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Manipur के Churachandpur में भारी बारिश से अचानक आई बाढ़, एक व्यक्ति लापता

मणिपुर के चूड़ाचांदपुर जिले के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ आने से एक व्यक्ति लापता हो गया। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘न्यू लामका वेंगनुआम साउथ’ का रहने वाला थांगजॉनसन नाम का एक व्यक्ति बृहस्पतिवार शाम लानवा नदी के पानी में बह गया।

उन्होंने बताया कि नदी के किनारे तटबंध बनाने का काम जारी था तभी तेज बहाव में बह गई निर्माण सामग्री को वापस पाने की कोशिश करते समय वह भी बह गए। लापता व्यक्ति का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, जबकि स्थानीय लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो में उन्हें बाढ़ के पानी में बहते हुए देखा जा सकता है। उपायुक्त कृष्णा कुमार ने अचानक आई बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए सबसे अधिक प्रभावित इलाकों जैसे सिएलमैट, लोअर चैपल लेन, हियांगटाम लामका, चिएंगकोनपांग और बेउलालेन का दौरा किया।

उपायुक्त ने प्रभावित परिवारों से बातचीत की, राहत सामग्री का वितरण किया और उन्हें जिला प्रशासन की ओर से हर संभव मदद प्रदान करने का भरोसा दिलाया।

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फिल्म फ्लॉप हुई तो रोती हुई घर गईं सोनाली सहगल:हिमांश कोहली ने कहा- ‘यारियां’ के बाद लगा, अब सब खत्म हो गया

