Himannshi Khurrana ने पारस छाबड़ा के पॉडकास्ट में किया खुलासा, Asim Riaz संग रिश्ते में धर्म बदलने का था दबाव
बिग बॉस 13 फेम हिमांशी खुराना और आसिम रियाज की लव स्टोरी एक समय में काफी सुर्खियों में रही थी। शो में शुरू हुआ यह रिश्ता बाहर आने के बाद करीब चार साल तक चला और दिसंबर 2023 में दोनों ने ब्रेकअप कर लिया। उस दौरान अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं को ब्रेकअप की वजह बताया गया था। अब सालों बाद हिमांशी खुराना ने पारस छाबड़ा के पॉडकास्ट में अपने इस पुराने रिश्ते, मानसिक तनाव और धर्म परिवर्तन से जुड़े कई हैरान कर देने वाले खुलासे किए हैं।
मुझ पर धर्म बदलने का मानसिक दबाव था
पॉडकास्ट के दौरान हिमांशी खुराना ने बताया कि आसिम रियाज चाहते थे कि वे उनके धर्म और मान्यताओं को समझें और अपना लें। हिमांशी ने खुलासा किया कि उन पर इतना मानसिक दबाव बनाया गया था कि एक वक्त वे अपना धर्म बदलने तक को तैयार हो गई थीं। उन्होंने बताया, "मुझे साफ कह दिया गया था कि इसके बाद तुम पूजा-पाठ या धार्मिक चीजें नहीं कर सकोगी। तब मैंने कसम खाकर कहा था कि उससे पहले मुझे चार धाम और सभी मंदिरों के दर्शन पूरे करने हैं, क्योंकि इसके बाद मैं कभी वहां नहीं जा पाऊंगी।" इसे भी पढ़ें: मुंबई में Ranveer Singh ने शुरू की Pralay की शूटिंग, Kalyani Priyadarshan भी जल्द होंगी शामिल
लगता था जैसे अपने भगवान को धोखा दे रही हूं
हिमांशी ने आगे उस दौरान अपने मन में चल रही उथल-पुथल का जिक्र करते हुए कहा कि उनके मन में अजीब ख्याल आने लगे थे। उन्हें लगता था कि अगर वे दूसरे धर्म की प्रार्थना भी करेंगी, तो उनके अंदर से वाहेगुरु या ॐ नमः शिवाय ही निकलेगा और यह अपने भगवान के साथ धोखा होगा। हिमांशी ने कहा, "मेरे मन में यह सवाल उठने लगा था कि मरने के बाद मेरी चिता जलेगी या कब्र बनेगी? यह सवाल अंदर से आया और मुझे लगा कि मैं अपने भगवान को धोखा नहीं दे सकती।" इसे भी पढ़ें: Sonam Bajwa Birthday: एक्टिंग का जुनून ले आया फिल्म इंडस्ट्री, Punjabi Cinema के बाद Bollywood में मचाया धमाल
धार्मिक आजादी के साथ रिश्ता खत्म करने का फैसला
हिमांशी ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति में कोई कमी नहीं थी और न ही उनके साथ कोई गलत व्यवहार हुआ था, लेकिन अपनी धार्मिक पहचान खोना उन्हें मंजूर नहीं था। उन्होंने कहा कि हर इंसान को अपनी मर्जी से जीने और अपनी धार्मिक मान्यताओं को बनाए रखने का पूरा हक होना चाहिए। किसी भी रिश्ते में किसी पर धर्म बदलने का दबाव नहीं डाला जाना चाहिए। अंत में, हिमांशी ने दूसरे धर्म के रीति-रिवाजों को मानने से इंकार कर दिया और अपनी धार्मिक पहचान की रक्षा करते हुए रिश्ते को हमेशा के लिए खत्म कर लिया।
कैम्ब्रिज के सबसे कम उम्र के ब्लैक प्रोफेसर की मौत:घर में बेहोश मिले, रिसर्च में नकल के आरोपों के बाद यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था
इंग्लैंड की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर रहे जेसन अर्डे का 41 साल की उम्र में निधन हो गया। वे शिक्षा और समाज से जुड़े विषयों पर रिसर्च और अध्यापन करते थे। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे उन्हें दक्षिण लंदन के बैटरसी स्थित उनके घर में बेहोश पाया गया। एंबुलेंस टीम ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, उनकी मौत अचानक हुई। अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे मौत को संदिग्ध माना जाए। पुलिस परिवार के संपर्क में है और मामले की जांच कर रही है। मौत से कुछ दिन पहले ही कैम्ब्रिज से दिया था इस्तीफा जेसन अर्डे ने 5 अगस्त को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था। यह फैसला उनकी कुछ रिसर्च को लेकर उठे सवालों के बीच आया था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने उनकी नियुक्ति और यूनिवर्सिटी में उनके कामकाज की जांच भी शुरू की थी। यूनिवर्सिटी यह पता लगा रही थी