ईरान की युद्ध नीति की दुनिया मुरीद हो चुकी है। छोटे देश हो या फिर बड़े ड्रोन युद्ध नीति ने दिशा और दशा बदल दी है। यही वजह है कि हर देश सस्ते और खतरनाक ड्रोन की दौड़ में आ चुका है। तुर्की ने अपने सबसे आधुनिक स्टील कॉम्बैट ड्रोन अंका थ्री का एक ऐसा घातक संस्करण तैयार किया जो भविष्य के हवाई युद्ध के पूरे गणित को हिला सकता है। लगभग 700 किलोमीटर तक मार करने वाली सुपर लाइटनिंग पीयूष मिसाइलों से लैस यह ड्रोन अब अकेला नहीं बल्कि इंसानी पायलटों के साथ मिलकर जंग लड़ेगा। तुर्की ने इस ड्रोन को ऐसे वक्त में दिखाया जब इसराइल से रिश्ते बेहद खतरनाक मोड़ पर हैं। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान और इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन ने नेतन्याहू के बीच जुबानी जंग भी चल रही थी। इजरायली टेक्नोलॉजी दुनिया भर में मशहूर है। तुर्की रक्षा क्षेत्र में अपनी करामात के लिए जाना जाता है। ऐसे में दुनिया इस ड्रोन को दूसरे नजरिए से भी देखने लगी।
तुर्की एरोस्पेस इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित अंका 3 एक फ्लाइंग विंग डिजाइन वाला स्टेल्थ यूसीएब भी है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका कम दृष्टता स्टेल्थ डिज़ है जिसे दुश्मन के एयर डिफेंस रडार की नजरों से बचाए रखता है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अंका 3 दो सुपर लाइटनिंग लॉन्ग रेंज क्रूज मिसाइलों के साथ जोड़ा गया। लगभग 700 किमी के स्ट्राइक रेंज के साथ यह ड्रोन दुश्मन की सीमा में घुसे बिना उसके सबसे मजबूत ठिकानों को तबाह कर सकता है। लगभग 10 घंटे तक लगातार हवा में रहने की क्षमता इसे घातक स्ट्राइक प्लेटफार्म बनाती है। अंका 3 की असली खासियत केवल उसकी मिसाइलें नहीं बल्कि उसका काम करने का तरीका है। इसे मैंड अनमैंड टीमिंग यानी मानव चालित फाइटर जेट्स और स्वयत ड्रोंस के तालमेल के लिए डिजाइन किया गया है। यह तुर्की के पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट कान के लिए एक लॉयल विंग मैन की तरह काम करेगा। इंसानी पायलट हवा में उड़ते हुए अंका3 जैसे कई स्टेल्थ ड्रोंस के बड़े बेड़े को कंट्रोल कर सकते हैं। टोही इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और बेहद खतरनाक हवाई हमलों की जिम्मेदारी यह ड्रोन खुद उठाएगा। जिसमें इंसानी पायलट की जान का जोखिम लगभग खत्म हो जाएगा।
ग्लोबल डिफेंस मार्केट में तुर्की जिस तरीके से अपने ड्रोन इकोसिस्टम जैसे बायर कटार टीवी2 किजिलमा और अब अंकात्री को मजबूत कर रहा है उसने बड़ी महाशक्तियों की चिंता बढ़ा दी। भविष्य के आसमान में अब कोई फाइटर पायलट अकेले जंग में नहीं उतरेगा बल्कि उसके इर्द-गिर्द स्वायत्त स्टेल्ट ड्रोन की अदृश्य ढाल और हमलावर दस्ता मौजूद होगा। अंका 3 ने यह साबित किया है कि हवाई युद्ध का अगला दौर इंसानों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साझा तालमेल पर टिका होगा। ऐसे में अब इसराइल के साथ जिस तरीके से जुबानी जंग हाल फिलहाल में देखी गई। इसके अलावा तुर्की के मंत्री हकान फिदान ने जिस तरीके से अपनी एक फोटो के जरिए इसराइल को चेतावनी देने की कोशिश की उससे यह साफ हो रहा है कि आने वाला युद्ध कहीं ना कहीं ड्रोन वारफेयर होगा। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ईरान की ड्रोन क्रांति की दुनिया अब मुरीद हो गई और टू ही ड्रोनों की दौड़ अब खतरनाक होती जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने फैसले से पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा कर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यासों के पैमानों में भारी कटौती करने का निर्देश दिया है।