फिल्म 'आर्य भट्ट का जीरो' खुद पर भरोसा और सपनों के लिए संघर्ष की कहानी है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सोनाली सहगल, हिमांश कोहली और डायरेक्टर कमल चंद्रा ने ऐसे अनुभव साझा किए, जब लोगों ने उन पर भरोसा नहीं किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सोनाली ने बताया कि एक फिल्म के फ्लॉप होने के बाद वह कार में रोते हुए घर गई थीं। हिमांश ने कहा कि 'यारियां' के बाद लगातार फिल्में नहीं चलीं तो लगा कि करियर खत्म हो गया। सवाल: फिल्म का संदेश है कि खुद पर भरोसा सबसे जरूरी है। आपकी जिंदगी में ऐसा कब हुआ? जवाब/सोनाली सहगल: मेरे अंदर हमेशा आत्मविश्वास था, लेकिन मुझसे ज्यादा भरोसा मेरी मम्मी को था। उन्होंने मेरे मिस इंडिया बनने से पहले ही कहा था कि उनकी बेटी मिस इंडिया बनेगी। लोग हंसते थे, लेकिन उनका विश्वास कभी नहीं डगमगाया। आज मुझे लगता है कि परिवार का एक इंसान भी आप पर पूरा भरोसा करे, तो आधी लड़ाई वहीं जीत जाती है। इसलिए सेल्फ बिलीफ के साथ परिवार का भरोसा भी जरूरी है। सवाल: हिमांश, आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ था? जवाब/हिमांश कोहली: बचपन से मुझे फिल्मों का शौक था। जब लोगों से कहता था कि मुझे एक्टर बनना है, तो ज्यादातर लोग सपना छोड़ने की सलाह देते थे। स्कूल में मैंने झूठ बोल दिया कि मैं धारा तेल के विज्ञापन वाला बच्चा हूं। पूरे स्कूल ने भरोसा कर लिया, लेकिन बाद में सच सामने आ गया। इसके बाद मुझे बुलिंग झेलनी पड़ी। सीनियर्स मजाक उड़ाते थे और सजा भी देते थे। तभी मैंने तय किया कि सच में एक्टर बनकर दिखाऊंगा। सवाल: उस घटना ने आपको कितना बदला? जवाब/हिमांश कोहली: उस वक्त बहुत बुरा लगा था, लेकिन आज लगता है कि अगर वह घटना नहीं होती तो शायद मैं इतनी मेहनत नहीं करता। मैंने थिएटर शुरू किया, एक्टिंग सीखी और कई संस्थानों में ट्रेनिंग ली। मेरे माता-पिता ने हर कदम पर साथ दिया। आज पुराने दोस्त कहते हैं, 'यार, तूने सच में अपना सपना पूरा कर लिया।' सवाल: परिवार का साथ कितना जरूरी रहा? जवाब/हिमांश कोहली: अगर मेरे माता-पिता साथ नहीं देते तो मैं एक्टिंग की पढ़ाई नहीं कर पाता। उन्होंने सिर्फ पढ़ाई नहीं, मेरे सपने पर भी भरोसा किया। वही भरोसा मुझे यहां तक लेकर आया। सवाल: कमल जी, आपकी कहानी भी कुछ ऐसी ही है? जवाब/कमल चंद्रा: बिल्कुल। मैं इंजीनियर था। अच्छी नौकरी थी, लेकिन एक्टिंग वर्कशॉप के बाद लगा कि मुझे फिल्मों में काम करना है। मैंने चार सरकारी नौकरियां छोड़ दीं। रिश्तेदारों ने मना किया, लेकिन पिता ने कहा, 'तूने मेरा सपना पूरा कर दिया, अब अपना सपना जी।' उसी बात ने मुझे कभी पीछे मुड़कर नहीं देखने दिया। सवाल: हिमांश क्या आप भी अपने माता-पिता का कोई अधूरा सपना भी जी रहे हैं? जवाब/हिमांश कोहली: बिल्कुल। मेरी मां कलाकार बनना चाहती थीं। उन्हें गायन, पेंटिंग और अभिनय का शौक था, लेकिन कम उम्र में शादी होने से उनका सपना अधूरा रह गया। आज फिल्मों में काम करते हुए लगता है कि मैं अपना ही नहीं, मां का सपना भी पूरा कर रहा हूं। उन्होंने एक बार ऋषि कपूर और जितेंद्र से मिलने की इच्छा जताई थी। जब मैं उन्हें दोनों कलाकारों से मिलवा पाया तो लगा कि मेरी मेहनत सफल हो गई। उनके चेहरे की खुशी मेरे लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं थी। सवाल: कमल जी, आपकी जिंदगी का सबसे भावुक पल कौन-सा रहा? जवाब/कमल चंद्रा: मेरी पहली फिल्म के दौरान महेश भट्ट ने मेरे पिता से फोन पर मेरी तारीफ की थी। फोन कटने के बाद पापा की खुशी देखने लायक थी। उन्होंने कहा, "मुझे पता था, मेरा बेटा कुछ अच्छा करेगा।" माता-पिता की आंखों में अपने लिए गर्व देखना सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। सवाल: 'आर्य भट्ट का जीरो' की कहानी में ऐसी क्या बात थी, जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब/हिमांश कोहली: मुझे 'बग्गू' का किरदार बहुत पसंद आया। वह सिखाता है कि जिंदगी मंजिल से भटका सकती है, लेकिन सपना और मेहनत नहीं छोड़ें तो एक दिन मंजिल जरूर मिलती है। हालात जैसे भी हों, उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे बड़ी सीख क्या मिली? जवाब/हिमांश कोहली: इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी टीम है। रवि किशन, राजेश शर्मा, गोपाल दत्त, नीरज सूद और बाकी कलाकारों के साथ बातचीत करना एक एक्टिंग स्कूल जैसा था। हर कलाकार अपने संघर्ष और अनुभव साझा करता था। