POJK में प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता की जांच के लिए India ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की
भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस्लामाबाद के ‘‘बर्बर’’ बल प्रयोग की जांच करने और इन ‘‘अत्याचारों’’ के लिए उसे जवाबदेह ठहराने की अंतरराष्ट्रीय समुदाय से शुक्रवार को अपील की। खबरों के मुताबिक, पीओजेके में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान 27 जुलाई से सुरक्षा बलों की कार्रवाई में करीब 40 लोग मारे गए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान पीओजेके में शांतिप्रिय नागरिकों के खिलाफ ‘‘बर्बरता से बल प्रयोग’’ कर रहा है।
पीओजेके में पिछले महीने से ही जीवन-यापन के बढ़ते खर्च, प्रशासन की कथित लापरवाही और अल्पसंख्यकों के साथ राजनीतिक भेदभाव तथा उन पर अत्याचार को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (जेएएसी) इन विरोध-प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही है। जायसवाल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘इस कार्रवाई के कारण 40 से अधिक आम नागरिकों की मौत हुई और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पीओजेके के निर्दोष लोगों के प्रति बेरूखी उस वक्त स्पष्ट हो गई, जब रक्षा मंत्री ने विरोध कर रहे आम लोगों को दुश्मन करार दिया।’’ जायसवाल ने कहा, ‘‘इसके अलावा, राजनीतिक मामलों के लिए प्रधानमंत्री के विशेष सहायक ने स्वीकार किया कि जिन मुजाहिदीन को पाकिस्तानी सेना ने प्रशिक्षण दिया, हथियार मुहैया कराए और भारत को नुकसान पहुंचाने के लिए भेजा, वे अब उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल देश के खिलाफ कर रहे हैं।’’ जायसवाल ने कहा कि ये ‘‘तथाकथित’’ चुनाव पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान की ‘‘शर्मनाक अस्वीकृति’’ हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हिंसक शासन का सामना कर रहे लोगों ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों से गैर-कानूनी हत्याओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है।’’ जायसवाल ने कहा, ‘‘हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान की गतिविधियों की जांच करने और उसे उसके अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील करते हैं।
Karnataka High Court ने योगेश गौडर हत्या मामले में कांग्रेस MLA Vinay Kulkarni को दी जमानत
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक भाजपा नेता की 2016 में हुई हत्या के मामले में कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी को एक विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई उम्र कैद की सजा शुक्रवार को स्थगित कर दी और उनकी अपील का निस्तारण लंबित रहने तक जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय की धारवाड़ खंडपीठ ने कुलकर्णी की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें सजा निलंबित करने और दोषसिद्धि पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। साथ ही, उच्च न्यायालय ने उन्हें पांच लाख रुपये का निजी मुचलका और उतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया।
यह मामला धारवाड़ के भाजपा नेता योगेश गौडर की 2016 में हुई हत्या से संबंधित है। न्यायमूर्ति मोहम्मद नवाज और न्यायमूर्ति जी बसवराजु की खंडपीठ ने कुलकर्णी के अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश से बाहर जाने पर भी रोक लगा दी और जरूरत पड़ने पर विधायक को उच्च न्यायालय तथा अधीनस्थ अदालत में पेश होने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि कुलकर्णी को दोषी करार देने संबंधी फैसले पर तब तक रोक लगी रहेगी, जब तक कि अपील का फैसला नहीं हो जाता।
विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा है। उच्च न्यायालय ने इसी मामले से जुड़ी अपीलों में कई अन्य दोषियों की सजा भी स्थगित कर दी। सांसदों और विधायकों पर मुकदमे की सुनवाई के लिए गठित एक विशेष अदालत ने 16 अप्रैल को कुलकर्णी और 15 अन्य लोगों को इस मामले में दोषी करार दिया था और इसके अगले दिन सजा सुनाई थी।
धारवाड़ जिला पंचायत के पूर्व सदस्य और भाजपा नेता योगेश गौडर की 2016 में धारवाड़ के एक जिम में हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद, शुरूआत में धारवाड़ उप-नगरीय पुलिस ने मामले की जांच की, और फिर 2019 में जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया गया। विशेष अदालत ने दिसंबर 2023 में कुलकर्णी और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं -- जिनमें आपराधिक साजिश और हत्या शामिल हैं -- और शस्त्र अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप तय किए।
अपील की सुनवाई के दौरान, कुलकर्णी ने दलील दी कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान जिन सरकारी गवाहों से पूछताछ की गई, उनमें से किसी ने भी अभियोजन के पक्ष में गवाही नहीं दी। उन्होंने यह भी दलील दी कि सीबीआई को जांच का जिम्मा सौंपे जाने और मुकदमा बेंगलुरु की विशेष अदालत में स्थानांतरित होने के बाद, चश्मदीद गवाहों समेत कई अहम गवाह अपने बयान से मुकर गए। सीबीआई ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि धारवाड़ अदालत में पिछली कार्यवाही के दौरान दर्ज किए गए सबूतों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि उस दौरान गवाहों को प्रभावित किया गया था।
हत्या के समय मंत्री रहे कुलकर्णी को सीबीआई ने 2020 में गिरफ्तार किया था। बाद में, उन्हें जमानत मिल गई थी, और इस साल की शुरुआत में विशेष अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया था।
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