NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जांच के लिए बनेगी हाई पावर कमेटी
NEET और दूसरे परीक्षा पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने पूरे मामले की जांच के लिए एक हाई पावर कमेटी बनाने का फैसला किया है. यह कमेटी प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, पुलिस की कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के घायल होने के मामलों की जांच करेगी. महिला प्रदर्शनकारियों से कथित बदसलूकी, यौन उत्पीड़न और ऑनलाइन उत्पीड़न की शिकायतें भी कमेटी के सामने रखी जा सकेंगी.
पीड़ित को मिले अपनी बात रखने का मौका- एससी
कोर्ट ने कहा कि हर पीड़ित को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा. कमेटी में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज, पूर्व हाई कोर्ट चीफ जस्टिस और रिटायर्ड डीजी स्तर के अधिकारी को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है. पूर्व CBI डायरेक्टर और पूर्व DGP को भी कमेटी में शामिल करने का सुझाव आया है. कमेटी जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की मदद ले सकेगी और जरूरी मामलों में अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किए बिना अंतरिम रिपोर्ट भी दे सकेगी.
प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR का मुद्दा भी उठा
सुनवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR का मुद्दा भी उठा. CJI सूर्यकांत ने कहा कि सिर्फ छात्रों और प्रदर्शनकारियों से जुड़ी FIR की अलग सूची दी जाए. कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ने पर ऐसी FIR को अनुच्छेद 142 के तहत खत्म करने पर विचार किया जा सकता है. हालांकि हत्या, रेप, POCSO और अपहरण जैसे गंभीर आरोपों वाले मामलों को अलग रखा जाएगा. कोर्ट ने आरोपियों की पहचान और FIR की पूरी जानकारी भी मांगी है.
दिल्ली पुलिस ने भी दाखिल किया हलफनामा
प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने का मुद्दा भी सामने आया. दिल्ली पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया गया, जिसमें बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. पुलिस पर पत्थरबाजी और हिंसा से जुड़े वीडियो का भी जिक्र हुआ. दूसरी तरफ घायल प्रदर्शनकारियों के लिए अंतरिम मुआवजे की मांग भी कोर्ट में रखी गई.
महिलाओं से कथित बदसलूकी के आरोपों पर भी कोर्ट ने गंभीरता दिखाई. कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. पुलिस कार्रवाई के दौरान महिलाओं के साथ बदसलूकी के वीडियो और पुलिसकर्मियों की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया गया. कोर्ट ने कहा कि कमेटी की जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर जल्दबाजी में नहीं पहुंचा जाएगा.
सुनवाई के दौरान उठा फेस रिकग्निशन का मुद्दा
सुनवाई के दौरान फेस रिकग्निशन यानी चेहरा पहचानने वाली तकनीक के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठा. सवाल किया गया कि प्रदर्शन के दौरान लोगों के चेहरों का डेटा कैसे जुटाया जा रहा है और उसका इस्तेमाल किस तरह हो रहा है. निजता के अधिकार और सरकार के पास इस डेटा के इस्तेमाल का कानूनी अधिकार है या नहीं, इस पर भी सवाल उठे. सरकार की तरफ से कहा गया कि फेस रिकग्निशन के जरिए हर व्यक्ति की पहचान नहीं की जाती, बल्कि गंभीर अपराधियों के रिकॉर्ड से मिलान किया जाता है.
तथ्यों की जांच करेगी हाई पावर कमेटी
CJI सूर्यकांत ने साफ किया कि हाई पावर कमेटी मुख्य रूप से तथ्यों की जांच करेगी. फेस रिकग्निशन, निगरानी, निजता और अनुच्छेद 21 से जुड़े संवैधानिक और कानूनी सवालों पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट खुद करेगा. कमेटी इन मुद्दों पर अपनी रिपोर्ट दे सकती है, लेकिन अंतिम फैसला कोर्ट का ही होगा.
कोर्ट ने नोडल अधिकारी नियुक्त करने पर भी सहमति जताई है, जो अलग-अलग पक्षों से जानकारी लेकर कमेटी तक पहुंचाएंगे. कमेटी सभी पक्षों को सुनेगी और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की मदद लेगी. जंतर-मंतर से प्रदर्शन स्थल हटाने का मुद्दा भी कोर्ट में उठा, जिस पर कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन स्थल बदलना प्रशासनिक मामला है.
अब सभी पक्ष आज कमेटी के काम और जांच के मुद्दों पर अपने सुझाव देंगे. सुप्रीम कोर्ट कल कमेटी को लेकर आदेश जारी करेगा. इसके बाद कमेटी अपना काम शुरू करेगी और जरूरत के मुताबिक समय-समय पर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को देगी. रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट आगे जरूरी आदेश जारी करेगा.
