ईरान पर अमेरिका का हमला जारी: लगातार 10वें दिन बरसे गोले, ट्रंप बोले- 'एक-एक खून का हिसाब चुकाएगा तेहरान'
US strikes on Iran: अमेरिका की सेना ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को और तेज कर दिया है। मध्य पूर्व (West Asia) में चल रहे व्यापक संघर्ष के बीच अमेरिकी सेना ने ईरान पर लगातार 10वें दिन भी एयरस्ट्राइक की। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य तेहरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, ताकि क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बहाल की जा सके।
CENTCOM ने दी हमलों की जानकारी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि ये ताजा हमले राष्ट्रपति (कमांडर इन चीफ) के निर्देश पर किए गए हैं। इन हमलों का मकसद उन ईरानी सैन्य क्षमताओं को और अधिक नष्ट करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों पर हमला करने के लिए किया जा रहा था।
Today at 4 p.m. ET, U.S. forces began a new round of strikes against Iran at the Commander in Chief's direction. The strikes are designed to further degrade Iranian military capabilities used to attack commercial shipping in the Strait of Hormuz.
— U.S. Central Command (@CENTCOM) July 20, 2026
शिराज और अन्य शहरों में धमाकों की गूंज
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB ने जानकारी दी कि स्थानीय समयानुसार रात करीब 1 बजे दक्षिण-पश्चिमी शहर शिराज में जोरदार धमाकों की आवाज सुनी गई। IRIB के अनुसार, शहर में दो जगहों (एक पूर्व और एक पश्चिम में) को निशाना बनाया गया।
दूसरी ओर, इस्फहान प्रांत के डिप्टी गवर्नर ने IRIB को बताया कि इस्फहान शहर या प्रांत में किसी भी तरह की 'दुश्मन की आक्रामकता या विस्फोट' की घटना नहीं हुई है। यह बयान अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी की शुरुआती रिपोर्ट के विपरीत था। इसके अलावा, बुशहर के गवर्नर ने भी साफ किया कि वहाँ सुनाई देने वाली धमाकों की आवाजें वायु रक्षा प्रणालियों (defense systems) की सक्रियता से जुड़ी हुई थीं।
कुवैत में अमेरिकी बेस पर ईरानी जवाबी हमला
जवाबी कार्रवाई के तहत, ईरान ने कुवैत के कैंप आरिफजान (Camp Arifjan) में तैनात अमेरिकी HIMARS मिसाइल सिस्टम को निशाना बनाया। तेहरान का कहना है कि यह पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों पर चल रहे हमलों के अभियान का ही एक हिस्सा है। इसके अलावा, ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों जैसे कुवैत, जॉर्डन और बहरीन (जहाँ अमेरिकी नौसेना का 5वां बेड़ा स्थित है) पर भी हमले किए हैं।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी- 'कई गुना चुकाना होगा मूल्य'
जॉर्डन में एक अमेरिकी बेस पर हुए ईरानी हमलों में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। इस घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक तीखी और कड़ी चेतावनी जारी की।
ट्रंप ने लिखा कि जब भी ईरान किसी अमेरिकी सैनिक की हत्या करेगा, उसे इसके लिए कई गुना कीमत चुकानी होगी। उन्होंने यह निर्देश युद्ध सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth), ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डेनियल केन (Daniel Caine) और सेना के हर नेता को दे दिया है।
शहीद सैनिकों के नाम और पेंटागन के आंकड़े
पेंटागन ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस पर जान गंवाने वाले दोनों सैनिकों की पहचान उजागर की है। इनमें 25 वर्षीय 1st लेफ्टिनेंट टायलर जेम्स फीहान (हवाई के इवा बीच से) और 19 साल की प्राइवेट इसाबेला गोंजालेज (टेक्सास के कैरोलटन से) शामिल हैं। पेंटागन के अनुसार, मौजूदा ईरान युद्ध के दौरान अब तक कुल 17 अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: कार और बाइक के इंश्योरेंस से जुड़े नियम बदले, जानें आप पर क्या असर होगा?
सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने और बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया है कि अब नई कार खरीदने पर 4 और नए दोपहिया वाहन पर 6 साल का थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस (Third-Party Insurance) लेना अनिवार्य होगा।
अदालत ने बीमा नियामक आईआरडीए को इस संबंध में तुरंत आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के लिए कहा है।
पहले क्या था और अब क्या बदला?
अभी तक नई कारों के लिए 3 साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए 5 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य था। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2018 में लागू की थी। अब अदालत ने इसे बढ़ाकर क्रमशः 4 साल और 6 साल कर दिया। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि लंबे समय तक बीमा अनिवार्य रहने से नियमों का पालन बेहतर होगा और सड़क सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
56% वाहन बिना बीमा के दौड़ रहे
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के बावजूद देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं।
अदालत ने संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में कुल 30.48 करोड़ वाहनों में से करीब 16.54 करोड़ वाहन बिना वैध बीमा के हैं। यानी लगभग 56% वाहन सड़कों पर बिना इंश्योरेंस के चल रहे हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा पाने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
सड़क सुरक्षा पर भी जताई चिंता
कोर्ट ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2024 में भारत में 4.87 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। ऐसे में थर्ड पार्टी बीमा का प्रभावी पालन बेहद जरूरी है ताकि दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिल सके।
तकनीक से होगी निगरानी
सुप्रीम कोर्ट ने बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। अदालत ने निर्देश दिए कि:
- ANPR (Automatic Number Plate Recognition) कैमरों को इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो और वाहन पोर्टल से जोड़ा जाए।
- इससे बिना बीमा वाले वाहनों की स्वतः पहचान कर ई-चालान जारी किए जा सकेंगे।
- पुलिसकर्मियों को ऐसे हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल ऐप दिए जाएं, जिनसे वे मौके पर ही वाहन का बीमा स्टेटस जांच सकें।
- अदालत ने यह सुझाव भी दिया कि भविष्य में पेट्रोल पंपों को बीमा डेटाबेस से जोड़ने की संभावना पर विचार किया जाए, ताकि बिना वैध बीमा वाले वाहनों को ईंधन देने पर रोक लगाने जैसे विकल्पों का अध्ययन किया जा सके।
सड़क सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा
यह आदेश नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की ओर से दायर एक मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत ने अपील खारिज करते हुए मोटर इंश्योरेंस कवरेज से जुड़े व्यापक मुद्दों पर भी निर्देश जारी किए। माना जा रहा है कि नए नियमों से बीमा अनुपालन बढ़ेगा, सड़क दुर्घटना पीड़ितों को राहत मिलेगी और बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी।
(प्रियंका कुमारी)
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