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Explainer: कौन हैं इराक में ईरान समर्थित शिया हथियारबंद समूह, जिसे निशाना बना रहा अमेरिका और सऊदी अरब

Explainer: मिडिल ईस्ट में तनाव जारी है. हालांकि, पिछले दो दिनों से अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कोई बड़ी सैन्य कार्रवाई नहीं की है. लेकिन बीते सप्ताह अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित शिया हथियारबंद गुटों पर ताबड़तोड़ हमले किए. इन सहयोगियों का कहना है कि ये इसी गुट ने सऊदी तेल ठिकानों पर हुए ड्रोन हमले किए थे. अमेरिका और सऊदी अरब के इन हमलों ने उन मिलिशिया (हथियारबंद गुटों) पर ध्यान केंद्रित किया है, जिनके पास इराक में बहुत ज्यादा राजनीतिक और सैन्य ताकत है.

इराक में इतने शक्तिशाली कैसे बने मिलिशिया?

बता दें कि ईरान समर्थि ये शिया गुट तब उभरकर सामने आया जब करीब 23 साल पहले 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में इराक पर हमले के बाद राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की सरकार गिर गई थी और तेहरान ने इराक की राजनीति और सुरक्षा मामलों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली. ईरान से मिलने वाली आर्थिक और सैन्य मदद से ये मिलिशिया ऐसी ताकतवर सेना बन गए हैं जो मारक क्षमता के मामले में राष्ट्रीय सेना का मुकाबला कर सकती हैं. वे इराक के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक ढांचे में भी गहराई से जुड़े हुए हैं; वे बिजनेस नेटवर्क बना रहे हैं और संसद व सरकार में भी जगह बना रहे हैं.

मिलिशिया की गतिविधियों पर नजर रखने वाले दो सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, वे 'इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक' का हिस्सा हैं. यह लगभग 10 कट्टरपंथी शिया हथियारबंद गुटों का एक समूह है, जिसके पास कुल मिलाकर लगभग 50,000 लड़ाके और हथियार मौजूद हैं. जिनमें लंबी दूरी की मिसाइलें और एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार भी शामिल हैं.

'रेजिस्टेंस ग्रुप' ईरान के क्षेत्रीय प्रॉक्सी (प्रतिनिधि) बलों के नेटवर्क का एक अहम हिस्सा है. इस समूह का कहना है कि 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से उसने इजरायल और इराक व सीरिया में अमेरिकी सेना पर दर्जनों मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. ऐसे में ट्रंप प्रशासन ने इराकी नेताओं पर दबाव डाला है कि वे इन हथियारबंद गुटों पर लगाम लगाएं.

कौन से हैं सबसे ताकतवर ग्रुप?

'कताइब हिज्बुल्लाह' इराक में 'इस्लामिक रेजिस्टेंस' का सबसे ताकतवर गुट है. ईरान के सबसे करीबी हथियारबंद ग्रुप्स में से एक है.  जिसे 2000 के दशक के बीच में अबू महदी अल-मुहंदिस ने बनाया था. 2020 में बगदाद पर हुए अमेरिकी हवाई हमले में मुहंदिस और ईरान के बड़े मेजर-जनरल कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी. इस ग्रुप के बनने के कुछ ही समय बाद ये मिलिट्री और डिप्लोमैटिक ठिकानों पर जानलेवा हमले करने के लिए कुख्यात हो गया. इस पर स्नाइपर, रॉकेट, मोर्टार हमलों और सड़क किनारे बम (IED) का इस्तेमाल करने का आरोप लगा.

10,000 सदस्यों वाला संगठन है कताइब हिज्बुल्लाह

अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस के मुताबिक, कताइब हिज्बुल्लाह के 10,000 तक सदस्य हैं. इराकी अधिकारियों और ग्रुप के सदस्यों का कहना है कि उनके पास ड्रोन, रॉकेट और कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा है. अमेरिका ने कई बार कताइब हिज्बुल्लाह के ठिकानों, बेस और ट्रेनिंग व लॉजिस्टिक्स हब पर हमले किए हैं. ग्रुप ने अमेरिकी सेना पर हमले रोकने की सरकारी अपील को मानने से इनकार किया है और उसे चुनौती दी है.

कताइब हिज्बुल्लाह सुन्नी विद्रोहियों के खिलाफ लड़ चुका है जंग

इसने सीरिया के गृह युद्ध के दौरान ज्यादातर सुन्नी विद्रोहियों के खिलाफ दूसरे शिया मिलिशिया के साथ मिलकर लड़ाई लड़ी. ग्रुप ने कहा है कि उसने कई हाई-प्रोफाइल अपहरण किए हैं. इराकी अधिकारियों के मुताबिक, मिलिशिया ने 2023 में इराक में रिसर्च ट्रिप पर आईं इजरायली-रूसी पीएचडी छात्रा एलिजाबेथ त्सुरकोव का अपहरण कर लिया था.

