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Independence Day 2026: स्वतंत्रता आंदोलन में मंदिर, गुरुद्वारे और आश्रमों की क्या थी भूमिका? जानिए आजादी की लड़ाई से जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थल

Independence Day 2026: 15 अगस्त के दिन हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं. इस दिन हमारा देश आजाद हुआ था. साल 1947 में भारत की आजादी का श्रेय सिर्फ स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को नहीं दिया जा सकता है. उस समय देश के मंदिर, गुरुद्वारों, मठों और आश्रमों ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई है. ये स्थल जनजागरण, संगठन और सामाजिक एकता के केंद्र बने थे. कई धार्मिक स्थलों पर स्वतंत्रता सेनानियों की बैठक हुआ करती थी. यहीं से आंदोलनों की रणनीति बनी और लोगों में राष्ट्रभक्ति का संदेश पहुंचा था. चलिए आज हम आपको इस आर्टिकल में बताते हैं कि आजादी की लड़ाई से जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थल कौन-कौन से हैं.

धार्मिक स्थलों की अंग्रेजों से आजादी की लड़ाई में क्या भूमिका रही?

अंग्रेजों के समय में धार्मिक स्थलों पर लोग बड़ी संख्या में पहुंचते थे. इन जगहों पर सामाजाकि और राष्ट्रीय चेतना फैलाई जाती थी. उस समय इन्हीं जगहों पर कई संतों, महात्माओं और धार्मिक नेताओं द्वारा स्वदेशी, सत्याग्रह और आत्मनिर्भर होने का संदेश दिया था. कई बड़े आंदोलनों की शुरुआत इन्हीं जगहों से हुई थी. कुछ स्थान क्रांतिकारियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना भी हुआ करता था.

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आजादी के आंदोलन से जुड़े 10 धार्मिक स्थल

1.साबरमती आश्रम

गुजरात के साबरमती आश्रम की स्थापना स्वंय महात्मा गांधी ने की थी. उन्होंने इसकी स्थापना 25 मई 1915 में की थी. यह साबरमती नदी के किनारे स्थित एक आश्रम है, जिसका शुरुआत में नाम सत्याग्रह आश्रम था. यहां से उन्होंने दांडी मार्च और सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था.

2.सेवाग्राम आश्रम (वर्धा)

सेवाग्राम आश्रम महाराष्ट्र के वर्धा जिले में स्थित है. यह महात्मा गांधी का अंतिम निवास स्थान और ऐतिहासिक केंद्र था. इस जगह को उन्होंने साल 1936 में बसाया था.  इस आश्रम से ही 'भारत छोड़ो आंदोलन' (1942) जैसे कई बड़े राष्ट्रीय आंदोलनों की रूपरेखा तय की गई थी. साथ ही यहां कांग्रेस नेताओं की बैठक भी हुआ करती थी.

3.स्वर्ण मंदिर

पंजाब के अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर जिसे गोल्डन टेंपल भी कहा जाता है. यह सिखों का प्रमुख धार्मिक स्थल है. इस गुरुद्वारे की खासियत देश-विदेशों तक है. इस स्थान से आजादी का संदेश और सामाजिक एकता का संदेश दिया गया था. साल 1920 से 1925 के बीच अंग्रेजों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव वाले भ्रष्ट महंतों से ऐतिहासिक गुरुद्वारों को मुक्त कराने के लिए यहीं से शांतिपूर्ण और दृढ़ सत्याग्रह आंदोलनों की रूपरेखा बनी थी. 

4.जलियानवाला बाग

जालियनवाला बाग हत्याकांड साल 1919 में हुआ था. यह स्थान स्वर्ण मंदिर के बिल्कुल निकट है, जिसके बाद इस पवित्र परिसर ने स्वतंत्रता सेनानियों को शरण, संबल और अन्याय के खिलाफ लड़ने की आध्यात्मिक शक्ति दी थी. हालांकि, यह जगह कोई धार्मिक स्थल नहीं है लेकिन इस स्थान पर हुए नरसंहार ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था.

5.काशी विश्वनाथ मंदिर

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर की भी देश की आजादी में बेहद अहम भूमिका रही है. उस दौर में पूरे वाराणासी का माहौल राष्ट्रवादी था. इसे भारत की आध्यात्मिक राजधानी भी माना जाता है. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश के कोने-कोने से आए नेता, संत और विचारक काशी में ही मिलते थे. 

