सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: कार और बाइक के इंश्योरेंस से जुड़े नियम बदले, जानें आप पर क्या असर होगा?
सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने और बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया है कि अब नई कार खरीदने पर 4 और नए दोपहिया वाहन पर 6 साल का थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस (Third-Party Insurance) लेना अनिवार्य होगा।
अदालत ने बीमा नियामक आईआरडीए को इस संबंध में तुरंत आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के लिए कहा है।
पहले क्या था और अब क्या बदला?
अभी तक नई कारों के लिए 3 साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए 5 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य था। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2018 में लागू की थी। अब अदालत ने इसे बढ़ाकर क्रमशः 4 साल और 6 साल कर दिया। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि लंबे समय तक बीमा अनिवार्य रहने से नियमों का पालन बेहतर होगा और सड़क सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
56% वाहन बिना बीमा के दौड़ रहे
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के बावजूद देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं।
अदालत ने संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में कुल 30.48 करोड़ वाहनों में से करीब 16.54 करोड़ वाहन बिना वैध बीमा के हैं। यानी लगभग 56% वाहन सड़कों पर बिना इंश्योरेंस के चल रहे हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा पाने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
सड़क सुरक्षा पर भी जताई चिंता
कोर्ट ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2024 में भारत में 4.87 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। ऐसे में थर्ड पार्टी बीमा का प्रभावी पालन बेहद जरूरी है ताकि दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिल सके।
तकनीक से होगी निगरानी
सुप्रीम कोर्ट ने बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। अदालत ने निर्देश दिए कि:
- ANPR (Automatic Number Plate Recognition) कैमरों को इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो और वाहन पोर्टल से जोड़ा जाए।
- इससे बिना बीमा वाले वाहनों की स्वतः पहचान कर ई-चालान जारी किए जा सकेंगे।
- पुलिसकर्मियों को ऐसे हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल ऐप दिए जाएं, जिनसे वे मौके पर ही वाहन का बीमा स्टेटस जांच सकें।
- अदालत ने यह सुझाव भी दिया कि भविष्य में पेट्रोल पंपों को बीमा डेटाबेस से जोड़ने की संभावना पर विचार किया जाए, ताकि बिना वैध बीमा वाले वाहनों को ईंधन देने पर रोक लगाने जैसे विकल्पों का अध्ययन किया जा सके।
सड़क सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा
यह आदेश नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की ओर से दायर एक मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत ने अपील खारिज करते हुए मोटर इंश्योरेंस कवरेज से जुड़े व्यापक मुद्दों पर भी निर्देश जारी किए। माना जा रहा है कि नए नियमों से बीमा अनुपालन बढ़ेगा, सड़क दुर्घटना पीड़ितों को राहत मिलेगी और बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी।
(प्रियंका कुमारी)
Insurance Tips: कहीं आप जरूरत से ज्यादा इंश्योरेंस प्रीमियम तो नहीं भर रहे? ऐसे करें सही पहचान
Insurance Tips: बीमा लेना आर्थिक सुरक्षा के लिए जरूरी माना जाता है, लेकिन कई बार लोग जरूरत से ज्यादा बीमा खरीद लेते। समय के साथ लाइफ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस, पर्सनल एक्सीडेंट कवर और बैंक या एजेंट के जरिए खरीदी गई अलग-अलग पॉलिसियां जुड़ती जाती हैं। हर महीने या साल प्रीमियम कटता रहता है, लेकिन बहुत कम लोग यह जांचते हैं कि क्या उन्हें वास्तव में इन सभी पॉलिसियों की जरूरत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा बीमा लेने का मतलब सिर्फ अधिक सुरक्षा नहीं, बल्कि कई बार एक ही जोखिम के लिए बार-बार प्रीमियम चुकाना भी होता है।
सबसे पहले सभी पॉलिसियों की सूची बनाएं
अगर आप जानना चाहते हैं कि कहीं आप ओवरइंश्योर्ड तो नहीं हैं, तो सबसे पहले अपनी सभी बीमा पॉलिसियों की सूची तैयार करें। इसमें नियोक्ता , बैंक, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और एजेंट के जरिए खरीदी गई सभी पॉलिसियां शामिल करें। साथ ही हर पॉलिसी का सम इंश्योर्ड, प्रीमियम, अवधि, एक्सक्लूजन और वह किस जोखिम को कवर करती है, इसकी जानकारी भी नोट करें। कई बार दो या तीन पॉलिसियां लगभग एक जैसा कवर देती हैं।
हेल्थ इंश्योरेंस में अक्सर होता है ओवरलैप
हेल्थ इंश्योरेंस ऐसा क्षेत्र है जहां सबसे ज्यादा ओवरलैप देखने को मिलता। एक से अधिक हेल्थ पॉलिसी रखना गलत नहीं, लेकिन यह समझना जरूरी है कि क्लेम कैसे काम करेगा। इंडेम्निटी आधारित हेल्थ इंश्योरेंस में अस्पताल का वास्तविक खर्च ही मिलता है। यानी कई पॉलिसियां होने का मतलब यह नहीं कि आपको इलाज की लागत से ज्यादा पैसा मिल जाएगा।
लाइफ इंश्योरेंस में कवर की जरूरत समझें
लाइफ इंश्योरेंस के मामले में केवल पॉलिसियों की संख्या नहीं, बल्कि कुल कवर अहम होता है। कई लोगों के पास छोटी-छोटी पारंपरिक पॉलिसियां होती हैं, लेकिन परिवार की जरूरत के हिसाब से उनका कुल कवर पर्याप्त नहीं होता। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो होम लोन चुकाने और बच्चों के आत्मनिर्भर हो जाने के बाद भी पहले जैसा प्रीमियम भरते रहते हैं, जबकि अब उन्हें उतने कवर की जरूरत नहीं होती।
राइडर और ऐड-ऑन सोच-समझकर लें
क्रिटिकल इलनेस, एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट या हॉस्पिटल कैश जैसे राइडर कई परिस्थितियों में उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन हर उपलब्ध ऐड-ऑन खरीदने से प्रीमियम बढ़ जाता है, जबकि जरूरी नहीं कि आपकी वित्तीय सुरक्षा भी उसी अनुपात में बढ़े। इसलिए केवल वही राइडर लें, जिनकी वास्तव में जरूरत हो।
बीमा की समीक्षा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
- सभी बीमा पॉलिसियों की सूची बनाकर तुलना करें।
- एक ही जोखिम के लिए कई पॉलिसियां तो नहीं हैं, यह जांचें।
- शादी, बच्चे या होम लोन जैसी जिम्मेदारियों के बाद कवर की समीक्षा करें।
- पुरानी पॉलिसी बंद करने से पहले नई पॉलिसी की शर्तें और वेटिंग पीरियड जरूर देखें।
विशेषज्ञों का मानना है कि बीमा का मकसद सबसे कम प्रीमियम देना नहीं, बल्कि सही जोखिम के लिए पर्याप्त सुरक्षा लेना है। कम लेकिन सही उद्देश्य वाली पॉलिसियां अक्सर ज्यादा प्रभावी होती हैं। इसलिए समय-समय पर अपने इंश्योरेंस पोर्टफोलियो की समीक्षा करना आर्थिक रूप से समझदारी भरा कदम माना जाता है।
(प्रियंका कुमारी)
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