Rajasthan News: भीलवाड़ा के MGH में फिर 2 प्रसूताओं की मौत, नॉर्मल डिलीवरी के बाद कैसे मातम में बदल गई खुशियां, सरकार कहां कर रही चूक?
Rajasthan News: राजस्थान में प्रसुताओं की मौत का मामला शांत होने की जगह लगातार तूल पकड़ रहा है. 30 जुलाई 2026, गुरुवार को भीलवाड़ा में 2 और प्रसुताओं की मौत हुई है. एक घर में दूसरे बच्चे के जन्म की खुशियां थीं तो वहीं, दूसरे परिवार में पहली बार किलकारी गूंजी थी. मगर कुछ ही घंटों में ये खुशियां मातम में बदल गई. MGH मातृ एवं शिशु इकाई में हुई दो प्रसूताओं की मौत के बाद एकबार फिर से सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच में और समय पर उपचार में लापरवाही आखिर कब तक माताओं की ऐसे जान लेगी.
कैसे हुई दोनों महिलाओं की मौत?
कोटड़ी इलाके के दांतड़ा गांव की 22 साल की सुगना, पत्नी मोहन बैरवा, अपने दूसरे बच्चे के जन्म की खुशियों का इंतजार कर रही थी. शाहपुरा सेटेलाइट अस्पताल में उसका सामान्य प्रसव हुआ और उसने एक स्वस्थ नवजात को जन्म दिया, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई और प्रसव के तुरंत बाद उसे अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया, जिससे उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी.
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हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट्स की मात्रा बहुत कम थी
गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे तत्काल भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल (एमजीएच) रेफर किया. अस्पताल पहुंचने तक उसकी पल्स और ब्लड प्रेशर नहीं मिल रहे थे. जांच में हीमोग्लोबिन महज 1.8 ग्राम प्रति डेसीलीटर और प्लेटलेट्स की संख्या केवल 4 हजार पाई गई. डॉक्टरों ने उसे ICU में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा, लगातार ब्लड और प्लेटलेट्स चढ़ाए तथा हरसंभव प्रयास किए. मगरबावजूद इसके अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसका शरीर उपचार का साथ नहीं दे पाया और उसकी मौत हो गई.
पहली बार मां बनी थी रानी
वहीं, कोटड़ी क्षेत्र के कोठाज निवासी एवं वर्तमान में पटेलनगर में रहने वाली 18 वर्षीय रानी पत्नी भूरा बंजारा जीवन में पहली बार मां बनने वाली थी. एमसीएच में उसकी सामान्य डिलीवरी हुई थी और पहली संतान के जन्म से परिवार में खुशी छा गई. लेकिन यह खुशी ज्यादा देर नहीं रही. प्रसव के करीब एक घंटे बाद अचानक रानी को अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया. डॉक्टरों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया, लेकिन गंभीर चिकित्सीय जटिलता के चलते उसे एम्बोलिज्म हो गया. डॉक्टरों के लगातार प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका.
राजस्थान सरकार फिर सवालों के घेरे में
राजस्थान सरकार इन दिनों लगातार लोगों और विपक्ष के सवालों के घेरे में हैं. पिछले कुछ समय से राजस्थान के MGF अस्पताल में सात प्रसुताओं की मौत हो चुकी है. प्रसुताओं की मौत की वजह किडनी फेलियर पाई गई थी. उन्हें गलत दवाएं दी गई थी जिससे सेहत खराब हुई थी. वहीं, इस हफ्ते राजस्थान के कुचमान जिले में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 7 मरीजों की आंखों में संक्रमण फैल गया. इस वजह से 5 लोगों को जयपुर अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां फिलहाल उनका इलाज चल रहा है.
कौन देगा जनता के सवालों का जवाब?
मगर भजनलाल सरकार पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं कि लगातार प्रसूताओं की मौत के बाद भी आखिर मातृ स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार क्यों नहीं हो रहा? क्या गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच सही तरीके से हो रही है या कागजों की कहानी कुछ और है. एक प्रसुता जिसका हीमोग्लोबिन सिर्फ 1.8 ग्राम था, तो क्या गर्भावस्था के दौरान उसके शरीर में समय रहते इसकी पहचान और इलाज नहीं हो सका था. डॉक्टरों ने दोनों को ही हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में नहीं गिना था और दोनों ही नॉर्मल डिलीवरी हुई थी तो फिर अचानक ऐसा क्यों हुआ? स्वास्थ्य विभाग इन मौतों की जवाबदेही किस पर तय करेगा और दोषी पाए जाने पर क्या कार्रवाई होगी?
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