ट्रंप ने इसके पीछे ना केवल भारी वित्तीय लागत को वजह बताया बल्कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने बेहतरीन व्यक्तिगत संबंधों का भी हवाला दिया। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप का ये दांव ऐसे समय में सामने आया जब अमेरिकी विदेश नीति इतिहास के सबसे जटिल कूटनीतिक संकट से गुजर रही है। वाशिंगटन इस समय एक तरफ उत्तर कोरिया और दूसरी तरफ ईरान के दोहरे मोर्चे पर उलझा हुआ है। दोनों ही मोर्चों पर ना तो युद्ध और ना ही शांति को लेकर कोई बातचीत फाइनल हो पा रही है और ना ही कोई ठोस समझौता धरातल पर उतरता हुआ दिखाई दे रहा है। ट्रंप के इस ताजा फैसले ने दक्षिण कोरिया की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।
Continue reading on the app
ऐसा शायद पहली बार हुआ है जब भारत के दो पक्के दोस्त एक ही समय पर भारत के तीसरे सहयोगी देश पर टूट पड़े हैं। रूस और इजराइल ने एक ही समय पर ब्रिटेन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बता दें कि ब्रिटेन ने यूक्रेन के लिए पुतिन को भड़का दिया और मुस्लिमों के लिए इजराइल से दुश्मनी कर ली। लेकिन अब रूस और इजराइल ने एक साथ ब्रिटेन पर हमला बोल दिया है। रूस ने एक तस्वीर दिखाकर ऐलान किया है कि ब्रिटेन का सर्वनाश कर दिया जाएगा। तो उसी वक्त नेतन्याहू ने ब्रिटेन को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन कह दिया है। आपको बता दें कि इस्लामिक देश और इस्लामिक रिपब्लिक देश होने में बहुत बड़ा अंतर है। दुनिया में सिर्फ तीन देश हैं जो इस्लामिक रिपब्लिक हैं। ऐसे में नेतन्याहू का ब्रिटेन को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन कहना बहुत बड़ी घटना है। दरअसल रूस ने एक तस्वीर जारी करते हुए कहा है कि यूक्रेन ने ब्रिटेन से ड्रोन लेकर हमारी जमीन पर हमला किया है। जिसकी कीमत ब्रिटेन को आने वाले समय में चुकानी पड़ेगी। यह ठीक वैसा ही है जैसे भारत पर हमला करने के लिए तुर्की ने पाकिस्तान को ड्रोन दिए थे। इस वक्त ब्रिटेन में जबरदस्त महंगाई है। अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर है। क्राइम रेट और कट्टरता बढ़ती जा रही है।
इसके बावजूद ब्रिटेन अभी तक रूस से लड़ने के लिए यूक्रेन को 3.8 बिलियन पाउंड्स दे चुका है। मगर अब पुतिन ने कहा है कि इसकी कीमत चुकाने का वक्त आ गया है। बहरहाल आपको बता दें कि ब्रिटेन इसी तरह की दिक्कतें इजराइल के लिए भी खड़ी कर रहा है। ब्रिटेन कभी इजराइल का पक्का दोस्त हुआ करता था। लेकिन पिछले कुछ सालों में ब्रिटेन में मुस्लिम आबादी और कट्टरता इतनी बढ़ गई है कि ब्रिटेन अब इजराइल को अपने दुश्मन की तरह देखने लगा है। ब्रिटेन में मुस्लिम अब इतना बड़ा वोट बैंक बन गए हैं कि ब्रिटेन के राजनैतिक दलों को मुस्लिम तुष्टीरण के लिए इजराइल और यहूदियों को गालियां देनी पड़ रही हैं। वैसे यही काम कई बार ब्रिटेन भारतीयों और हिंदुओं के खिलाफ भी करता है। यही कारण है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नितिन याहू ने ब्रिटेन को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन बोल दिया है। यह बयान सुनते ही ब्रिटेन के लोग अपनी सरकार को गालियां दे रहे हैं। इन अंग्रेजों का कहना है कि मुसलमानों को खुश करने के लिए हमारे ही देश ने हमारे मुंह पर कालिख पोत दी है।
यहां आपको एक दिलचस्प चीज बताते हैं। दुनिया में करीब 57 मुस्लिम देश हैं लेकिन उनमें से सिर्फ तीन ही इस्लामिक रिपब्लिक हैं। ये तीन देश हैं पाकिस्तान, मॉरिटानिया और ईरान। आपको बता दें कि इस्लामिक रिपब्लिक ऐसा देश होता है जहां धर्म के हिसाब से सरकार और कानून चलते हैं। जबकि इस्लामिक देश ऐसे देश होते हैं जहां ज्यादातर लोग मुस्लिम हो या देश की पहचान इस्लाम से जुड़ी हो। जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र। मगर अब तो इजराइल ने ब्रिटेन को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन बोल दिया है। यानी ब्रिटेन की तुलना पाकिस्तान से कर दी गई है। आपको बता दें कि मुस्लिम और इस्लाम ब्रिटेन पर हावी हो चुके हैं। पिछले 10 सालों में ब्रिटेन में मुस्लिम आबादी 43% से भी ज्यादा बढ़ी है। ब्रिटेन में कट्टरता इस कदर बढ़ गई है कि कुछ समय पहले संयुक्त अरब अमीरात जैसे मुस्लिम देश ने अपने छात्रों से कहा है कि ब्रिटिश यूनिवर्सिटीज में पढ़ने ना जाएं क्योंकि वहां पर कट्टरता सिखाई जाती है।
Continue reading on the app