BJP की नई टीम में Smriti Irani बनीं महासचिव, पीयूष गोयल को मिला कोषाध्यक्ष का पद
भाजपा ने पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व के तहत अपनी राष्ट्रीय टीम में सोमवार को व्यापक बदलाव करते हुए कई नये चेहरों को शामिल किया। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को महासचिव तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व पदाधिकारी राम माधव को उपाध्यक्ष बनाया गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा है कि उसने युवाओं और अनुभवी नेताओं के बीच सही संतुलन बनाए रखा है।
पार्टी ने राष्ट्रीय टीम में, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया सहित कुछ दिग्गज नेताओं को बनाए रखा है, जिनका नाम पार्टी के 13 उपाध्यक्षों में शामिल किया गया है। सोमवार को घोषित कुल 65 पदाधिकारियों में से 51 नये हैं। इनमें से छह की उम्र 40 साल से कम है, 15 लोग 40-49 साल के आयु वर्ग में हैं और 21 लोग 50-59 साल के आयु वर्ग में हैं।
पार्टी के अनुसार, पदाधिकारियों में 12 महिलाएं और अल्पसंख्यक समुदायों के छह नेता भी शामिल हैं। उन्होंने जोर दिया कि यह फेरबदल 2029 तक होने वाले विधानसभा चुनावों और अगले आम चुनावों के लिए भाजपा की तैयारियों को ध्यान में रखकर किया गया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि उनके पिता वेद प्रकाश गोयल, जो अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री थे, लंबे समय तक पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रहे थे। गोयल अकेले ऐसे केंद्रीय मंत्री हैं जिन्हें पार्टी की नयी टीम में शामिल किया गया है। भाजपा ने बी एल संतोष को राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के पद पर बनाए रखा है, जो पार्टी में एक महत्वपूर्ण पद है।
पार्टी ने अमित मालवीय को आईटी प्रकोष्ठ प्रमुख पद से हटाकर उनकी जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को नियुक्त किया है, जबकि गुजरात के हेमांग जोशी को लोकसभा सदस्य तेजस्वी सूर्या की जगह भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) का अध्यक्ष बनाया गया है। यह फेरबदल, 2015 में अमित शाह के पार्टी अध्यक्ष रहने के दौरान संगठन में किये गए बड़े बदलाव के एक दशक से भी अधिक समय बाद हुआ है। इस घटनाक्रम ने जल्द ही मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की अटकलों को फिर से हवा दे दी है।
कई नेताओं ने अपना राजनीतिक कद घटने के बाद अहम भूमिकाओं में वापसी की है। इनमें ईरानी और राम माधव भी शामिल हैं। ईरानी 2024 के लोकसभा चुनावों में अमेठी से हार गई थीं।
वहीं, राम माधव को सितंबर 2020 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा अपनी टीम बनाए जाने के समय राष्ट्रीय महासचिव के पद से हटा दिया गया था। पार्टी की ओर से जारी सूची के मुताबिक, उसने त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को भी अपने आठ राष्ट्रीय महासचिवों की टीम में शामिल किया है, जिनमें से छह नये हैं। नये उपाध्यक्षों में लोकसभा सदस्य डी. पुरंदेश्वरी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत शामिल हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों को बधाई दी और कहा कि नयी टीम में संगठनात्मक अनुभव, ऊर्जा एवं जमीनी स्तर से जुड़ाव का बेहतर मेल है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी नयी टीम को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि समर्पित कार्यकर्ता की भावना के साथ प्रत्येक सदस्य संगठन को और मजबूत करेगा तथा ‘विकसित भारत’ के संकल्प और राष्ट्र निर्माण की प्रतिबद्धता को नयी ऊंचाइयों तक ले जाएगा। महासचिव की सूची में शामिल नये चेहरों में भाजपा सांसद एवं पार्टी की राजस्थान इकाई के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया, लोकसभा सदस्य गजेंद्र पटेल, राज्यसभा सदस्य संजय भाटिया और पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी शामिल हैं।
द्विवेदी वर्तमान में, असम में पार्टी के राजनीतिक मामलों के प्रभारी हैं। विनोद तावड़े और सुनील बंसल ही ऐसे दो राष्ट्रीय महासचिव हैं जिन्हें भाजपा ने अपनी नयी टीम में बरकरार रखा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इन दोनों नेताओं को उनके शानदार संगठनात्मक काम के लिए इनाम दिया गया है।
सूत्रों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत में बंसल के योगदान को भी रेखांकित किया। भाजपा के राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ को संसद के उच्च सदन के सदस्य अरुण सिंह की जगह पार्टी के केंद्रीय मुख्यालय का प्रभारी बनाया गया है। नयी टीम में उपाध्यक्षों की संख्या 11 से बढ़ाकर 13 कर दी गई है, जिनमें से नौ नये हैं।
