Delhi High Court का आबकारी मामला: CBI याचिका पर व्यापक सुनवाई, टुकड़ों में फैसले से इनकार
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आबकारी नीति मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त किए जाने के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर यह तय करने से सोमवार को इनकार कर दिया कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं। अदालत ने कहा कि वह मामले पर “व्यापक” सुनवाई करेगी और “टुकड़ों में” फैसला नहीं सुनाएगी। न्यायमूर्ति मनोज जैन ने आरोपमुक्त किए गए सभी आरोपियों को सीबीआई की लिखित दलीलों का जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।
अदालत ने आरोपमुक्ति के खिलाफ एजेंसी की याचिका पर पांच और छह अक्टूबर को सुनवाई करना तय किया। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल, सिसोदिया और पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक ने सीबीआई की पुनरीक्षण याचिका को सुनवाई योग्य नहीं होने के आधार पर खारिज करने का अनुरोध करते हुए आवेदन दायर किए हैं। पाठक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी ने न्यायमूर्ति जैन से पहले यह तय करने आग्रह किया कि सीबीआई की याचिका की सुनवाई योग्य है या नहीं।
चौधरी ने दलील दी कि सीबीआई याचिका “पूरी तरह गलत आधार पर” दायर की गई है और अगर यह शुरुआती कसौटी पर खरी नहीं उतरती तो अदालत को मामले की फाइल देखने की भी जरूरत नहीं है। न्यायमूर्ति जैन ने वरिष्ठ वकील से “बहुत ज्यादा तकनीकी बातों” में न जाने को कहा और कहा, “हम आपकी बात सुनेंगे। हम टुकड़ों में फैसला नहीं देना चाहते।” अदालत ने कहा, “दलीलों पर व्यापक सुनवाई होगी।
टुकड़ों में नहीं। हम सीबीआई से शुरुआत करेंगे और आप पर खत्म करेंगे। दलीलें एक साथ सुनी जाएंगी।” निचली अदालत ने 27 फरवरी को आबकारी नीति मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य को आरोपमुक्त कर दिया था।
अदालत ने कहा था कि यह मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह टिकने में असमर्थ है।
Allahabad High Court ने Sitapur में नजूल भूमि पर Congress को अंतरिम राहत देने से इनकार किया
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सीतापुर जिले में नजूल सरकारी भूमि पर कथित कब्जे से जुड़े मामले में कांग्रेस को अंतरिम राहत देने से सोमवार को इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद याचिकाकर्ता ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सके, जिससे यह साबित हो सके कि विवादित सरकारी भूमि उन्हें विधिवत आवंटित की गई थी। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कांग्रेस कमेटी, सीतापुर की ओर से दाखिल रिट याचिका पर यह आदेश पारित किया।
याचिका में सीतापुर नगर पालिका परिषद के कार्यपालक अधिकारी (प्रभारी) के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें मोहल्ला टामसेनगंज स्थित प्लॉट संख्या 244/1 के अभिलेखों से याचिकाकर्ताओं के नाम हटाने और भूमि से कब्जा हटाने का आदेश दिया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि वे घंटाघर के ऊपरी हिस्से में स्थित परिसर संख्या 1/6 पर वर्ष 1971 से काबिज हैं। उन्होंने वर्ष 1971 में 320 रुपये किराये के रूप में जमा किए जाने की रसीद भी अदालत में पेश की।
हालांकि, अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि पिछले करीब 55 वर्षों से कोई किराया जमा नहीं किया गया है और भूमि के वैध आवंटन या कब्जे के समर्थन में कोई समझौता अथवा आवंटन पत्र भी पेश नहीं किया गया। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि नजूल भूमि सरकारी संपत्ति है और कोई भी राजनीतिक दल उस पर अनधिकृत रूप से कब्जा नहीं कर सकता। अदालत ने भी कहा कि केवल लंबे समय तक जमे रहने से सरकारी भूमि पर कब्जा वैध नहीं हो जाता।
वैध कब्जे के लिए कम से कम आवंटन आदेश या कोई अन्य संबंधित दस्तावेज होना जरूरी है, लेकिन याचिकाकर्ता ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सके। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
मामले की अगली सुनवाई एक अक्टूबर को होगी।
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