कि अर्डे को 2022 में प्रोफेसर की नौकरी कैसे मिली और उनके काम के दौरान क्या हुआ। इस्तीफा देने के बाद अर्डे ने कहा था कि लगातार लग रहे आरोपों और उनके बारे में सार्वजनिक रूप से की जा रही टिप्पणियों का उन पर बहुत गहरा असर पड़ा। रिसर्च के कुछ हिस्सों पर नकल के आरोप लगे थे अर्डे ने 2015 में ब्रिटेन की लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी से पीएचडी की थी। इस दौरान उन्होंने एक रिसर्च रिपोर्ट लिखी थी। बाद में उनकी रिसर्च के कुछ हिस्सों पर आरोप लगे कि उन्होंने दूसरे लोगों के लिखे काम को बिना उचित श्रेय दिए अपनी रिसर्च में इस्तेमाल किया। आसान भाषा में कहें तो उन पर रिसर्च में नकल करने का आरोप लगा था। अर्डे ने इन आरोपों को गलत बताया था। इसके बाद उनकी कुछ दूसरी रिसर्च में भी गलतियां होने के आरोप लगाए गए। नियुक्ति पर भी उठे थे सवाल अर्डे की कैम्ब्रिज में नियुक्ति को लेकर भी विवाद हुआ था। कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें उनकी योग्यता के बजाय यूनिवर्सिटी की विविधता बढ़ाने वाली नीति के तहत नौकरी दी गई। इस तरह की नीतियों को आम तौर पर DEI कहा जाता है। इसका मतलब है कि अलग-अलग समुदायों और कम प्रतिनिधित्व वाले लोगों को संस्थानों में बराबर मौके दिए जाएं और उनकी भागीदारी बढ़ाई जाए। हालांकि, ब्रिटेन की शिक्षक यूनियन के नेता डेनियल कबेडे ने अर्डे का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि अर्डे को सार्वजनिक रूप से बहुत बुरी तरह निशाना बनाया गया। उन्होंने ब्रिटिश मीडिया और दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों के एक वर्ग पर अर्डे के खिलाफ नस्लवादी अभियान चलाने का आरोप लगाया था। DEI क्या है और इसे लेकर विवाद क्या है? DEI यानी डायवर्सिटी, इक्विटी एंड इंक्लूजन का मतलब अलग-अलग समुदायों, नस्लों और कम प्रतिनिधित्व वाले लोगों को संस्थानों में बराबर मौके देना और उनकी भागीदारी बढ़ाना है। यूनिवर्सिटीज में DEI नीतियों का मकसद ऐसे लोगों की संख्या बढ़ाना है, जिनकी शिक्षा और नौकरियों में लंबे समय से कम भागीदारी रही है। इसके आलोचकों का कहना है कि इससे कभी-कभी योग्यता के बजाय किसी व्यक्ति की पहचान को ज्यादा महत्व मिलने का खतरा रहता है। समर्थकों का तर्क है कि बराबरी के मौके देने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं। परिवार बोला- गलत जानकारी के अभियान ने उन्हें बहुत परेशान किया अर्डे के परिवार ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया। परिवार ने कहा कि जेसन के बारे में फैलाई जा रही गलत जानकारियों का उन पर बहुत बुरा असर पड़ा था। परिवार के मुताबिक, अर्डे शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और हमेशा दूसरों में अच्छाई देखने की कोशिश करते थे। परिवार ने मीडिया से अपील की कि अब उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए। उन्होंने जेसन और उनके परिवार के खिलाफ लंबे समय से चल रहे उत्पीड़न को रोकने की भी अपील की। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की प्रमुख डेबोरा प्रेंटिस ने अर्डे की मौत पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में उनकी संवेदनाएं अर्डे के परिवार और दोस्तों के साथ हैं। ब्रिटेन की शिक्षा मंत्री लूसी पॉवेल ने भी उनके निधन पर शोक जताया। -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ब्रिटेन में कट्टरपंथी नेता के सामने कूड़ेदान वाला उम्मीदवार:अजीबोगरीब वादों से सुर्खियां बटोर रहा, कहा- हर वोटर को सस्ता घर दूंगा ब्रिटेन में इन दिनों एक ऐसा उम्मीदवार चर्चा में है, जो चुनाव प्रचार के दौरान कूड़ेदान जैसी पोशाक पहनता है और खुद को एलियन बताता है। काउंट बिनफेस नाम के ये उम्मीदवार क्लैक्टन उपचुनाव में रिफॉर्म यूके के कट्टरपंथी नेता नाइजेल फराज के खिलाफ मैदान में हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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