मानव सुथार के साथ नाइंसाफी! 10 विकेट लिए, फिर भी क्यों नहीं मिला POTM अवॉर्ड? जानिए किसने मारी बाजी
Manav Suthar : श्रीलंका के साथ खेले गए गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में भारतीय क्रिकेट टीम के युवा स्पिनर मानव सुथार ने शानदार प्रदर्शन किया और 10 विकेट झटक लिए. जी हां, सुथार ने पहली पारी में 4 विकेट लिए थे और दूसरी पारी में उन्होंने 6 विकेट लेकर भारत को 165 रनों से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. जब भारतीय खेमे को विकेट का बेसब्री से इंतजार था, तब मानव सुथार ने ही आखिरी 10 गेंदों में 4 विकेट लेकर टीम इंडिया को जीत दिलाई. मगर, इसके बावजूद प्लेयर ऑफ द मैच मानव सुथार को नहीं चुना गया. तो आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि आखिर मानव सुथार को POTM क्यों नहीं चुना गया और किसने इस अवॉर्ड को अपने नाम किया है.
मानव सुथार को क्यों नहीं मिला POTM अवॉर्ड?
भारतीय क्रिकेट टीम के लिए गॉल टेस्ट मैच में 10 विकेट चटकाने वाले मानव सुथार के नाम की हर तरफ चर्चा हो रही है. मानव ने श्रीलंका के खिलाफ कमाल की गेंदबाजी की. पहली पारी में उन्होंने 21.4 ओवर फेंके, जिसमें 76 रन देकर 4 विकेट झटके. फिर, दूसरी पारी में तो उन्होंने 6 विकेट चटकाए. उसमें खास बात ये रही कि उन्होंने आखिरी 10 गेंदों में 4 विकेट चटकाए और भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई.
An absolute display of skill and precision as Manav Suthar picks up 10 wickets in the 1st Test.
— BCCI (@BCCI) August 19, 2026
A glimpse of how he fared in his last ten deliveries in the second innings ????????#SLvIND #TeamIndia pic.twitter.com/B3QVZdhPuG
मगर, इस शानदार गेंदबाजी के बावजूद मानव सुथार को प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड नहीं मिला. ये अवॉर्ड मैच में बेस्ट परफॉर्मेंस करने वाले खिलाड़ी को मिलता है और इस मैच में भले ही गेंद के साथ मानव ने अच्छा किया हो, मगर इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि देवदत्त पडिक्कल ने दोनों पारियों में मिलाकर 211 रन बनाए, जिसने भारत को श्रीलंका के सामने 372 रनों के लक्ष्य खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई थी.
देवदत्त पडिक्कल ने जीता प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड
For his maiden Test ton that laid the foundation and an equally important knock in the second innings, @devdpd07 receives the Player of the Match award ????????#SLvIND #TeamIndia pic.twitter.com/EY7bbMT92f
— BCCI (@BCCI) August 19, 2026
श्रीलंका के साथ खेले गए गॉल टेस्ट मैच में टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने शानदार बल्लेबाजी की, जिसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच के अवॉर्ड से सम्मानित किया. नंबर-3 पर बल्लेबाजी के लिए आए पडिक्कल ने 230 गेंदों में 167 रनों की पारी खेली थी, जिसमें 15 चौके और 1 छक्का लगाया था. वहीं, दूसरी पारी में पडिक्कल ने 75 गेंदों पर 44 रन जोड़े, जिसमें 6 चौके भी लगाए. इस तरह गॉल टेस्ट मैच में पडिक्कल सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया.
ऐसा रहा मैच का हाल
A clinical victory for #TeamIndia in the Galle Test.
— BCCI (@BCCI) August 19, 2026
Manav Suthar's 6 wicket haul in the second innings, guides India to a 165 run win over Sri Lanka.
Scorecard - https://t.co/M9LVyCAp8y #SLvIND pic.twitter.com/QxAhFQGZke
गॉल टेस्ट मैच की बात करें, तो इसमें कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था. जहां, भारत ने पहली पारी में 462 रन बनाए थे. वहीं, श्रीलंका की टीम पहली पारी में 284 रन पर ऑलआउट हो गई. और भारत को पहली पारी के आधार पर 178 रनों की बढ़त मिली. फिर टीम इंडिया ने दूसरी पारी में 193 रन बनाए और मेजबानों के सामने 372 रनों का लक्ष्य खड़ा किया. वहीं, इस टारगेट को चेज करने उतरी श्रीलंकाई टीम दूसरी पारी में 206 के स्कोर पर ही ऑलआउट हो गई. नतीजन, टीम इंडिया ने 165 रन से गॉल टेस्ट मैच पर कब्जा कर लिया.
