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उत्तराखंड की 104 हेल्थ हेल्पलाइन लोगों के लिए बनी वरदान, जो खुद करती है मरीजों को ट्रैक

Uttarakhand News: उत्तराखंड की धामी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं लगातार बेहतर बना रही है. सीएम धामी की 104 हेल्थ हेल्पलाइन ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में क्रांति ला दी है. राज्य में बीते एक दशक में 104 हेल्थ हेल्पलाइन सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी, शिकायतों के निस्तारण और लाभार्थियों की सक्रिय निगरानी का भी अहम जरिया बन गई है. इसकी सबसे खास बात ये है कि यह सिर्फ लोगों की कॉल का ही जवाब नहीं देती बल्कि ये जरूरतमंद मरीजों तक खुद पहुंचती है और उनके स्वास्थ्य और उपचार की स्थिति का पूरा फॉलोअप भी करती है.

1.38 करोड़ से ज्यादा हो चुकी हैं स्वास्थ्य संबंधी कॉल

उत्तराखंड सरकारी की 104 कॉल सेंटर का संचालन स्वास्थ्य निदेशालय देहरादून से किया जाता है. जो अब तक 1.38 करोड़ से ज्यादा स्वास्थ्य संबंधी कॉल कर चुका है. इसकी सुविधा राज्य के सभी 13 जिलों में 27 स्वास्थ्य सेवाओं और कार्यक्रमों से जुड़े लाभार्थियों को मिल रही है. बता दें कि सीएम धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में काम कर रही है. इसी उद्देश्य के तहत 104 हेल्पलाइन को सिर्फ सूचना देने वाले कॉल सेंटर के बजाय प्रोएक्टिव हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है.

कब शुरू होता है मरीजों का फॉलोअप?

बता दें कि धामी सरकारी की इस खास सेवा की सबसे बड़ी बात ये है कि इसका प्रोएक्टिव ट्रैकिंग सिस्टम है. राज्य के किसी भी जिले में स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में मरीज के रजिस्ट्रेशन के बाद संबंधित जानकारियां 104 कॉल सेंटर तक पहुंचाई जाती है. इसके बाद मरीजों से नियमित संपर्क कर उनकी स्थिति की  जानकारी ली जाती है. इसमें खासतौर पर गर्भवती महिलाओं को भी लाभ मिल रहा है.

जिसके तहत गर्भावस्था के तीसरे महीने से लेकर प्रसव तक टीकाकरण और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं का भी फॉलोअप किया जाता है. जबकि बच्चे के जन्म के बाद करीब डेढ़ साल तक उसके स्वास्थ्य और टीकाकरण की स्थिति की भी निगरानी की जाती है. जिससे बच्चे को जरूरी टीके और स्वास्थ्य सेवाएं उचित समय पर मिल सकें. इसके साथ ही राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और एंटी रेबीज सेवाओं की लाभार्थियों को जरूरी जानकारी और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने का भी परामर्श दिया जाता है.

इन स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी होती है निगरानी

बता दें कि 104  कॉल सेंटर के जरिए 27 स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी होती है. इनमें आयुष्मान भारत योजना, आशा कार्यकर्ता, बाल स्वास्थ्य, चारधाम यात्रा, काउंसलिंग, डेंगू, प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास, ई-संजीवनी, हीमोफीलिया, हेपेटाइटिस, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था, एचआईवी, एचपीवी, उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह, मातृ स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, टीबी और थैलेसीमिया समेत विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़े लाभार्थियों से संपर्क किया जाता है. इसके साथ ही राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और एंटी रेबीज सेवाओं की लाभार्थियों को जरूरी जानकारी और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने का भी परामर्श दिया जाता है.

सिर्फ जानकारी नहीं, योजनाओं की डिलीवरी की भी पड़ताल

104 की भूमिका यहीं खत्म नहीं होती. कॉल सेंटर के माध्यम से मरीजों से सीधे फीडबैक लिया जाता है. केंद्र और राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मिलने वाले वित्तीय लाभ और प्रोत्साहन की जानकारी भी लाभार्थियों से क्रॉस-चेक की जाती है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र व्यक्ति तक पहुंचा या नहीं.

