Delhi में DTC बसों की गुलाबी टिकट सुविधा 15 अगस्त तक बढ़ी, 16 से Pink Saheli कार्ड अनिवार्य
दिल्ली सरकार ने डीटीसी बसों में महिला यात्रियों के लिए गुलाबी टिकट सुविधा को 15 अगस्त तक बढ़ा दिया है। एक आधिकारिक आदेश में शुक्रवार को यह जानकारी दी गई। परिवहन विभाग की ओर से जारी पूर्व निर्देश के तहत अगस्त से ‘पिंक सहेली’ स्मार्ट कार्ड अनिवार्य किया जाना था।
डीटीसी ने एक आदेश में कहा, ‘‘स्मार्ट कार्ड-आधारित प्रणाली में सुचारु परिवर्तन की सुविधा के लिए मौजूदा व्यवस्था का विस्तार करने का निर्णय लिया गया है। तदनुसार, सभी डीटीसी बसों में तत्काल प्रभाव से निर्देशों का अनुपालन किया जाएगा।’’ इसमें कहा गया, ‘‘16 अगस्त से गुलाबी टिकट केवल उन्हीं महिला यात्रियों को जारी किए जाएंगे जिनके पास वैध ‘पिंक सहेली’ स्मार्ट कार्ड है।’’ अब तक शहर भर में लगभग 17 लाख ‘पिंक सहेली’ स्मार्ट कार्ड वितरित किए जा चुके हैं और सरकार का लक्ष्य इन आंकड़ों को बढ़ाना है। अधिकारियों ने बताया कि महिला यात्रियों द्वारा ‘पिंक सहेली’ कार्ड को धीमी गति से अपनाने के मद्देनजर दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने अपनी बसों में महिलाओं को कार्ड प्राप्त करने की सलाह देते हुए एक विशेष अभियान चलाया था।
अधिकारियों के अनुसार, मुफ्त बस यात्रा का लाभ उठाने के लिए मौजूदा कागज-आधारित गुलाबी टिकट को धीरे-धीरे समाप्त करने और स्मार्ट कार्ड-आधारित प्रणाली में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है।
Bihar Police Traffic Rules: वाहन रोकने का अधिकार केवल दारोगा या उससे ऊपर के अधिकारी को
बिहार में वाहन जांच के दौरान किसी वाहन को रोकने, चालान काटने या अन्य कार्रवाई करने का अधिकार दारोगा अथवा उससे ऊपर के अधिकारी को ही होगा। जमादार या सिपाही रैंक के कर्मी किसी वाहन को न तो रोकेंगे और न ही उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई करेंगे। यह जानकारी अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) (यातायात) सुधांशु कुमार ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय स्थित सरदार पटेल भवन के सभागार में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी।
उन्होंने कहा कि यदि वाहन चालक डिजिलॉकर या किसी अन्य ऑनलाइन माध्यम से वाहन संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करता है तो उन्हें भी पूरी तरह वैध माना जाएगा, बशर्ते दस्तावेज वास्तविक और प्रमाणिक हों। एडीजी ने कहा कि यातायात ड्यूटी में तैनात सभी कर्मियों के लिए ‘बॉडी-वॉर्न कैमरा’ पहनना अनिवार्य किया गया है। कैमरा चालू किए बिना किसी प्रकार की वाहन जांच या चालान संबंधी कार्रवाई को अनुचित माना जाएगा।
उन्होंने बताया कि पटना के गांधी मैदान स्थित एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) से प्रमुख स्थानों पर यातायात की निगरानी की जाएगी। कहीं भी जाम या अन्य समस्या उत्पन्न होने पर वहां तैनात यातायात पुलिसकर्मियों अथवा क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) को तत्काल सूचना देकर स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया जाएगा। सुधांशु कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री राहत योजना के बारे में जागरूकता की कमी के कारण लोग इसका पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति का चिह्नित अस्पतालों में 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज कराया जा सकता है। इसके लिए दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर कॉल सेंटर या स्थानीय थाने को सूचना देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में अब तक बिहार में केवल 82 लोग ही इस कैशलेस उपचार योजना का लाभ उठा सके हैं।
एडीजी ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुरूप सभी जिलों में मोटर वाहन दावा अधिकरण (एमएसीटी) का गठन किया जा चुका है। इसके माध्यम से सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 3,339 मामलों में 1,972 लोगों को मुआवजा दिलाया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि पटना सहित राज्य के सभी प्रमुख शहरों में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए रेहड़ी पटरी मुक्त क्षेत्र और प्रमुख सड़कों से अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्रवाई की जा रही है। एडीजी ने कहा कि पटना में ऑटो चालकों को यातायात नियमों के प्रति अनुशासित करने के लिए पुलिसकर्मियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। यातायात संचालन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए पुलिस पदाधिकारियों को भी प्रशिक्षण दिया गया है।
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