खेल महाकुंभ-2026 का ऐलान, 1 सितंबर से 30 अक्टूबर तक होंगे मुकाबले; न्याय पंचायत से राज्य स्तर तक प्रतियोगिताएं
Khel Mahakumbh 2026: उत्तराखंड में खेल प्रतिभाओं को मंच देने के लिए खेल महाकुंभ-2026 मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी का आयोजन किया जाएगा। युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग ने प्रतियोगिताओं के आयोजन को लेकर विस्तृत कार्ययोजना जारी कर दी है। खेल महाकुंभ का आयोजन 1 सितंबर से 30 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा।
इस बार प्रतियोगिताओं का आयोजन चरणबद्ध तरीके से न्याय पंचायत, विधानसभा क्षेत्र, संसदीय क्षेत्र और राज्य स्तर पर किया जाएगा। अलग-अलग स्तरों पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित कर खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया जाएगा।
चार स्तरों पर होंगी प्रतियोगिताएं
विभाग की कार्ययोजना के मुताबिक खेल महाकुंभ को स्थानीय स्तर से शुरू कर राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा। सबसे पहले न्याय पंचायत स्तर पर प्रतियोगिताएं होंगी। इसके बाद चयनित खिलाड़ी विधानसभा और संसदीय क्षेत्र स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे। बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।
खिलाड़ियों को मिलेगा प्रतिस्पर्धा का मंच
खेल महाकुंभ का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं और खिलाड़ियों को अधिक से अधिक प्रतिस्पर्धात्मक अवसर उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी के तहत विभिन्न खेलों में प्रतिभागियों के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रतियोगिताओं के आयोजन की रूपरेखा तय कर दी है। अब संबंधित स्तरों पर आयोजन की तैयारियों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
विधानसभा से संसदीय क्षेत्र तक...
न्याय पंचायत स्तर की स्थानीय जनप्रतिनिधि खेलकूद प्रतियोगिताएं 01 से 10 सितम्बर 2026 तक, विधानसभा स्तर की विधायक चैम्पियनशिप ट्रॉफी प्रतियोगिताएं 11 से 20 सितम्बर 2026 तक, संसदीय क्षेत्र स्तर की सांसद चैम्पियनशिप ट्रॉफी प्रतियोगिताएं 21 से 30 सितम्बर 2026 तथा तथा राज्य स्तर की मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी प्रतियोगिताएं 10 सितम्बर से 30 अक्टूबर 2026 तक आयोजित की जाएंगी।
न्याय पंचायत स्तर पर- कबड्डी, एथलेटिक्स, खो-खो...
न्याय पंचायत स्तर पर अण्डर-14 एवं 19 बालक-बालिका वर्ग में कबड्डी, एथलेटिक्स, खो-खो एवं मुर्गा झपट जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। विधानसभा स्तर पर वॉलीबाल एवं पिट्टू सीधे तथा न्याय पंचायत स्तर से चयन के आधार की प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। संसदीय क्षेत्र स्तर पर मलखम्ब, रस्साकसी, गोली (कंचा), फुटबाल एवं बैडमिंटन सीधे तथा विधान सभा स्तर से चयन के आधार की विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
राज्य स्तर पर ये प्रतियोगिताएं
राज्य स्तर पर जूडो, बॉक्सिंग, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो, कराटे, बास्केटबाल, हॉकी, हैण्डबाल, योगासन, तैराकी, तीरंदाजी, फैन्सिंग, कुश्ती, पेंचक सिलाट, पावर लिफ्टिंग, वेट लिफ्टिंग, बेसबाल एवं लॉन टेनिस सीधे तथा विधानसभा स्तर से चयन के आधार की अनेक खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। महिला ओपन वर्ग तथा दिव्यांगजन महिला-पुरुष ओपन वर्ग के लिए भी विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं निर्धारित की गई हैं। इस संबंध में निदेशक, युवा कल्याण एवं प्रान्तीय रक्षक दल, उत्तराखण्ड दीप्ति सिंह विस्तृत कार्ययोजना जारी की गई है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों से आयोजन को सफल बनाने में सहयोग की अपेक्षा भी की है।
सीएम का संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि खेल महाकुम्भ के आयोजन का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना, ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों की प्रतिभाओं को बेहतर मंच उपलब्ध कराना तथा खिलाड़ियों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने का अवसर प्रदान करना है।
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