Bihar में Teacher Transfer नीति के तहत 14,796 शिक्षकों ने किया आवेदन: शिक्षा मंत्री
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश कुमार तिवारी ने शुक्रवार को कहा कि समायोजन एवं युक्तिकरण नीति के तहत अधिशेष शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए बुधवार को पोर्टल खुलने के बाद से अब तक दो दिन में 14,796 शिक्षकों ने ऑनलाइन आवेदन किया है। नव अधिसूचित ‘बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली, 2026’ के तहत प्रारंभिक पंजीकरण और विद्यालयों की प्राथमिकता दर्ज करने के लिए ‘ई-शिक्षाकोष’ पोर्टल बुधवार को खोला गया था। तिवारी ने पटना में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘सिर्फ दो दिन में 14,796 अधिशेष शिक्षकों ने स्वेच्छा से स्थानांतरण के लिए आवेदन किया है।
इसके अलावा 7,795 अधिशेष शिक्षकों ने पोर्टल पर आवेदन पत्र भरकर सुरक्षित किया है, लेकिन अभी उसे अंतिम रूप से जमा नहीं किया है। इस प्रकार कुल 22,591 शिक्षकों ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं, 2,142 शिक्षकों ने पारस्परिक (आपसी सहमति से) स्थानांतरण के लिए सफलतापूर्वक आवेदन किया है।’’ उन्होंने कहा कि समायोजन एवं युक्तिकरण के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि पांच अगस्त है और यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वैच्छिक है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रत्येक आवेदक को 30 विद्यालयों का विकल्प चुनने की सुविधा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि महिला शिक्षकों की तैनाती उनके पंजीकृत गृह पते के पास पंचायतों में की जाएगी, जबकि पुरुष शिक्षकों की तैनाती उनके प्रखंड से बाहर, लेकिन उससे सटे प्रखंडों में की जाएगी। तिवारी ने कहा कि राज्य में कक्षा एक से पांच तक के 65,413, कक्षा छह से आठ तक के 9,471, कक्षा नौ से 10 तक के 17,904 तथा कक्षा 11 से 12 तक के 14,500 शिक्षक स्वीकृत पदों की तुलना में अधिशेष हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इसके बावजूद अररिया, जमुई और पूर्णिया जैसे कम से कम तीन जिलों में प्राथमिक विद्यालयों में भी शिक्षकों की कमी है। अधिशेष शिक्षकों की तैनाती उन विद्यालयों में की जाएगी, जहां शिक्षकों की कमी है। शेष शिक्षकों को आंगनवाड़ी केंद्रों, अनुसूचित जाति छात्रावासों तथा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के विद्यार्थियों के लिए संचालित कर्पूरी ठाकुर छात्रावासों में पदस्थापित किया जाएगा।’’ शिक्षा मंत्री ने कहा कि नयी स्थानांतरण नीति के तहत शिक्षकों का स्थानांतरण प्रत्येक पांच वर्ष पर किया जाएगा।
Allahabad High Court: कोडीन सिरप मामले की सुनवाई से अलग हुए न्यायमूर्ति कृष्ण पहल
कोडीन युक्त सिरप मामले में याचिकाकर्ता के न्यायाधीश से संपर्क करने के प्रयास के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने खुद को इस मामले में सुनवाई से अलग कर लिया है। अदालत कई जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिसमें भोला प्रसाद द्वारा दायर याचिका भी थी। न्यायाधीश ने कहा, “न्यायिक कार्यवाही की गरिमा के लिए केवल यह जरूरी नहीं कि न्याय हो, बल्कि यह भी जरूरी है कि न्याय होता हुआ स्पष्ट रूप से और बिना किसी शक के दिखाई दे।” अदालत ने कहा, “किसी लंबित मामले के संबंध में न्यायाधीश के साथ बातचीत का कोई अतिरिक्त न्यायिक माध्यम बनाने की वादी या वकील की कोई कोशिश, कानूनी पेशे के नैतिक नियमों और स्वतंत्र न्यायपालिका के संवैधानिक मूल्यों के पूरी तरह खिलाफ है।” अदालत ने बृहस्पतिवार को अपने आदेश में कहा, “यह अदालत गहरे दुख और संस्थागत जिम्मेदारी की भावना के साथ यह दर्ज करती है कि यह घटना इस अदालत के इतिहास में एक काला दिन है।
न्यायिक संस्था का पूरा ढांचा जनता के इस अटूट विश्वास पर टिका है कि न्याय निष्पक्ष, निडर और बिना किसी बाहरी प्रभाव के किया जाता है।” न्यायाधीश ने कहा, “न्यायिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में दखल देने या उसे प्रभावित करने की कोशिश चाहे वह कितनी भी छोटी या गुप्त क्यों ना हो, कानून के शासन पर सीधा हमला है।” सुनवाई के दौरान, अदालत ने बृहस्पतिवार को सभी मामलों में अंतिम सुनवाई करना तय किया था और निर्णय बाद में किसी तिथि पर सुनाया जा सकता था। हालांकि, याचिकाकर्ताओं द्वारा न्यायाधीश तक पहुंचने के प्रयास किए गए। अदालत ने कहा, “इस संस्थान की गरिमा बनाए रखने, न्यायिक प्रक्रिया की शुचिता की रक्षा करने और न्याय में निष्पक्षता के बारे में जरा सी भी आशंका को दूर करने के लिए यह पीठ खुद को इन मामलों में सुनवाई से अलग करना उचित समझती है।” न्यायाधीश ने कहा कि इन मामलों को इस अदालत से मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा जाता है ताकि इन्हें उचित पीठ को सौंपा जा सके।
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