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। सवाल: कमल जी, शूटिंग से जुड़ा कोई दिलचस्प किस्सा? जवाब/कमल चंद्रा: जिस घर में शूटिंग हुई, उसके मालिक बाद में उसे रेनोवेट करने वाले थे। लेकिन फिल्म पूरी होने के बाद उन्होंने फैसला बदल दिया। उन्हें लगा कि यह घर फिल्म की यादों से जुड़ गया है, इसलिए इसे जैसा है, वैसा ही रहने देना चाहिए। यह हमारे लिए बहुत खास पल था। सवाल: फिल्म का सबसे बड़ा संदेश क्या है? जवाब/कमल चंद्रा: हर इंसान जिंदगी में कभी न कभी खुद को 'जीरो' महसूस करता है। हमारी फिल्म कहती है कि खुद पर भरोसा और मेहनत बनी रहे, तो वही इंसान एक दिन हीरो बन सकता है। सवाल: सोनाली, आपने 'आर्य भट्ट का जीरो' के लिए हां क्यों कहा? जवाब/सोनाली सहगल: मेरे लिए किसी भी फिल्म में सबसे अहम उसकी कहानी होती है। कमल ने स्क्रिप्ट सुनाई तो उसमें बनावटीपन नहीं, बल्कि सच्चाई दिखी। हर किरदार असली लगा और यही बात सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: रिंकू का किरदार आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/सोनाली सहगल: इस फिल्म से पहले मैं अलग जॉनर की फिल्म कर रही थी। वहां मेरा किरदार और दुनिया अलग थे। 'रिंकू' छोटे शहर की साधारण लड़की है, इसलिए उसके हावभाव, बोलने के तरीके और सोच पर अलग तरह से काम करना पड़ा। एक कलाकार के तौर पर यही चुनौती सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: इस फिल्म में सबसे खास बात क्या लगी? जवाब/सोनाली सहगल: मुझे लगा कि इस फिल्म का हर किरदार कुछ न कुछ सिखाता है। कोई उम्मीद देता है, कोई रिश्तों की अहमियत समझाता है और कोई संघर्ष से लड़ना सिखाता है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। सवाल: दर्शक 'आर्य भट्ट का जीरो' देखकर क्या महसूस करेंगे? जवाब/हिमांश कोहली: अगर लगे कि जिंदगी योजना के मुताबिक नहीं चल रही, तब भी हार मत मानिए। सपनों पर भरोसा रखिए और मेहनत करते रहिए। देर हो सकती है, लेकिन मंजिल जरूर मिलेगी। कमल चंद्रा: यह फिल्म सिर्फ एक इंसान या एक कुत्ते की कहानी नहीं है। यह उन सभी लोगों की कहानी है, जिन्हें कभी न कभी 'जीरो' कहा गया। अगर आप खुद पर भरोसा रखते हैं, तो एक दिन वही लोग आपकी सफलता की मिसाल देंगे। सोनाली सहगल: हम चाहते हैं कि लोग थिएटर से सिर्फ फिल्म देखकर नहीं, बल्कि अपने सपनों पर दोबारा भरोसा करके निकलें। अगर फिल्म देखने के बाद एक भी इंसान हार मानने की बजाय फिर कोशिश करने लगे, तो हमारी मेहनत सफल हो जाएगी। सवाल: क्या कभी ऐसा वक्त आया, जब आपका खुद पर भरोसा डगमगाया? उससे बाहर कैसे निकले? जवाब/सोनाली सहगल: इस इंडस्ट्री में रास्ता आसान नहीं है। मेहनत से कभी डर नहीं लगा, लेकिन शुरुआत में मौके मिलना सबसे मुश्किल होता है। सबसे बड़ा झटका 'जय मम्मी दी' का बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलना था। शायद पहली बार कैमरे पर यह बात कह रही हूं। मैंने उस फिल्म के लिए अपना सब कुछ लगा दिया था। वह मेरी पहली सोलो लीड फिल्म थी और उससे बहुत उम्मीदें थीं। लेकिन कोविड की शुरुआत की वजह से फिल्म थिएटर में वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई। मुझे आज भी याद है, पहले दिन के बॉक्स ऑफिस नंबर देखकर मैं इवेंट से लौटते समय कार में रो रही थी। मेरी नई मैनेजर समझ नहीं पा रही थी कि मुझे कैसे संभाले। मैं कुछ दिनों के लिए डिप्रेशन में चली गई थी। लेकिन मैं जल्दी संभल जाती हूं। मैंने खुद से कहा कि मुझे अपने काम पर गर्व है। बाद में फिल्म नेटफ्लिक्स पर लोगों ने खूब पसंद की। तब समझ आया कि हर फिल्म अपनी किस्मत लेकर आती है। हौसला टूटता जरूर है, लेकिन उसे दोबारा खड़ा भी आपको ही करना पड़ता है। जीरो लगने के बाद खुद को फिर हीरो भी आपको ही बनाना पड़ता है। सवाल: हिमांश, आपने भी उतार-चढ़ाव देखे हैं। उस दौर को कैसे संभाला? जवाब/हिमांश कोहली: मेरे साथ शुरुआत उलटी हुई। 'यारियां' सुपरहिट रही, लेकिन उसके बाद दो-तीन फिल्मों को वैसा रिस्पॉन्स नहीं मिला। उस वक्त समझ नहीं आता था कि आगे क्या करना है। कई लोग कहने लगे थे, 'अब सब खत्म हो गया... अब यहां कुछ नहीं रखा।' सच कहूं तो मुझे भी लगने लगा था कि शायद बैग पैक करके घर लौट जाना चाहिए। लेकिन आज समझ आता है कि वह सिर्फ एक दौर था। उस समय जो फिल्में नहीं चलीं, वही आज टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। मैं उनके रिजल्ट देखकर हैरान हो जाता हूं। इसलिए अब लगता है कि हर चीज का अपना समय होता है। अगर मेहनत और भरोसा बना रहे तो मुश्किल दौर भी हमेशा नहीं रहता।

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CWG 2026: भारत के खाते में 6 और मेडल, नीरज चोपड़ा ने किया निराश, अस्मिता डे ने रचा इतिहास; 10 बॉक्सर फाइनल में

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 9वें दिन भारत की झोली में 2 गोल्ड, 2 सिल्वर और इतने ही ब्रॉन्ज समेत कुल 6 मेडल आए। अब भारत के कुल मेडल की संख्या 23 हो गई है। मेडल टैली में भारत 10वें पायदान पर है। Sat, 01 Aug 2026 06:32:50 +0530

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