एक दशक के सफर में 104 हेल्थ हेल्पलाइन ने यह साबित किया है कि एक टोल-फ्री नंबर सिर्फ फोन उठाने की व्यवस्था नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, निगरानी, फॉलोअप और जवाबदेही का प्रभावी तंत्र भी बन सकता है. पहाड़ी और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण उत्तराखंड में यह मॉडल दूरदराज के लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता है. 104 हेल्थ हेल्पलाइन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो केवल नागरिकों की समस्याओं का समाधान नहीं कर रही, बल्कि लाभार्थियों तक स्वयं पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी और फॉलोअप सुनिश्चित कर रही है.

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

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  Sports

बेंगलुरु नहीं अब Chennai में होगा Duleep Trophy Final, BCCI ने क्रिकेट फैंस के लिए लिया बड़ा फैसला

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले का आयोजन स्थल बदलने का फैसला किया है। अब दलीप ट्रॉफी का फाइनल बेंगलुरु के बजाय चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाएगा। यह मुकाबला 6 सितंबर से शुरू होगा और पांच दिनों तक चलेगा।

बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल मुकाबले तय कार्यक्रम के अनुसार खेले जाएंगे, लेकिन इन मैचों को देखने के लिए आम दर्शकों को मैदान में प्रवेश नहीं दिया जा सकेगा। इसके पीछे सरकारी प्रतिबंधों को वजह बताया गया है। ऐसे में बोर्ड ने फाइनल को चेन्नई ट्रांसफर करने का फैसला किया है, ताकि क्रिकेट प्रशंसक स्टेडियम में बैठकर देश के शीर्ष खिलाड़ियों को खेलते हुए देख सकें।

सैकिया के मुताबिक, बेंगलुरु के उत्कृष्टता केंद्र में दो क्वार्टर फाइनल और दो सेमीफाइनल मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। हालांकि, वहां आम लोगों के लिए प्रवेश की अनुमति नहीं होने के कारण फाइनल के आयोजन स्थल में बदलाव किया गया है। चेन्नई का एमए चिदंबरम स्टेडियम देश के प्रमुख क्रिकेट मैदानों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, दलीप ट्रॉफी का इस बार का आयोजन 23 अगस्त से शुरू होगा। यह अंतर-क्षेत्रीय लाल गेंद वाला बहुदिवसीय टूर्नामेंट है, जिसमें देश के अलग-अलग क्षेत्रों की टीमें हिस्सा लेंगी। शुरुआती चरण में दो क्वार्टर फाइनल एक साथ खेले जाएंगे। पहले मुकाबले में पूर्व क्षेत्र का सामना पूर्वोत्तर क्षेत्र से होगा, जबकि दूसरे क्वार्टर फाइनल में उत्तर क्षेत्र और पश्चिम क्षेत्र आमने-सामने होंगे।

क्वार्टर फाइनल मुकाबले चार-चार दिन के होंगे और इनकी शुरुआत 23 अगस्त से होगी। इसके बाद दोनों सेमीफाइनल मुकाबले 30 अगस्त से शुरू होंगे। इन मुकाबलों के बाद फाइनल के लिए दोनों विजेता टीमें चेन्नई पहुंचेंगी। फाइनल छह सितंबर से खेला जाएगा और यह पांच दिन का मुकाबला होगा।

गौरतलब है कि दलीप ट्रॉफी में देश के कई प्रमुख और उभरते हुए क्रिकेटरों को लाल गेंद के प्रारूप में खुद को साबित करने का मौका मिलता है। घरेलू क्रिकेट का यह टूर्नामेंट भारतीय टीम के लिए भी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। खास तौर पर टेस्ट क्रिकेट के लिए खिलाड़ियों की तैयारी में ऐसे मुकाबलों की अहम भूमिका रहती है।

बीसीसीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि टूर्नामेंट के सभी मुकाबलों का सीधा प्रसारण इंटरनेट के माध्यम से किया जाएगा। वहीं कुछ चुनिंदा मैचों को टेलीविजन पर भी दिखाया जाएगा। इनमें फाइनल मुकाबला भी शामिल है, जिससे मैदान पर मौजूद दर्शकों के अलावा देशभर के क्रिकेट प्रशंसक भी मुकाबले देख सकेंगे।

बता दें कि मध्य क्षेत्र दलीप ट्रॉफी का मौजूदा विजेता है। उसने पिछले साल के फाइनल में दक्षिण क्षेत्र को हराकर खिताब अपने नाम किया था। अब उसकी नजर एक बार फिर ट्रॉफी बचाने पर होगी, जबकि बाकी क्षेत्र उसे चुनौती देने के लिए मैदान में उतरने वाले हैं।
Wed, 19 Aug 2026 20:57:00 +0530

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