NTA को मजबूत बनाने पर सुप्रीम कोर्ट का जोर, राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर मांगी प्रगति रिपोर्ट
नीट समेत दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों और उनकी व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी एनटीए को मजबूत बनाने पर जोर दिया है. अदालत ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसा स्थायी सिस्टम तैयार होना चाहिए जिससे भविष्य में सामने आने वाली समस्याओं से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके.
17 कमियों और सुधार के सुझाव
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने बताया कि सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे का अध्ययन करने के बाद उनकी तरफ से करीब 17 कमियों और सुधार के सुझाव अदालत के सामने रखे गए थे. उनका कहना था कि राधाकृष्णन समिति ने परीक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम पहलुओं पर अपनी सिफारिशें दी थीं, लेकिन सरकार के हलफनामे में इन सिफारिशों को पूरी तरह लागू किए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं थी.
दूसरी समिति बनाने से समस्या
सुनवाई के दौरान अदालत ने भी इस पहलू पर ध्यान दिया और सरकार से राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर अब तक उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी. कोर्ट ने कहा कि केवल एक के बाद दूसरी समिति बनाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा. जरूरत इस बात की है कि पहले से किए गए अध्ययन और विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशों को जमीन पर लागू किया जाए और उनकी निगरानी भी हो.
अनुभव का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाए
अदालत ने विशेष रूप से ‘इंस्टीट्यूशनल मेमोरी’ तैयार करने पर जोर दिया. वही किसी परीक्षा में सामने आई गलती, उससे निपटने का तरीका, किए गए सुधार और उससे मिले अनुभव का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाए. इससे भविष्य में अधिकारियों और संस्थाओं को हर बार उसी समस्या से नए सिरे से न जूझना पड़े.
दूसरी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं
एनटीए की तकनीकी और प्रशासनिक क्षमता को लेकर भी अदालत ने कई सवाल किए. कोर्ट ने जानना चाहा कि क्या एनटीए के पास परीक्षा संचालन के लिए पर्याप्त कर्मचारी, तकनीकी संसाधन और दूसरी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं. साइबर सुरक्षा को लेकर भी अदालत ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा. खास तौर पर ऐसे समय में जब परीक्षाओं में तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है, सिस्टम की सुरक्षा को मजबूत रखना बड़ी जरूरत बन गई है.
नई प्रगति रिपोर्ट तैयार
सुनवाई में नंदन नीलेकणि समिति की ओर से दिए गए सुझावों को भी महत्व दिया गया. कोर्ट ने कहा कि नई प्रगति रिपोर्ट तैयार करते समय इन सुझावों को भी शामिल किया जाए. इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन और साइबर सुरक्षा जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के विकल्पों पर भी काम किया जाएगा.
तकनीकी क्षमता को मजबूत करना जरूरी होगा
नीट को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित तरीके से कराने का सवाल भी सुनवाई में उठा. हालांकि इस मुद्दे पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा में भी सुरक्षा से जुड़े जोखिम हो सकते हैं. ऐसे में केवल परीक्षा का माध्यम बदल देना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरे सिस्टम की सुरक्षा, निगरानी और तकनीकी क्षमता को मजबूत करना जरूरी होगा.
मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था भी होनी चाहिए
प्रश्नपत्र की सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने अदालत को मौजूदा व्यवस्था की जानकारी दी. इस पर कोर्ट ने संकेत दिया कि परीक्षा की सुरक्षा केवल आधुनिक तकनीक पर निर्भर नहीं हो सकती. पुराने अनुभवों और अब तक सामने आई कमियों से सीख लेना भी उतना ही जरूरी है. अदालत का जोर इस बात पर रहा कि तकनीक के साथ संस्थागत अनुभव और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था भी होनी चाहिए.
विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा
सत्यम सिंह राजपूत के मुताबिक, कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि राधाकृष्णन समिति ने परीक्षा व्यवस्था से जुड़े ज्यादातर महत्वपूर्ण मुद्दों को पहले ही कवर किया है. इसलिए अब जरूरत उन सिफारिशों को प्रभावी तरीके से लागू करने की है. अदालत ने सरकार से तीन सप्ताह के भीतर उचित और विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है.
भारत सरकार से सलाह-मशविरा किया
नई व्यवस्था में डॉ. राधाकृष्णन को भी शामिल किए जाने का सुझाव सामने आया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यदि डॉ. राधाकृष्णन की सेहत अनुमति देती है, तो उन्हें शामिल करने के संबंध में भारत सरकार से सलाह-मशविरा किया जाएगा.
पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का मुख्य जोर एक ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करने पर दिखाई दिया जो भरोसेमंद, सुरक्षित और लंबे समय तक प्रभावी रहे. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुधार का मकसद केवल मौजूदा विवाद को खत्म करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना होना चाहिए जिसमें भविष्य की चुनौतियों से निपटने की क्षमता पहले से मौजूद हो.
सुप्रीम कोर्ट मामले की अगली सुनवाई करेगा
अब सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा और प्रगति रिपोर्ट अदालत के सामने रखनी होगी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट मामले की अगली सुनवाई करेगा और यह देखा जाएगा कि राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों तथा अन्य विशेषज्ञ सुझावों को लागू करने की दिशा में अब तक कितनी प्रगति हुई है. कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि एनटीए को ऐसी मजबूत संस्था के रूप में विकसित करना जरूरी है, जिस पर देश की परीक्षा व्यवस्था का भरोसा कायम रह सके.
युवाओं से जुड़ने के लिए मोदी सरकार ने बनाया खास प्लान, केंद्रीय मंत्रियों को दे दी ये अहम जिम्मेदारी
युवाओं से जुड़ने के लिए मोदी सरकार ने बड़ा प्लान लॉन्च कर दिया है. मोदी सरकार ने फैसला किया है कि अब हर रोज एक केंद्रीय मंत्री एक यूनिवर्सिटी में जाएगा. यूनिवर्सिटी में वे छात्र-छात्राओं से बात करेंगे. वे स्टूडेंट्स की चिंताओं पर बात करेंगे. वे देश से जुड़े मुद्दों पर स्टूडेंट्स का नजरिया समझेंगे. इस कार्यक्रम को वन डे-वन यूनिवर्सिटी नाम दिया गया है.
छात्रों से अलग-अलग मुद्दों पर करेंगे चर्चा
वन डे-वन यूनिवर्सिटी कार्यक्रम के तहत केंद्रीय मंत्री तय यूनिवर्सिटीज में जाएंगे और वहां छात्रों से अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा करेंगे. वे छात्रों की समस्या सुनेंगे और युवाओं को सरकार की योजनाओं की जानकारी देंगे.
इन केंद्रीय मंत्रियों को दिया जिम्मा
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी और युवा एवं खेल मंत्री मंत्री मनसुख मांडविया को यूनिवर्सिटी और दौरे पर जाने वाले मंत्रियों के साथ तालमेल बिठाने की जिम्मेदारी दी गई है. बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा हुई थी. हालांकि, मंत्रियों के यूनिवर्सिटी का कार्यक्रम अभी तय नहीं हुआ है.
देश में वर्तमान 1300 यूनिवर्सिटीज
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के अनुसार, देश में वर्तमान में 1300 यूनिवर्सिटी है, जिनमें 57 सेंट्रल यूनिवर्सिटीज हैं तो 522 स्टेट यूनिवर्सिटीज शामिल हैं. बाकी यूनिवर्सिटीज डीम्ड हैं या फिर प्राइवेट.
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