उत्तराखंड की 104 हेल्थ हेल्पलाइन लोगों के लिए बनी वरदान, जो खुद करती है मरीजों को ट्रैक
Uttarakhand News: उत्तराखंड की धामी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं लगातार बेहतर बना रही है. सीएम धामी की 104 हेल्थ हेल्पलाइन ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में क्रांति ला दी है. राज्य में बीते एक दशक में 104 हेल्थ हेल्पलाइन सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी, शिकायतों के निस्तारण और लाभार्थियों की सक्रिय निगरानी का भी अहम जरिया बन गई है. इसकी सबसे खास बात ये है कि यह सिर्फ लोगों की कॉल का ही जवाब नहीं देती बल्कि ये जरूरतमंद मरीजों तक खुद पहुंचती है और उनके स्वास्थ्य और उपचार की स्थिति का पूरा फॉलोअप भी करती है.
1.38 करोड़ से ज्यादा हो चुकी हैं स्वास्थ्य संबंधी कॉल
उत्तराखंड सरकारी की 104 कॉल सेंटर का संचालन स्वास्थ्य निदेशालय देहरादून से किया जाता है. जो अब तक 1.38 करोड़ से ज्यादा स्वास्थ्य संबंधी कॉल कर चुका है. इसकी सुविधा राज्य के सभी 13 जिलों में 27 स्वास्थ्य सेवाओं और कार्यक्रमों से जुड़े लाभार्थियों को मिल रही है. बता दें कि सीएम धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में काम कर रही है. इसी उद्देश्य के तहत 104 हेल्पलाइन को सिर्फ सूचना देने वाले कॉल सेंटर के बजाय प्रोएक्टिव हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है.
कब शुरू होता है मरीजों का फॉलोअप?
बता दें कि धामी सरकारी की इस खास सेवा की सबसे बड़ी बात ये है कि इसका प्रोएक्टिव ट्रैकिंग सिस्टम है. राज्य के किसी भी जिले में स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में मरीज के रजिस्ट्रेशन के बाद संबंधित जानकारियां 104 कॉल सेंटर तक पहुंचाई जाती है. इसके बाद मरीजों से नियमित संपर्क कर उनकी स्थिति की जानकारी ली जाती है. इसमें खासतौर पर गर्भवती महिलाओं को भी लाभ मिल रहा है.
जिसके तहत गर्भावस्था के तीसरे महीने से लेकर प्रसव तक टीकाकरण और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं का भी फॉलोअप किया जाता है. जबकि बच्चे के जन्म के बाद करीब डेढ़ साल तक उसके स्वास्थ्य और टीकाकरण की स्थिति की भी निगरानी की जाती है. जिससे बच्चे को जरूरी टीके और स्वास्थ्य सेवाएं उचित समय पर मिल सकें. इसके साथ ही राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और एंटी रेबीज सेवाओं की लाभार्थियों को जरूरी जानकारी और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने का भी परामर्श दिया जाता है.
इन स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी होती है निगरानी
बता दें कि 104 कॉल सेंटर के जरिए 27 स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी होती है. इनमें आयुष्मान भारत योजना, आशा कार्यकर्ता, बाल स्वास्थ्य, चारधाम यात्रा, काउंसलिंग, डेंगू, प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास, ई-संजीवनी, हीमोफीलिया, हेपेटाइटिस, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था, एचआईवी, एचपीवी, उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह, मातृ स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, टीबी और थैलेसीमिया समेत विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़े लाभार्थियों से संपर्क किया जाता है. इसके साथ ही राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और एंटी रेबीज सेवाओं की लाभार्थियों को जरूरी जानकारी और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने का भी परामर्श दिया जाता है.
सिर्फ जानकारी नहीं, योजनाओं की डिलीवरी की भी पड़ताल
104 की भूमिका यहीं खत्म नहीं होती. कॉल सेंटर के माध्यम से मरीजों से सीधे फीडबैक लिया जाता है. केंद्र और राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मिलने वाले वित्तीय लाभ और प्रोत्साहन की जानकारी भी लाभार्थियों से क्रॉस-चेक की जाती है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र व्यक्ति तक पहुंचा या नहीं.
एक दशक के सफर में 104 हेल्थ हेल्पलाइन ने यह साबित किया है कि एक टोल-फ्री नंबर सिर्फ फोन उठाने की व्यवस्था नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, निगरानी, फॉलोअप और जवाबदेही का प्रभावी तंत्र भी बन सकता है. पहाड़ी और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण उत्तराखंड में यह मॉडल दूरदराज के लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता है. 104 हेल्थ हेल्पलाइन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो केवल नागरिकों की समस्याओं का समाधान नहीं कर रही, बल्कि लाभार्थियों तक स्वयं पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी और फॉलोअप सुनिश्चित कर रही है.
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
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