2007 में अमेरिका ने किया था खजाली को गिरफ्तार

'असाइब अहल अल-हक' (लीग ऑफ द राइटियस) की कमान कैस अल-खजाली के हाथ में है. 1974 में बगदाद के गरीब सदर सिटी इलाके में जन्मे खजाली ने इराक के बड़े नेताओं में से एक बनने की कोशिश में अपनी छवि को नरम बनाने की कोशिश की है. अमेरिका के हमले के बाद मची अफरातफरी के बीच खजाली चर्चा में आए. 2007 में, उन्हें अमेरिकी सेना ने गिरफ्तार किया था. उस पर दक्षिणी इराक के शिया बहुल इलाके कर्बला में सरकारी परिसर पर हमले में शामिल होने का आरोप था, जिसमें पांच अमेरिकी सैनिक मारे गए थे. इराक में अमेरिकी जेल में लगभग तीन साल बिताने के बाद उसे रिहा कर दिया गया.

अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ की थी बड़ी कार्रवाई

खजाली ने उग्र धर्मगुरु मोक्तादा अल-सद्र की मेहदी सेना के साथ मिलकर अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, लेकिन 2006 में अपना खुद का हथियारबंद गुट बना लिया. वह उन कई मिलिशिया लड़ाकों में से एक थे जो 2014 में इस्लामिक स्टेट द्वारा देश के बड़े हिस्से पर कब्जा करने और आतंक का राज कायम करने के बाद उससे लड़ने के लिए उत्तरी इराक गए थे.

इराक के गृहयुद्ध में भी शामिल हो चुका है खजाली का गुट

2020 में, खजाली ने कहा था कि इस्लामिक स्टेट की हार के बाद इराक में हजारों अमेरिकी सैनिकों के बने रहने का कोई औचित्य नहीं है और अगर वे नहीं गए तो उन्हें कब्जा करने वाली सेना माना जाएगा. मिलिशिया कमांडर होने के बावजूद, गाजा युद्ध के दौरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिलिशिया के हमलों में खजाली शामिल नहीं हुए और वे इराक के शिक्षा मंत्रालय के साथ काम करते रहे. उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि 2006 से 2007 तक इराक के गृह युद्ध के दौरान हजारों लोगों की मौत में उनका मिलिशिया गुट शामिल था.

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अब ये सुपरस्टार भी राजनीति में ले सकता है एंट्री, सीएम विजय के ज्योतिष ने की भविष्यवाणी

तमिलनाडु की राजनीति में एक्टर धनुष की एंट्री की अटकलें तेज हो रही हैं. अटकलों के बीच, तमिलनाडु के सीएम विजय के ज्योतिष रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि 2031 के चुनाव में विजय और धनुष की सीधी टक्कर संभव है. 

जनसेवा में जुट गए धनुष

खास बात है कि धनुष ने अभी राजनीति में एंट्री पर कुछ भी नहीं कहा है. हालांकि, हाल में आयोजित एक फिल्मी कार्य्रम में उन्होंने अपने प्रशंसकों से कहा था कि ये एकजुटता सिर्फ फिल्मी आयोजनों तक ही सीमित न रहे. अपने क्षेत्रों में जनसेवा करें. बता दें, अपने 43वें जन्मदिन पर धनुष ने गरीबों को मुफ्त ऑटो रिक्शे दिए हैं. वहीं करीब 30 लोगों को उन्होंने रोजगार के लिए आर्थिक मदद की है.  

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धनुष के करीबी सूत्रों का कहना है कि वह राज्य के दौरे की प्लानिंग कर रहे हैं. वे यहां अपने प्रशंसकों से मुलाकात करेंगे. जनकल्याण कार्यों के जरिए वह लोगों से जुड़ेंगे.

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MGR ने एक्टर्स के राजनीति में आने के प्रेरणास्त्रोत

विश्लेषक आर. रंगराज कहते हैं कि कभी एमजीआर ने फिल्मी सितारों की एक पूरी पीढ़ी को राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया. MGR के नक्शे कदम पर चलते हुए विजय ने अपनी लोकप्रियता को राजनीतिक ताकत में बदल दिया. ऐसे में कोई आश्चर्य नहीं होगा कि अगर भविष्य में धनुष, सूर्या और विशाल जैसे लोकप्रिय अभिनेता सीएम पद की दौड़ में दिखाई दें. विजय के सत्ता में आने की वजह से डीएमके और एआईडीएमके को बड़ा झटका लगा है. 

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फैन क्लब ने तस्वीर के साथ झंडा बनाया

धनुष के फैन क्लब ने एक झंडा जारी किया है. इसमें सफेद औऱ लाल स्टार और बीच में धनुष की तस्वीर है. हालांकि, फैंस क्लब के अध्यक्ष सुब्रमण्यम शिवा का कहना है कि ये कोई नया झंडा नहीं है. वे इस झंडे का इस्तेमाल पिछले 15 वर्षों से कर रहे हैं. वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि विजय की तरह ही ऑर्गनाइज फैन क्लब और सोशल वेलफेयर के काम रणनीति का ही हिस्सा है

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​Success Story Yamini Maurya: सरकारी स्कूल की दहलीज से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराने वाली यामिनी की कहानी बेहद प्रेरणादायक है. पैर टूटने जैसी गंभीर चोट और सीमित संसाधनों के बावजूद यामिनी के हौसले पस्त नहीं हुए. ​अभ्यास के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब यामिनी का पैर टूट गया था. डॉक्टर और खेल विशेषज्ञों ने करियर पर संकट बताया, लेकिन यामिनी ने हार नहीं मानी और चोट से उबरकर दोगुनी ताकत से मैट पर वापसी की. Sun, 2 Aug 2026 15:02:02 +0530

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