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Best Breakfast for Iron Deficiency: आयरन की कमी है तो नाश्ते में खाएं ये चीजें

सुबह का नाश्ता यकीनन काफी मायने रखता है। अधिकतर लोग सुबह उठकर चाय-बिस्कुट, ब्रेड या नमकीन खाना पसंद करते हैं। लेकिन शरीर में आयरन की कमी है, तो नाश्ते का चुनाव सिर्फ पेट भरने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आप आयरन रिच फूड्स को अपने नाश्ते का हिस्सा बनाएं।

साथ ही, यह भी ध्यान रखें कि सिर्फ आयरन से भरपूर खाना खाना ही पर्याप्त नहीं होता। शरीर उस आयरन को कितना अवशोषित कर पाता है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है।  यही वजह है कि आयरन की कमी में “क्या खाएं” के साथ-साथ “किसके साथ खाएं और कब खाएं” जानना ज्यादा काम का है।

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बेसन चीला और नींबू का कॉम्बिनेशन  

आयरन की कमी वाले लोगों के लिए बेसन से बना चीला एक बेहतरीन नाश्ता हो सकता है। चना और दूसरी दालें प्लांट बेस्ड सोर्स में शामिल हैं। लेकिन यहां एक छोटी-सी गलती पूरी प्लेट को कम इफेक्टिव बना सकती है। आप चीले के साथ सिर्फ दही और चाय लेने के बजाय इसे टमाटर, शिमला मिर्च, हरी धनिया और नींबू के साथ खाएं। विटामिन सी प्लांट बेस्ड आयरन के अब्जॉर्बशन में मदद करता है। 

इस तरह खाएं पोहा 

नाश्ते में पोहा खाना एक अच्छा आइडिया हो सकता है। लेकिन इसे सही इंग्रीडिएंट्स के साथ बनाया जाए तो यह ज्यादा बैलेंस्ड ब्रेकफास्ट बन सकता है। पोहा बनाते समय इसमें मूंगफली, मटर, थोड़ी मात्रा में चना और हरी सब्जियां जोड़ी जा सकती हैं। इसके साथ नींबू और ताजा टमाटर डालना भी एक अच्छा तरीका है। याद रखें कि नींबू सिर्फ स्वाद के लिए नहीं है। विटामिन सी प्लांट बेस्ड आयरन को अब्जॉर्ब करने में मदद करता है।  

खाएं स्प्राउट्स चाट 

अगर आप सुबह कुछ हल्का और जल्दी तैयार होने वाला नाश्ता चाहिए, तो मूंग या चने की स्प्राउट्स चाट अच्छा विकल्प हो सकती है। इसे सिर्फ अंकुरित दानों और नमक तक सीमित रखने के बजाय इसमें टमाटर, शिमला मिर्च, धनिया, नींबू, थोड़े भुने चने या मूंगफली डालें। अगर स्प्राउट्स या दालें आपके लिए पचने में भारी लगती हैं, तो मात्रा कम रखें। आयरन बढ़ाने के चक्कर में ऐसा ब्रेकफास्ट चुनने की जरूरत नहीं है जिससे पेट ही परेशान हो जाए।

- मिताली जैन

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एयर इंडिया ने नियामक आवश्यकता से अधिक किए पायलट्स के टेस्ट, यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध

नई दिल्ली, 18 अगस्त (आईएएनएस)। एयर इंडिया ने मंगलवार को ऐलान किया कि उसके द्वारा सभी पायलट के स्वेच्छा से किए जा रहे टेस्ट जरूरी नियामक आवश्यकताओं से अधिक हो गए हैं। यह उसके यात्रियों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का हिस्सा है। यह जानकारी एयरलाइन की ओर से जारी बयान में दी गई।

एयरलाइन ने कहा कि सभी पायलट के टेस्ट जारी हैं और सभी पक्षकारों और मीडिया से अपीली की कि वे किसी भी अनवेरिफाइड जानकारी पर आधारित रिपोर्ट या जानकारी पर विश्वास न करें।

एयरलाइन ने एक बयान में कहा, सुरक्षा और प्रोफेशनलिज्म के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के तहत, एयर इंडिया ने रेगुलेटरी जरूरतों से आगे बढ़कर सभी पायलटों के लिए स्वेच्छा से एक टेस्टिंग प्रोग्राम शुरू किया है।

एयरलाइन ने कहा, यह प्रक्रिया अभी चल रही है, इसलिए हम मीडिया और अन्य संबंधित पक्षों से अनुरोध करते हैं कि वे बिना पुष्टि वाली या बिना आधार वाली जानकारी के आधार पर कोई अटकलें न लगाएं और न ही कोई रिपोर्टिंग करें।

एयरलाइन ने आगे कहा कि किसी भी तरह का आकलन करने से पहले प्रक्रिया के पूरा होने और तथ्यों की पुष्टि होने का इंतजार करना चाहिए।

इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हफ्ते की शुरुआत में एयर इंडिया के दो और पायलट एयरलाइन द्वारा किए गए शुरुआती ड्रग टेस्ट में फेल हो गए हैं। यह टेस्ट एक बड़े स्क्रीनिंग प्रोग्राम के तहत किए गए थे, जिसे हाल ही में फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट में हुई एक घटना के बाद शुरू किया गया था।

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि फाइनल टेस्ट के नतीजों का अभी भी इंतजार है और पुष्टि होने तक दोनों पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया गया है।

