Allahabad High Court ने Sitapur में नजूल भूमि पर Congress को अंतरिम राहत देने से इनकार किया
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सीतापुर जिले में नजूल सरकारी भूमि पर कथित कब्जे से जुड़े मामले में कांग्रेस को अंतरिम राहत देने से सोमवार को इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद याचिकाकर्ता ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सके, जिससे यह साबित हो सके कि विवादित सरकारी भूमि उन्हें विधिवत आवंटित की गई थी। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कांग्रेस कमेटी, सीतापुर की ओर से दाखिल रिट याचिका पर यह आदेश पारित किया।
याचिका में सीतापुर नगर पालिका परिषद के कार्यपालक अधिकारी (प्रभारी) के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें मोहल्ला टामसेनगंज स्थित प्लॉट संख्या 244/1 के अभिलेखों से याचिकाकर्ताओं के नाम हटाने और भूमि से कब्जा हटाने का आदेश दिया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि वे घंटाघर के ऊपरी हिस्से में स्थित परिसर संख्या 1/6 पर वर्ष 1971 से काबिज हैं। उन्होंने वर्ष 1971 में 320 रुपये किराये के रूप में जमा किए जाने की रसीद भी अदालत में पेश की।
हालांकि, अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि पिछले करीब 55 वर्षों से कोई किराया जमा नहीं किया गया है और भूमि के वैध आवंटन या कब्जे के समर्थन में कोई समझौता अथवा आवंटन पत्र भी पेश नहीं किया गया। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि नजूल भूमि सरकारी संपत्ति है और कोई भी राजनीतिक दल उस पर अनधिकृत रूप से कब्जा नहीं कर सकता। अदालत ने भी कहा कि केवल लंबे समय तक जमे रहने से सरकारी भूमि पर कब्जा वैध नहीं हो जाता।
वैध कब्जे के लिए कम से कम आवंटन आदेश या कोई अन्य संबंधित दस्तावेज होना जरूरी है, लेकिन याचिकाकर्ता ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सके। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
मामले की अगली सुनवाई एक अक्टूबर को होगी।
West Bengal Congress ने नदिया में नेता व बेटे की हत्या पर पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकाला
कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का आरोप लगाते हुए सोमवार को राज्य पुलिस मुख्यालय तक एक रैली निकाली। यह रैली स्वतंत्रता दिवस पर नदिया जिले में पार्टी नेता अनीसुर रहमान (50) और उनके बेटे अबू सूफियान (24) की हत्या के विरोध में आयोजित की गई थी। अलीपुर इलाके में बारिश के बावजूद करीब 500 कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रैली में हिस्सा लिया।
प्रदर्शनकारियों ने पश्चिम बंगाल पुलिस मुख्यालय तक पहुंचने से पहले लगभग एक किलोमीटर की दूरी तय की। पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (डब्ल्यूबीपीसीसी)के अध्यक्ष सुवंकर सरकार ने बांकुड़ा ज़िले में कथित हमले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के एक स्वयंसेवक के पिता की मौत का मुद्दा भी उठाया। सुवंकर ने रैली के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘हमारे नादिया जिले के नेता और उनके युवा बेटे पर बदमाशों ने गोलियां बरसाईं और बेरहमी से काट डाला, जबकि उन्होंने हाल ही में नकाशीपाड़ा पुलिस थाना प्रभारी को अपनी जान को खतरे के बारे में बताया था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसी तरह, कॉजपा के एक स्वयंसेवक के पिता जनाब माफिक की शनिवार रात बर्दवान चिकित्सा महाविद्यालय और अस्पताल में मौत हो गई।
बांकुड़ा में अपने गांव के एक स्कूल को बेहतर बनाने के बारे में बात करने पर कुछ बदमाशों ने उन पर हमला किया था, जिसके दो दिन बाद उनकी मौत हुई।’’ सुवंकर ने कहा, ‘‘एक के बाद एक घटनाएं हो रही हैं। हम पुलिस महानिदेशक और मुख्यमंत्री से तत्काल और सख्त कदम उठाने की अपील करते हैं। अगर सरकार और पुलिस प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो कांग्रेस कार्यकर्ता विरोध में सड़कों पर उतरेंगे।’’ इस बीच, पुलिस ने बताया कि नदिया मामले में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है।
पुलिस ने बताया कि शनिवार रात करीब 9.30 बजे दोनों पीड़ित अपनी कार से घर लौट रहे थे, तभी उनके घर से करीब 200 मीटर दूर नकाशीपाड़ा में नागाडी रेलवे गेट के पास उनकी गाड़ी को रोका गया। अधिकारियों के मुताबिक, हमलावरों ने कथित तौर पर गाड़ी पर गोली चलाई और फिर धारदार हथियारों से उन दो लोगों पर हमला किया। ज़्यादा खून बहने के कारण दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।पुलिस ने बताया कि बांकुड़ा के इंदस में कॉजपा स्वयंसेवक के पिता जनाब माफिक की मौत के मामले में पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ़्तार किया है।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनमें से तीन को पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि पांच लोगों की शिनाख्त परेड कराई जाएगी।
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