Smartphone Under 10K: 10 हजार से कम में खरीदें ये धांसू फोन, मिलेगी 5000mAh बैटरी और कई खास फीचर्स
Smartphone Under 10K: बजट स्मार्टफोन की तलाश कर रहे यूजर्स के लिए itel ने भारतीय बाजार में अपना नया स्मार्टफोन itel Zeno 100 Pro लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इस फोन को कम कीमत में बेहतर फीचर्स देने के उद्देश्य से पेश किया है। स्मार्टफोन के साथ कंपनी ने 10,000mAh और 20,000mAh क्षमता वाले Zeno Powerbanks भी लॉन्च किए हैं, जो लंबी बैटरी लाइफ और फास्ट चार्जिंग पसंद करने वाले यूजर्स के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
itel Zeno 100 Pro में 90Hz डिस्प्ले, Android 15 Go Edition, Unisoc प्रोसेसर और 5000mAh बैटरी जैसे फीचर्स दिए गए हैं। यह फोन खासतौर पर उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो कम बजट में रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए एक भरोसेमंद स्मार्टफोन चाहते हैं।
itel Zeno 100 Pro की कीमत और उपलब्धता
itel Zeno 100 Pro को भारत में ₹8,599 की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया है। ग्राहक इसे ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म Amazon के जरिए खरीद सकते हैं। इसके अलावा कंपनी ने 10,000mAh Zeno Powerbank को ₹1,299 और 20,000mAh Zeno Powerbank को ₹2,069 की कीमत में पेश किया है।
लॉन्च ऑफर के तहत दोनों पावरबैंक पर ग्राहकों को 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त छूट भी दी जा रही है। वहीं, कंपनी का itel Zeno Lite (2GB RAM + 64GB स्टोरेज) मॉडल अब ₹7,999 में उपलब्ध है।
90Hz डिस्प्ले के साथ मिलेगा स्मूद एक्सपीरियंस
itel Zeno 100 Pro में 6.6 इंच का HD+ IPS LCD डिस्प्ले दिया गया है। यह स्क्रीन 90Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है, जिससे स्क्रॉलिंग और ऐप इस्तेमाल करने का अनुभव ज्यादा स्मूद हो जाता है। फोन में वॉटरड्रॉप नॉच डिजाइन दिया गया है, जो स्क्रीन को बेहतर लुक देता है।
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Unisoc T7100 प्रोसेसर और Android 15 Go Edition
परफॉर्मेंस के लिए इस बजट स्मार्टफोन में Unisoc T7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है। फोन में 3GB RAM के साथ 5GB वर्चुअल RAM का सपोर्ट मिलता है, जिससे यूजर्स को कुल 8GB तक RAM का अनुभव मिल सकता है। स्टोरेज की बात करें तो इसमें 64GB इंटरनल स्टोरेज दी गई है। यह डिवाइस Android 15 Go Edition पर चलता है, जिसे खासतौर पर एंट्री-लेवल स्मार्टफोन के लिए डिजाइन किया गया है ताकि कम हार्डवेयर में भी बेहतर परफॉर्मेंस मिल सके।
5000mAh बैटरी और कैमरा फीचर्स
बैटरी के मामले में itel Zeno 100 Pro में 5000mAh की बैटरी दी गई है, जो सामान्य इस्तेमाल में पूरे दिन का बैकअप देने का दावा करती है। फोन में 10W चार्जिंग सपोर्ट मिलता है। कैमरा सेटअप की बात करें तो इसमें पीछे की तरफ 8MP रियर कैमरा दिया गया है, जबकि वीडियो कॉलिंग और सेल्फी के लिए 5MP फ्रंट कैमरा मिलता है। यह कैमरा सेटअप रोजाना की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
सिक्योरिटी और खास फीचर्स
itel Zeno 100 Pro में सुरक्षा के लिए साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर और Face Unlock का सपोर्ट दिया गया है। इसके अलावा फोन में DTS स्पीकर, IR Blaster और UltraLink Connectivity जैसे फीचर्स भी मौजूद हैं। मजबूती के लिए इस फोन को MIL-STD-810H मिलिट्री-ग्रेड ड्यूरेबिलिटी सर्टिफिकेशन मिला है। यह फोन Comet Orange, Cloud White और Black कलर ऑप्शन में उपलब्ध है।
itel Zeno Powerbank भी हुए लॉन्च
स्मार्टफोन के साथ कंपनी ने दो नए पावरबैंक भी पेश किए हैं। 10,000mAh Zeno Powerbank में 22.5W फास्ट चार्जिंग, डिजिटल बैटरी डिस्प्ले और डुअल आउटपुट पोर्ट दिए गए हैं। इसमें USB Type-C टू Type-C केबल भी मिलती है।
वहीं, 20,000mAh Zeno Powerbank ज्यादा पावर बैकअप चाहने वाले यूजर्स के लिए है। यह 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करता है और इसकी मदद से लैपटॉप भी चार्ज किया जा सकता है। इसमें बिल्ट-इन Type-C केबल, डिजिटल डिस्प्ले और PD 3.0 व QC 3.0 जैसे चार्जिंग स्टैंडर्ड का सपोर्ट मिलता है।
Rajasthan News: भीलवाड़ा के MGH में फिर 2 प्रसूताओं की मौत, नॉर्मल डिलीवरी के बाद कैसे मातम में बदल गई खुशियां, सरकार कहां कर रही चूक?
