LPG को छोड़ अब इस गैस की ओर दौड़ रहे लोग! जुलाई के आंकड़ों ने सबको चौंका दिया
भारत में जुलाई के दौरान फ्यूल की डिमांड का ट्रेंड बदलता नजर आया। पेट्रोल और डीजल की बिक्री में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि एलपीजी (LPG) की डिमांड में बड़ी गिरावट आई। उद्योगों और होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर के कई उपभोक्ता अब PNG की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
ITR फाइलिंग की 31 जुलाई डेडलाइन खत्म, फिर भी नहीं लगेगा जुर्माना; इन लोगों को मिला एक और मौका
ITR Filing Deadline FY 2025-26: देशभर में आयकर रिटर्न दाखिल करने की 31 जुलाई की पहली समय सीमा अब पूरी हो चुकी है. अंतिम दिन करदाताओं की तरफ से जबरदस्त तेजी देखने को मिली और बड़ी संख्या में लोगों ने अपना टैक्स रिटर्न जमा किया. आयकर विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस आकलन वर्ष के लिए 31 जुलाई की रात तक 5.9 करोड़ से अधिक रिटर्न सबमिट किए जा चुके हैं. केवल अंतिम दिन की बात करें तो 40 लाख से ज्यादा लोगों ने अपना रिटर्न पोर्टल पर अपलोड किया. इस शानदार रिस्पॉन्स को देखते हुए आयकर विभाग ने सोशल मीडिया पर देश के सभी जिम्मेदार नागरिकों का आभार जताया है.
अक्सर देखा जाता है कि आम लोगों के बीच यह गलतफहमी बनी रहती है कि 31 जुलाई ही हर टैक्सपेयर के लिए अंतिम तारीख होती है. अगर यह तारीख निकल गई, तो जुर्माना भरना ही पड़ेगा. लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है. आयकर कानून के तहत करदाताओं को उनकी आय के स्रोत और कामकाज की प्रकृति के हिसाब से अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है. इसी आधार पर आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथियां भी अलग-अलग तय की जाती हैं. इसलिए यदि आप किसी वजह से 31 जुलाई तक अपना फॉर्म जमा नहीं कर पाए हैं, तो सबसे पहले यह जांचें कि आप किस श्रेणी में आते हैं.
31 जुलाई की समय सीमा किसके लिए थी अनिवार्य
31 जुलाई की डेडलाइन मुख्य रूप से उन व्यक्तिगत करदाताओं के लिए होती है, जिनके खातों का ऑडिट कराना अनिवार्य नहीं होता. इस वर्ग में सबसे बड़ी संख्या वेतनभोगी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की होती है. इसके अलावा ऐसे व्यक्ति जिनकी कमाई का जरिया मकान का किराया, बैंक ब्याज या फिर कैपिटल गेन से होने वाला मुनाफा है, उन्हें भी 31 जुलाई तक अपना हिसाब-किताब देना होता है.
आमतौर पर इस श्रेणी के नागरिक ITR1 यानी सहज और ITR2 फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं. इन फॉर्म्स को भरना बेहद आसान होता है क्योंकि इसमें आय का विवरण सीधा और स्पष्ट होता है. नौकरीपेशा लोगों को कंपनी की तरफ से मिलने वाले फॉर्म 16 के आधार पर अपना रिटर्न भरना होता है. यही वजह है कि सरकार इस वर्ग को जुलाई के अंत तक का समय देती है ताकि वे अपना टैक्स अनुपालन समय पर पूरा कर सकें.
31 अगस्त तक किन लोगों के पास है मौका
यदि आपकी कमाई का मुख्य जरिया वेतन न होकर कोई व्यापार, फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी या व्यक्तिगत पेशा है, तो आपके लिए आयकर विभाग के नियम थोड़े अलग हैं. ऐसे करदाता जो अपना छोटा-मोटा कारोबार चलाते हैं या किसी पेशेवर सेवा से जुड़े हैं और जिनके खातों का कानूनी रूप से टैक्स ऑडिट होना जरूरी नहीं है, उनके लिए 31 अगस्त तक की राहत दी जाती है.
ऐसे करदाताओं को अपना रिटर्न दाखिल करने के लिए थोड़ा ज्यादा वक्त इसलिए दिया जाता है क्योंकि उन्हें अपने सालभर के खर्चों, कुल बिक्री और मुनाफे का सही से मिलान करना होता है. इस श्रेणी में आने वाले लोग आमतौर पर ITR3 या ITR4 फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं. अगर आप भी फ्रीलांसिंग या बिजनेस से जुड़े हैं और 31 जुलाई तक रिटर्न नहीं भर पाए हैं, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. आपके पास अभी भी 31 अगस्त तक का पूरा मौका मौजूद है.
31 अक्टूबर तक किसे मिला है अतिरिक्त समय
कुछ टैक्सपेयर्स ऐसे होते हैं जिनके लिए कागजी कार्रवाई और खातों की जांच काफी जटिल होती है. जिन कारोबारियों, बड़ी कंपनियों या प्रोफेशनल्स के खातों का कानून के मुताबिक टैक्स ऑडिट होना अनिवार्य है, उनके लिए आयकर विभाग ने 31 अक्टूबर की डेडलाइन तय की है. ऐसे कारोबारियों को अपने सीए से पूरे खातों की बारीकी से जांच करानी होती है और ऑडिट रिपोर्ट तैयार करानी पड़ती है.
ऑडिट की प्रक्रिया में काफी समय लगता है, इसीलिए सरकार इन करदाताओं को 31 जुलाई के बाद भी तीन महीने का अतिरिक्त समय देती है. लिहाजा, अगर आप किसी ऐसी फर्म या कंपनी से जुड़े हैं जिसके खातों का ऑडिट होना है, तो 31 जुलाई की तारीख बीतने से आप पर कोई असर नहीं पड़ेगा. आप 31 अक्टूबर तक अपनी ऑडिट रिपोर्ट के साथ आसानी से ITR फाइल कर सकते हैं.
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