनाया गया है। रूस के मुताबिक इसका इस्तेमाल ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलेस्टिक मिसाइल जैसे खतरों को रोकने के लिए किया जा सकता है। नए सिस्टम को अलग-अलग तरह के हवाई हमलों के हिसाब से क्फ़िगर किया जा सकता है। इसके लॉन्च रैंक में मिशन के अनुसार अलग-अलग इंटरसेप्टर लगाए जा सकते हैं और सिस्टम में कुल 48 राउंड तक रखे जा सकते हैं। रूसी सेना के मुताबिक पडसीर का यह अपडेटेड वर्जन 24 घंटे अलर्ट पर रहकर हवाई खतरों पर नजर रखता है। इसका मकसद सिर्फ सैनिकों की सुरक्षा करना नहीं बल्कि अहम सैन्य और नागरिक ठिकानों को भी हवाई हमलों से बचाना है। पेंटसीर के पुराने वर्जन के साथ रूसी सेना यूक्रेन के सुसाइड ड्रोंस पर इस वेपन से नजर रखते थे। यह सुसाइड ड्रोन को निशाना साधने वाला खास मशीन था जिस पर क्लास निको का मशीन गन लगा हुआ है।
रूसी सेना जान चुकी है कि ड्रोन इस पूरे जंग में कैसे सैनिकों पर भारी पड़ रही है। जैसा कि आप इस वीडियो में देख सकते हैं। इस वीडियो में साफ दिख रहा है कि ड्रोन किस तरह युद्ध में इंसानों पर भारी पड़ रहा है। रूस के सैनिकों के पीछे पड़े इस यूक्रेनी ड्रोन को देखिए। रूसी सैनिक जब फायरिंग कर रहे हैं। लेकिन ड्रोन की धनादन फायरिंग का कोई जवाब नहीं। आखिर में इस गुफा में छिपने की कोशिश करते सभी रूसी सैनिकों को यूक्रेन का यह ड्रोन मार गिराता है। यूक्रेनी सैनिक सिर्फ ड्रोन के सटीक अटैक ही नहीं कर रहे बल्कि रूसी ड्रोन को निशाना भी बखूबी साध रहे हैं। इस वीडियो में एक यूक्रेनी सैनिक ड्रोन पर निशाना साध रहा है। उसके पास जर्मन एमएम एमजीसी मशीन गन है जिससे वो रूसी ड्रोन को हवा में ही उड़ा देता है। रूस यूक्रेन के पिछले 4 साल की जंग में रूसी सेना का मुकाबला ड्रोन जैसे छोटी हथारों से ही जैसा कि हमने पहले बताया 16 अगस्त की रात जिस तरह यूक्रेन ने मॉस्को पर हमला बोला वो अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन अटैक था। यूक्रेन के ड्रोन ने राजधानी मॉस्को पारिक क्षेत्र के तीन शहरों में भारी तबाही मचाई। यूक्रेन के हमले में रूस में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई।
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