टाटा ग्रुप की एयरलाइन ने एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के तहत सभी पायलटों के लिए ड्रग टेस्ट का आदेश दिया। यह कदम तब उठाया गया जब फुकेत-दिल्ली फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड के विमान के लैंड करने के बाद हुए दो यूरिन टेस्ट में फेल होने की बात सामने आई।

इसके अलावा, खबरों के मुताबिक उनके शरीर में मारिजुआना भी पाया गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 300 से ज्यादा एयर इंडिया पायलटों का यह टेस्ट किया जा चुका है।

हालांकि, ड्रग टेस्ट के फाइनल नतीजों को प्रोसेस होने में आम तौर पर 24 से 48 घंटे का समय लगता है।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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  Sports

David Warner के बाद Australia की सलामी जोड़ी पर संकट, Matt Renshaw लौटे और Labuschagne के लिए बढ़ी मुश्किलें

ऑस्ट्रेलिया की टीम को बांग्लादेश के खिलाफ घरेलू मैदान पर मिली शर्मनाक हार के बाद चयनकर्ताओं ने बड़ा फैसला लिया है। डार्विन में खेले गए पहले टेस्ट के बाद जैक वेदराल्ड को टीम से बाहर कर दिया गया है। अब उनकी जगह मैट रेनशॉ को अगले टेस्ट के लिए शुरुआती बल्लेबाज के तौर पर मौका मिलने की उम्मीद है।

जैक वेदराल्ड के लिए डार्विन टेस्ट की शुरुआत बेहद खराब रही थी। पहली गेंद पर उन्होंने ऑफ स्टंप से काफी बाहर जाती गेंद पर गलत शॉट खेलने की कोशिश की। इसके बाद अगली गेंद भी ज्यादा प्रभावी नहीं रही। तीसरी गेंद पर उन्होंने ऑफ स्टंप के करीब आई गेंद को काटने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले से लगकर विकेटों पर जा लगी। इस तरह छह मिनट से भी कम समय में उनकी पारी खत्म हो गई।

वेदराल्ड के लिए यह मुकाबला खास था क्योंकि डार्विन को उनकी घरेलू वापसी के लिए सही मंच माना जा रहा था। लेकिन वह मौके का फायदा नहीं उठा सके। छह टेस्ट में उनके नाम केवल एक अर्धशतक है और उनका बल्लेबाजी औसत 20.36 रहा है। ऐसे प्रदर्शन के बाद बांग्लादेश के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया की हार ने उनकी स्थिति और कमजोर कर दी।

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले में अपने तेज गेंदबाजों के दम पर दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन बांग्लादेश के शीर्ष क्रम ने उन्हें काफी आसानी से खेला। इसी वजह से चयनकर्ताओं के सामने ऊपरी क्रम में बदलाव का दबाव बढ़ गया। माना जा रहा है कि अगर ऑस्ट्रेलिया डार्विन में हार से बच जाता तो वेदराल्ड को एक और मौका मिल सकता था।

अब मैट रेनशॉ के लिए वापसी का रास्ता खुल गया है। रेनशॉ ने पिछले घरेलू सत्र में क्वींसलैंड के लिए शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने शेफील्ड शील्ड में 46.09 की औसत से रन बनाए और दो शतक भी लगाए। इससे पहले वह ऑस्ट्रेलिया की एशेज टीम में वेदराल्ड से पीछे रह गए थे।

गौरतलब है कि रेनशॉ ने अब तक 14 टेस्ट खेले हैं और उनकी पिछली तीन टेस्ट पारियां मध्यक्रम में आई थीं। उनका आखिरी टेस्ट मैच 2023 की शुरुआत में दिल्ली में हुआ था। अब मैके में उन्हें फिर से पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी मिल सकती है। इससे पहले उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में भी सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभाई थी।

वॉर्नर के संन्यास के बाद से ऑस्ट्रेलिया अब तक नौ अलग-अलग सलामी बल्लेबाज आजमा चुका है। ऐसे में रेनशॉ के लिए यह मौका बेहद अहम है। उनके मार्गदर्शक उस्मान ख्वाजा भी लंबे अंतराल के बाद टेस्ट टीम में लौटकर सफल रहे थे और रेनशॉ उनसे प्रेरणा ले सकते हैं।

दूसरी ओर, मार्नस लाबुशेन पर भी दबाव बढ़ गया है। कोच और चयनकर्ता एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने उन्हें साफ संकेत दिया है कि टीम में जगह बनाए रखने के लिए उन्हें बड़ी पारियां खेलनी होंगी। डार्विन की दूसरी पारी में लाबुशेन ने 31 रन बनाए और तेज गेंदबाजों के खिलाफ उनका खेल बेहतर नजर आया, लेकिन मैकडोनाल्ड के मुताबिक यह पारी सिर्फ 31 रन तक ही सीमित रही।

लाबुशेन का टेस्ट औसत अब 44.16 तक गिर चुका है, जबकि एक समय उनका औसत 60 के आसपास था। तीन साल से टेस्ट शतक नहीं लगा पाने के कारण मैके में उनके प्रदर्शन पर खास नजर रहेगी। अगले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया का लक्ष्य श्रृंखला बराबर करना होगा, क्योंकि घरेलू मैदान पर बांग्लादेश से श्रृंखला हारना टीम के लिए एक और बड़ा झटका साबित हो सकता है।
Tue, 18 Aug 2026 22:18:05 +0530

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