राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव बहाल कराने की मांग को लेकर पानी की टंकी पर चढ़े एनएसयूआई के तीन कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार से आमरण अनशन शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांग पर पक्का आश्वासन नहीं देती, वे सिर्फ़ पानी पीकर रहेंगे। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) से जुड़े विजयपाल कुड़ी, वियोना जाट और कोशेन खान बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे गांधी नगर रेलवे स्टेशन इलाके में टोंक फाटक पुल के पास पानी की टंकी पर चढ़े थे और तब से वहीं हैं।
विजयपाल कुड़ी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उनके पास लगभग पांच लीटर पानी है। कुड़ी ने कहा, अब हमारे पास खाना नहीं है। हम अपने साथ कुछ खाना और एक रस्सी लाए थे ताकि जरूरत पड़ने पर नीचे से खाना ऊपर खींचा जा सके।
लेकिन अब हमने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा कर दी है और सिर्फ़ पानी पिएंगे। उन्होंने बताया कि कल रात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे बातचीत की और भरोसा दिलाया कि वे उप मुख्यमंत्री के साथ बैठक की व्यवस्था करेंगे। कुड़ी ने कहा, हमने उनसे कहा कि हमें ठोस पहल चाहिए।
जब तक सरकार छात्र संघ चुनाव बहाल करने का पक्का आश्वासन नहीं देती हम नीचे नहीं आएंगे। टंकी के ऊपर के हालात के बारे में बताते हुए कुड़ी ने कहा कि व्यावहारिक दिक्कतों की वजह से प्रदर्शनकारी अपना खाना और पानी बचाकर इस्तेमाल कर रहे थे। उन्होंने कहा, हम थोड़े पानी और खाने के साथ टंकी पर चढ़े थे।
निवृत्त होने की चुनौतियों को देखते हुए हमने कम खाया-पिया। गांधी नगर के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) नारायण बाजिया ने कल रात इन आंदोलनाकरियों से बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि छात्रों को नीचे उतरने के लिए मनाने की कोशिशें जारी हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम छात्रों के संपर्क में हैं और उन्हें नीचे आने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच, एनएसयूआई के प्रवक्ता रमेश भाटी ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों से कोई सार्थक बातचीत शुरू नहीं किए जाने के कारण शुक्रवार को भूख हड़ताल शुरू की गई। कांग्रेस संबद्ध इस संगठन के कार्यकर्ता राज्य में छात्र संघ चुनाव दुबारा शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
ये चुनाव कुछ साल से नहीं हुए हैं।
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भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने 'समुद्र मंथन' राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दे दी है। वहीं किसानों के हितों को लगातार प्राथमिकता देने का संदेश देते हुए मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का फैसला किया है। हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कृषि, ऊर्जा, खेल और हरित विकास पर केंद्रित फैसलों के साथ कुल 4 लाख 41 हजार 209 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गयी है। सरकार का मानना है कि ये निर्णय एक ओर किसानों की आय को स्थिर आधार देंगे तो दूसरी ओर भारत को ऊर्जा, खेल और हरित विकास के क्षेत्र में दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करेंगे।
केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी मीडिया को दी। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा फैसला प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को लेकर लिया गया है। मंत्रिमंडल ने इस योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी देते हुए इसके लिए 3 लाख 15 हजार 614 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। योजना के तहत पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को हर वर्ष 6 हजार रुपये की सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती रहेगी। मोदी सरकार का कहना है कि इससे किसानों को बुआई के समय नकदी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, महंगे साहूकारी कर्ज पर निर्भरता कम होगी और बीज, उर्वरक तथा अन्य कृषि निवेश खरीदने में आसानी होगी। मोदी सरकार के अनुसार अब तक इस योजना के माध्यम से 23 किस्तों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है।
इसके अलावा, स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के लिए 5,070 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। योजना का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित करना है। जलाशयों, नहरों और औद्योगिक जलाशयों पर स्थापित होने वाली ये परियोजनाएं बिना अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण के सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाएंगी। परियोजनाओं में ऊर्जा भंडारण प्रणाली भी शामिल होगी, जिससे राज्यों को बिजली की मांग के चरम समय में सहायता मिलेगी। मोदी सरकार का अनुमान है कि इससे हर वर्ष लगभग एक करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा तथा 16 से 17 हजार प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
इसके अलावा, खेल क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के उद्देश्य से मंत्रिमंडल ने खेलो इंडिया योजना और राष्ट्रीय खेल महासंघ सहायता योजना के लिए कुल 36 हजार 441 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इनमें खेलो इंडिया के लिए 29 हजार 54 करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए 7 हजार 387 करोड़ रुपये का प्रावधान है। मोदी सरकार के अनुसार इस निवेश से खेल अवसंरचना मजबूत होगी, प्रतिभाओं की पहचान और वैज्ञानिक प्रशिक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा भारत के ओलंपिक और पैरालंपिक लक्ष्यों को नई गति मिलेगी। साथ ही महिलाओं, पैरा खिलाड़ियों और पारंपरिक भारतीय खेलों को भी विशेष प्रोत्साहन मिलेगा।
साथ ही ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण निर्णय 'समुद्र मंथन' राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को माना जा रहा है। 84 हजार 84 करोड़ रुपये की इस योजना के तहत समुद्री क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज के लिए भूकंपीय सर्वेक्षण, गहरे समुद्र में ड्रिलिंग, साझा आधारभूत ढांचे के विकास और तेल एवं गैस क्षेत्र के विनिर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य घरेलू तेल और गैस भंडार बढ़ाना, उत्पादन में वृद्धि करना और आयात पर निर्भरता कम करना है। अश्विनी वैष्णव द्वारा दिये गये प्रस्तुतीकरण के अनुसार योजना से घरेलू हाइड्रोकार्बन भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि, विदेशी मुद्रा की बचत और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश तथा रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
देखा जाये तो सामरिक और रणनीतिक दृष्टि से भी 'समुद्र मंथन' योजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाना है, लेकिन इसके व्यापक निहितार्थ इससे कहीं आगे जाते हैं। भारत वर्तमान में अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में समुद्री क्षेत्रों में नए तेल और गैस भंडारों का विकास देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले व्यवधानों के प्रभाव को कम करने में मदद करेगा। इसके साथ ही अपतटीय क्षेत्रों में सर्वेक्षण, ड्रिलिंग और आधारभूत ढांचे का विस्तार हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता को भी सुदृढ़ करेगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि घरेलू विनिर्माण और अपतटीय ऊर्जा अवसंरचना के विकास से दीर्घकाल में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता, ऊर्जा आपूर्ति की विश्वसनीयता और आर्थिक सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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