क्या पाकिस्तान एक बार फिर डिफॉल्ट होने की कगार पर बाल-बाल बचा है या फिर सऊदी अरब ने पाकिस्तान की गर्दन पर लटकी कर्ज की तलवार को 3 साल के लिए और ढीला कर दिया है। जिस देश के पास अपने कंगाली के ढोल पीटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा उस पाकिस्तान को एक बार फिर सऊदी अरब ने संजीवनी बूटी दे दी है। पूरे $5 अरब डॉलर। $5 अरब डॉलर का कर्ज रोलओवर हो चुका है। यानी अगले 3 साल तक पाकिस्तान को यह पैसा सऊदी को वापस नहीं लौटाना पड़ेगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये पाकिस्तान के लिए राहत की बात है या ये इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि पाकिस्तान बिना विदेशी बैसाखियों के अब दो दिन भी नहीं चल सकता। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब और स्टेट बैंक के गवर्नर जमील अहमद आज छाती ठोक कर कह रहे हैं कि सऊदी ने हमारी मदद कर दी है। रोलओवर का मतलब तरक्की नहीं होता है। रोलओवर का सीधा सा मतलब है कि आपकी जेब में पैसा लौटाने की औकात नहीं। इसीलिए आपने हाथ जोड़कर मालिक से कहा हुजूर थोड़ा टाइम और दे दो। अभी हम लुटे पीटे हैं और सुनिए ये पहली या दूसरी बार नहीं है।
सऊदी अरब ने लगातार तीसरी बार पाकिस्तान को यह मोहलत दी है। अगर सऊदी अपना पैसा आज वापस मांग ले तो अगले 24 घंटे के अंदर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह जाएगी। अब जो आंकड़े मैं आपको बताने जा रही हूं उन्हें सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पास विदेशी जमा के नाम पर कुल $1 अरब डॉलर पड़े हैं। और आपको जानकर हैरानी होगी कि इस 12 में से $8 अरब डॉलर अकेले सऊदी अरब का है। यानी पाकिस्तान का अपना फॉरेक्स रिजर्व्स सिर्फ नाम का है। असली मालिक तो रियाद में बैठा है। इस चालू वित्त वर्षा में पाकिस्तान को 21.5 अरब डॉलर का विदेशी कर चुकाना पड़ा है। अकेले जुलाई 2026 में ही यह $.2 अरब डॉलर बहा चुका है। 3 जुलाई को इनका विदेशी मुद्रा भंडार $8.4 अरब डॉलर का था जो कर्ज की किस्तें चुकाते-चुकाते 17 जुलाई तक घटकर 17.2 अरब डॉलर पार कर चुका है। सोचिए अगर सऊदी के यह $5 अरब डॉलर रोल ओवर ना होते तो पाकिस्तान अपने कर्ज की किस्ते चुकाना तो दूर अपने देश के लिए तेल और आटा भी नहीं खरीद पाता। सवाल यह है कि क्या सऊदी अरब यह सब मुफ्त में कर रहा है?
बिल्कुल नहीं। दुनिया में कोई किसी को मुफ्त में $5 अरब डॉलर नहीं देता। सऊदी अरब जानता है कि पाकिस्तान इस वक्त उनके इशारों पर नाचने को मजबूर है। चाहे वो मध्यपूर्व यानी मिडिल ईस्ट की राजनीति हो या रणनीति फायदे। सऊदी जब चाहे पाकिस्तान का गला दबा सकता है। पाकिस्तान आज एक ऐसा मुल्क बन चुका है जो सिर्फ कर्ज लेकर पुराना कर्ज चुका रहा है। इसे अर्थशास्त्र की भाषा में डेफ ट्रैप यानी कर्ज का चक्रव्यूह कहते हैं। स्टेट बैंक के गवर्नर भले ही कहें कि तनाव कम हो गया है लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि यह राहत सिर्फ और सिर्फ वेंटिलेटर पर पड़े मरीज को कुछ दिन और जिंदा रखने जैसी है। जब तक पाकिस्तान अपनी बर्बादी की नीतियां नहीं बदलेगा 3 साल क्या? 30 साल बाद भी यह देश कटोरे लेकर ही खड़ा मिलेगा।
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