Rajasthan News: राजस्थान में प्रसुताओं की मौत का मामला शांत होने की जगह लगातार तूल पकड़ रहा है. 30 जुलाई 2026, गुरुवार को भीलवाड़ा में 2 और प्रसुताओं की मौत हुई है. एक घर में दूसरे बच्चे के जन्म की खुशियां थीं तो वहीं, दूसरे परिवार में पहली बार किलकारी गूंजी थी. मगर कुछ ही घंटों में ये खुशियां मातम में बदल गई. MGH मातृ एवं शिशु इकाई में हुई दो प्रसूताओं की मौत के बाद एकबार फिर से सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच में और समय पर उपचार में लापरवाही आखिर कब तक माताओं की ऐसे जान लेगी.
कैसे हुई दोनों महिलाओं की मौत?
कोटड़ी इलाके के दांतड़ा गांव की 22 साल की सुगना, पत्नी मोहन बैरवा, अपने दूसरे बच्चे के जन्म की खुशियों का इंतजार कर रही थी. शाहपुरा सेटेलाइट अस्पताल में उसका सामान्य प्रसव हुआ और उसने एक स्वस्थ नवजात को जन्म दिया, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई और प्रसव के तुरंत बाद उसे अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया, जिससे उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी.
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हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट्स की मात्रा बहुत कम थी
गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे तत्काल भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल (एमजीएच) रेफर किया. अस्पताल पहुंचने तक उसकी पल्स और ब्लड प्रेशर नहीं मिल रहे थे. जांच में हीमोग्लोबिन महज 1.8 ग्राम प्रति डेसीलीटर और प्लेटलेट्स की संख्या केवल 4 हजार पाई गई. डॉक्टरों ने उसे ICU में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा, लगातार ब्लड और प्लेटलेट्स चढ़ाए तथा हरसंभव प्रयास किए. मगरबावजूद इसके अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसका शरीर उपचार का साथ नहीं दे पाया और उसकी मौत हो गई.
पहली बार मां बनी थी रानी
वहीं, कोटड़ी क्षेत्र के कोठाज निवासी एवं वर्तमान में पटेलनगर में रहने वाली 18 वर्षीय रानी पत्नी भूरा बंजारा जीवन में पहली बार मां बनने वाली थी. एमसीएच में उसकी सामान्य डिलीवरी हुई थी और पहली संतान के जन्म से परिवार में खुशी छा गई. लेकिन यह खुशी ज्यादा देर नहीं रही. प्रसव के करीब एक घंटे बाद अचानक रानी को अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया. डॉक्टरों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया, लेकिन गंभीर चिकित्सीय जटिलता के चलते उसे एम्बोलिज्म हो गया. डॉक्टरों के लगातार प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका.
राजस्थान सरकार फिर सवालों के घेरे में
राजस्थान सरकार इन दिनों लगातार लोगों और विपक्ष के सवालों के घेरे में हैं. पिछले कुछ समय से राजस्थान के MGF अस्पताल में सात प्रसुताओं की मौत हो चुकी है. प्रसुताओं की मौत की वजह किडनी फेलियर पाई गई थी. उन्हें गलत दवाएं दी गई थी जिससे सेहत खराब हुई थी. वहीं, इस हफ्ते राजस्थान के कुचमान जिले में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 7 मरीजों की आंखों में संक्रमण फैल गया. इस वजह से 5 लोगों को जयपुर अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां फिलहाल उनका इलाज चल रहा है.
कौन देगा जनता के सवालों का जवाब?
मगर भजनलाल सरकार पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं कि लगातार प्रसूताओं की मौत के बाद भी आखिर मातृ स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार क्यों नहीं हो रहा? क्या गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच सही तरीके से हो रही है या कागजों की कहानी कुछ और है. एक प्रसुता जिसका हीमोग्लोबिन सिर्फ 1.8 ग्राम था, तो क्या गर्भावस्था के दौरान उसके शरीर में समय रहते इसकी पहचान और इलाज नहीं हो सका था. डॉक्टरों ने दोनों को ही हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में नहीं गिना था और दोनों ही नॉर्मल डिलीवरी हुई थी तो फिर अचानक ऐसा क्यों हुआ? स्वास्थ्य विभाग इन मौतों की जवाबदेही किस पर तय करेगा और दोषी पाए जाने पर क्या कार्रवाई होगी?
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