6.बेलूर मठ

पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के समीप बसा यह मठ भी भारत की आजादी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है. इस मठ की स्थापना स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में की थी. यह रामकृष्ण आंदोलन का केंद्र और मुख्य कार्यालय था. बेलूर मठ का भव्य परिसर श्री रामकृष्ण, श्री शारदा देवी और स्वामी विवेकानंद को समर्पित मंदिरों से सुशोभित है.

7.श्री अरविंद आश्रम

पुडुचेरी में स्थित श्री अरबिंदो आश्रम की स्थापना श्री अरबिंदो और मीरा अल्फासा ने की थी. यह आश्रम बेहद खूबसूरत है जिसके केंद्र में एक सुंदर संगमरमर की समाधि है, जहां श्री अरबिंदो और द मदर के अवशेष रखे गए हैं. आश्रम के संस्थापक श्री अरविंद क्रांतिकारी विचारधारा के थे और उन्होंने खुले तौर पर देश के लिए पूर्ण आजादी की मांग रखी थी. संयोग से 15 अगस्त के दिन ही उनका जन्मदिन भी पड़ता है. ब्रिटिश दौर में कई स्वतंत्रता सेनानी इस आश्रम में रुकते थे. आश्रम ने एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की नींव रखी थी, जो पश्चिमी प्रभाव से मुक्त होकर भारतीय मूल्यों और आधुनिक विज्ञान का समन्वय करती थी.

8.दक्षिणेश्वर काली मंदिर

पश्चिम बंगाल में स्थित इस मंदिर की स्थापना 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के ठीक दो साल पूर्व यानी 1855 में हुई थी. अंग्रेजों के समय भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक यह मंदिर कहलाता था. इस मंदिर ने ही लोगों में स्वदेशी और धर्म के प्रति गौरव जगाया था. इस मंदिर में सालों तक रामाकृष्ण परमहंस ने पुजारी और आध्यात्मिक गुरु के रूप में सेवाएं दी थी. स्वामी विवेकानंद को भी यही से मार्गदर्शन मिला था. उनके विचारों ने अनेक युवाओं और स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया.

9.गोपाल मंदिर, इंदौर, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के इंदौर में बसा गोपाल मंदिर एक ऐतिहासिक स्थल है. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रवादियों के लिए यह प्रमुख स्थान था. वर्ष 1880 से 1920 के दशक के बीच, इस मंदिर परिसर में जमनालाल बजाज जैसे कई बड़े राष्ट्रीय नेताओं और क्रांतिकारियों के देशभक्तिपूर्ण भाषण आयोजित होते थे. साल 1920 में असहयोग आंदोलन के दौरान इस मंदिर ने मालवा क्षेत्र में आम जनता को अंग्रेजों के खिलाफ जन-जागरण करने में मुख्य भूमिका निभाई थी.

10.तख्त श्री केसगढ़ साहिब

तख्त श्री केसगढ़ साहिब में ही 13 अप्रैल 1699 को गुरु गोबिंद सिंह जी ने यहीं से पंज प्यारे स्थापित किए थे. इसे खालसा पंथ का स्थापना क्षेत्र भी कहते हैं. मुगलों और अन्यायपूर्ण शासन के खिलाफ स्वतंत्रता व मानवाधिकारों के लिए लड़ने की प्रेरणा इस स्थान से मिली थी. आज के समय में यह स्थान आनंदपुर साहिब पंजाब में स्थित है. मुगलों के अलावा, अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में भी इस स्थान का गहरा और सीधा योगदान रहा है. अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति करने वाले 'गदर पार्टी' के वीरों और 'बब्बर अकाली आंदोलन' के क्रांतिकारियों ने तख्त श्री केसगढ़ साहिब से ही अन्याय के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया था.

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में कौन-कौन से धार्मिक नेताओं का योगदान था?

  1. महात्मा गांधी
  2. स्वामी विवेकानंद
  3. स्वामी दयानंद सरस्वती
  4. बंकिम चंद्र चटर्जी
  5. लोकमान्य तिलक 
  6. मौलाना महमूद हसन 
  7. मजहरुल हक
  8. बाबा गुरुदित्त सिंह
  9. बाबा खड़क सिंह

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