इंदौर महेश मालवीय हत्याकांड का खुलासा, शराब पार्टी का मामूली विवाद बना हत्या की वजह, पुलिस ने शातिर आरोपी को दबोचा
इंदौर में शराब पीने के दौरान हुए मामूली विवाद में महेश मालवीय का ईंट से सिर कुचलकर हत्या करने वाला आरोपी आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गया है। इंदौर की सेन्ट्रल कोतवाली पुलिस ने एक अंधे कत्ल का सनसनीखेज खुलासा किया है। उज्जैन निवासी महेश मालवीय के शव मिलने के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फरार चल रहे आरोपी आशीष उर्फ चंद पिता चेतराम गंगवाल को गिरफ्तार कर लिया। आशीष रायसेन जिले के ग्राम नादौर का रहने वाला है।
पिछले दिनों इंदौर के सेन्ट्रल कोतवाली थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति का लहूलुहान शव मिलने से शहर में हड़कंप मच गया था। मृतक की पहचान इमाम बाग, उज्जैन निवासी महेश मालवीय के रूप में हुई थी। यह मामला पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था, क्योंकि हत्यारे का कोई सुराग नहीं था। सेन्ट्रल कोतवाली पुलिस टीम के नेतृत्व में इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश करने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया था।
सीसीटीवी फुटेज खंगालकर आरोपी तक पहुंची पुलिस
पुलिस टीम ने मामले की गहराई से तफ्तीश शुरू की। जांच के दौरान घटनास्थल और आसपास के इलाकों की बारीकी से पड़ताल की गई। इसके साथ ही, पुलिस ने इंदौर, उज्जैन और भोपाल के करीब 400 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। फुटेज के आधार पर और मुखबिर तंत्र की मदद से लगभग 30 संदिग्धों से कड़ी पूछताछ की गई। इस गहन छानबीन के बाद ही पुलिस आरोपी तक पहुंच पाई।
शराब पीने की बात को लेकर हुई बहस, फिर ईंट से वार कर की हत्या
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी आशीष और मृतक महेश मालवीय के बीच शराब पीने की बात को लेकर तीखी बहस हुई थी। यह विवाद धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि दोनों में मारपीट होने लगी। गुस्से में आग बबूला होकर आरोपी आशीष ने पास में रखी एक ईंट उठा ली। उसने उस ईंट से महेश मालवीय के सिर पर ताबड़तोड़ कई वार किए। इन गंभीर वारों के चलते महेश की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी आशीष मौके से फरार हो गया था।
आरोपी आशीष बेहद शातिर था और पुलिस को चकमा देने की पूरी कोशिश कर रहा था। वह मोबाइल फोन या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं करता था। इस वजह से उसे ट्रेस करने में पुलिस टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस की विशेष टीमें आरोपी की तलाश में रायसेन और उज्जैन में लगातार दबिश दे रही थीं, लेकिन आरोपी लगातार अपनी जगह बदल रहा था और पुलिस के हाथ नहीं आ रहा था।
मुखबिर की सटीक सूचना से बायपास रोड पर दबोचा गया आरोपी
आखिरकार, 30 जुलाई को पुलिस को एक सटीक मुखबिर सूचना मिली। मुखबिर ने आरोपी आशीष के इंदौर बायपास रोड पर होने की जानकारी दी। सूचना मिलते ही सेन्ट्रल कोतवाली पुलिस टीम ने तत्काल घेराबंदी की और आरोपी आशीष को अभिरक्षा में ले लिया। पुलिस हिरासत में कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपी आशीष ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने स्वीकार किया कि शराब पीने के दौरान हुए विवाद के चलते ही उसने महेश मालवीय की हत्या की थी। जुर्म कबूलने के बाद पुलिस ने उसे विधिवत गिरफ्तार कर लिया है।
डीसीपी जोन 3 अभिषेक रंजन ने बताया कि इस पूरे मामले को सुलझाने के लिए पुलिस टीम ने दिन-रात एक कर दिया था। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की सटीक जानकारी के तालमेल से ही इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश संभव हो पाया। यह इंदौर पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता है।
रिश्वतखोरी मामले में राजस्व निरीक्षक को 4 साल की सजा, लोकायुक्त ट्रैप केस में कोर्ट का बड़ा फैसला
दमोह की विशेष अदालत ने रिश्वत लेने के मामले में तत्कालीन राजस्व निरीक्षक मनीराम गोंड को चार साल की सश्रम कैद और 4 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। दरअसल आरोपी को वर्ष 2022 में लोकायुक्त सागर की टीम ने पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। यह मामला उस समय सामने आया था जब दमोह निवासी पंकज जैन ने अपनी जमीन के सीमांकन के लिए राजस्व विभाग में आवेदन दिया था।
वहीं आरोप है कि प्रक्रिया पूरी करने के बदले तत्कालीन राजस्व निरीक्षक मनीराम गोंड ने पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त सागर ने प्राथमिक जांच की और आरोप सही पाए जाने पर ट्रैप की योजना बनाई। तय योजना के अनुसार 21 मार्च 2022 को आरोपी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया गया।
लोकायुक्त ट्रैप केस में अदालत ने क्या कहा?
दरअसल करीब चार साल तक चले इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्य, ट्रैप कार्रवाई से जुड़े प्रमाण और गवाहों के बयान अदालत के सामने पेश किए। सभी तथ्यों पर सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, दमोह ने मनीराम गोंड को दोषी करार दिया। अदालत ने उन्हें चार वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 4 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष का कहना था कि आरोपी ने सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्वत की मांग की थी, जिसे ट्रैप कार्रवाई के दौरान प्रमाणित किया गया। जिला न्यायालय के अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि रिश्वतखोरी के मामलों में अदालतें उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई कर रही हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों की भूमिका भी बेहद अहम होती है, क्योंकि ट्रैप कार्रवाई के दौरान जुटाए गए सबूत अदालत में महत्वपूर्ण आधार बनते हैं।
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार पर बढ़ी सख्ती?
वहीं पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश में लोकायुक्त और आर्थिक अपराध जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज हुई है। राजस्व, नगरीय प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य और अन्य विभागों में रिश्वतखोरी की शिकायतों पर ट्रैप कार्रवाई के कई मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में समय पर जांच और अदालतों से दोषियों को सजा मिलने से सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ती है। इससे आम नागरिकों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत होता है।
दरअसल दमोह का यह फैसला भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक पद पर रहते हुए रिश्वत लेना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में कानून के तहत सख्त सजा दी जा सकती है।
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