Umesh Patel: सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में सांसद को दो साल की सजा
दमन, एक अग्सत दमन एवं दीव से निर्दलीय लोकसभा सदस्य उमेश पटेल और एक अन्य आरोपी को 2011 में भर्ती प्रक्रिया के दौरान सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डालने के लिए शनिवार को दो साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई। दमन, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन-दीव केंद्र शासित प्रदेश के दमन स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रणिता भारसकाडे-वाघ की अदालत ने उमेश पटेल और सह-आरोपी व पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुरेश पटेल को यह सजा सुनाई। दोनों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
हालांकि, ऊपरी अदालत में अपील दायर करने के लिए उनकी सजा को एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया। दोनों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 186 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य का पालन करने से जानबूझकर रोकना) और धारा 353 (लोक सेवक के खिलाफ आपराधिक बल का इस्तेमाल करना) के तहत दोषी ठहराया गया। हालांकि, अदालत ने उन्हें आईपीसी की धारा 332 (पुलिसकर्मी को जानबूझकर चोट पहुंचाना), धारा 452 (अवैध रूप से घर या परिसर में घुसना) और धारा 504 (जानबूझकर अपमान करना) के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मामला 12 मार्च 2011 का है, जब दोनों ने मोती दमन के फुटबॉल मैदान में कथित रूप से प्रवेश किया था, जहां आबकारी उप-निरीक्षक के पद के लिए भर्ती प्रक्रिया जारी थी। शिकायतकर्ता और उस समय के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगमोहनेंद्र सिंह नेशिकायत में आरोप लगाया था कि दोनों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को धक्का दिया और जबरन उस स्थान में प्रवेश किया, जहां उप-निरीक्षकों की साक्षात्कार प्रक्रिया जारी थी। शिकायत के अनुसार उन्होंने पुलिसकर्मियों से दुर्व्यवहार किया और सरकारी कर्मचारियों को उनके आधिकारिक कार्य करने से रोका।
मुकदमे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत ने शनिवार को दोनों को दोषी ठहराया और दो साल की साधारण कैद की सजा सुनाई। उमेश पटेल ने 2024 के लोकसभा चुनाव में दमन एवं दीव सीट से तीन बार के भाजपा सांसद लालू पटेल को हराया था।
Ayodhya राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच अंतिम चरण में, ट्रस्ट सदस्य का बयान
अयोध्या (उप्र), एक अगस्त श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक सदस्य ने शनिवार को बताया कि अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच अंतिम चरण में पहुंच गई है और एक नव गठित जांच टीम मंदिर परिसर के अंदर लोगों से पूछताछ कर रही है। ट्रस्ट के सदस्य महंत दीनेन्द्र दास ने कहा कि भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने, चांदी और अन्य चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। यह बयान तब आया है जब ट्रस्ट ने चल रही जांच के बीच दान इकट्ठा करने और उसे गिनने की प्रक्रिया में ज़्यादा पारदर्शिता लाने के लिए निगरानी बढ़ा दी है।
संसद में हुई एक घटना, जिसमें कथित तौर पर रामलला की तस्वीर जमीन पर रखी गई थी, पर प्रतिक्रिया देते हुए महंत दीनेन्द्र दास ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया। उन्होंने संसद सदस्यों से धार्मिक आस्था और भगवान राम की छवि का सम्मान करने की अपील की। दास ने यह भी कहा कि राम मंदिर में पूजा और दर्शन सुचाारु रूप से चल रहे हैं और रोज़ाना आरती और अनुष्ठान वैष्णव परंपरा के अनुसार किए जा रहे हैं।
दास ने पहले कहा था कि 25 जुलाई से दान संभालने की प्रक्रिया के हर चरण, गिनती वाले कमरे से खाली बक्से हटाने से लेकर उन्हें ले जाने, भरने, सील करने और वापस लाने तक की लगातार वीडियोग्राफी के ज़रिए निगरानी की जा रही है। इस प्रक्रिया की देखरेख के लिए आठ सदस्यीय निगरानी टीम तैनात की गई है, जिसमें बैंक कर्मचारी, ट्रस्ट के प्रतिनिधि, निजी सुरक्षाकर्मी और अन्य नियुक्त कर्मचारी शामिल हैं। मंदिर परिसर में लगी लगभग 40 दान पेटियों को अब एक साथ खाली करने के बजाय अलग-अलग दिनों में खाली किया जा रहा है।
ट्रस्ट के अनुसार, पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड करने के लिए दो पेशेवर वीडियोग्राफर तैनात करने के साथ हर जगह पर नजर रखने के लिए कैमरे लगाए गए हैं। दान की गिनती वाले कमरे के अंदर अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। गिनती वाले कमरे में पहुंचने के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी दान से भरे बक्सों को सील करते हैं।
यह बढ़ी हुई निगरानी मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के बाद शुरू की गई थी, जिसके कारण विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) से जांच कराई जा रही है। पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है। इस विवाद के कारण मंदिर ट्रस्ट में भी बदलाव हुए हैं और मामला सामने आने के बाद पूर्व महासचिव चंपत राय सहित वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपने पद छोड़ दिए।
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