राष्ट्रीय महासचिवों की कुल संख्या भी पहले के सात से बढ़ाकर आठ कर दी गई है। भाजपा की नयी टीम में 16 राष्ट्रीय सचिव हैं। पिछली टीम में 11 राष्ट्रीय सचिव थे।
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के अलावा, बैजयंत जय पांडा, रेखा वर्मा और तारिक मंसूर को उपाध्यक्ष बनाया गया है। भाजपा प्रमुख ने पार्टी के सभी राष्ट्रीय मोर्चा अध्यक्षों को भी बदल दिया है। भाजपा प्रमुख ने गुजरात के हेमांग जोशी को पार्टी का युवा मोर्चा अध्यक्ष नियुक्त किया है, जिन्होंने पार्टी के लोकसभा सदस्य तेजस्वी सूर्या की जगह ली है।
छत्तीसगढ़ की रूप कुमारी चौधरी को वी श्रीनिवासन की जगह भाजपा की महिला मोर्चा अध्यक्ष बनाया गया। राज्यसभा सदस्य के. लक्ष्मण की जगह उत्तर प्रदेश से अमरपाल मौर्य को ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) मोर्चा का प्रमुख बनाया गया। पार्टी उपाध्यक्षों की नयी टीम में शामिल किये गए नये चेहरों में गुजरात से वी नरेंद्रभाई दोशी, महाराष्ट्र से भारती प्रवीण पवार, पंजाब से सरदार मनप्रीत सिंह बादल, मध्य प्रदेश से लाल सिंह आर्य, कर्नाटक से एम नागराजा और पश्चिम बंगाल से मधुचंद्र कर शामिल हैं।
भाजपा ने अलग-अलग राज्यों से 16 राष्ट्रीय सचिवों की अपनी टीम में कई नये चेहरों को शामिल किया है, जिनमें मध्य प्रदेश से कविता पाटीदार, केरल से के. सुरेंद्रन, दिल्ली से संदीप पाठक और पश्चिम बंगाल से मनोज तिग्गा शामिल हैं। भाजपा ने पार्टी सांसद अनिल बलूनी को अपना राष्ट्रीय मीडिया संयोजक बनाए रखा है और उन्हें सहयोग देने के लिए तीन नये मीडिया सह-संयोजक नियुक्त किए हैं, जिनमें आशीष उषा अग्रवाल, प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव शामिल हैं। पार्टी ने कहा कि देश के हर प्रमुख धर्म का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए, राष्ट्रीय मुख्यालय में एक सिख सदस्य, दो ईसाई सदस्य तथा मुस्लिम, जैन और पारसी समुदाय से एक-एक सदस्य को शामिल किया गया है।
पूर्व रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी के बेटे अनिल एंटनी को राष्ट्रीय सचिव के पद पर बरकरार रखा गया है। पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल को भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पार्टी ने कहा कि नयी नियुक्तियों से देश भर के 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों को प्रतिनिधित्व मिला है।
भाजपा ने एक बयान में कहा, ‘‘इस तरह की संतुलित नियुक्तियों से नये राष्ट्रीय अध्यक्ष (नितिन नवीन) की कार्यकारिणी को देश के विशाल भौगोलिक विस्तार और क्षेत्रीय बारीकियों की गहरी समझ के साथ काम करने में मदद मिलेगी।’’ पार्टी ने इस बात पर जोर दिया कि पूर्वोत्तर इलाके पर खास ध्यान दिया गया है। त्रिपुरा, असम और नगालैंड से तीन क्षेत्रीय नेताओं की नियुक्ति और संबित पात्रा की अध्यक्षता में पूर्वोत्तर समन्वय प्रकोष्ठ को जारी रखने के जरिए इस इलाके को खास अहमियत दी गई है। इसके अलावा, समिति में पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर से चार आदिवासी प्रतिनिधि शामिल हैं, जिनमें से दो महिलाएं हैं।
साथ ही, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश के तीन सदस्य अनुसूचित जातियों (एससी) का प्रतिनिधित्व करते हैं। संजय मयूख, जो पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक के तौर पर काम कर रहे थे, को नयी टीम में शामिल नहीं किया गया। भाजपा की नयी राष्ट्रीय टीम में महाराष्ट्र की प्रीति गांधी, दिल्ली के शिवानंद द्विवेदी, उत्तराखंड के आलोक भट्ट और हरियाणा के अरुण यादव को सोशल मीडिया सह-संयोजक बनाया गया है।
लोकसभा सदस्य संबित पात्रा को पार्टी का पूर्वोत्तर समन्वयक बनाए रखा गया और राजीव बब्बर को संयुक्त समन्वयक नियुक्त किया गया। मध्य प्रदेश के बंसीलाल गुर्जर को किसान मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। बिहार के शिवेश कुमार राम को एससी मोर्चा का प्रमुख नियुक्त किया गया।
उत्तर प्रदेश से कुंवर बासित अली को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया। राष्ट्रीय सचिवों में नये चेहरों में उत्तर प्रदेश से भोला सिंह, झारखंड से प्रदीप वर्मा, गुजरात से जगदीश ईश्वरभाई पटेल, नगालैंड से फांगनोन कोन्याक, उत्तर प्रदेश से संगीता यादव, तमिलनाडु से एम वेंकटेशन, बिहार से सिद्धार्थ शंभू, दिल्ली से स्वदेश सिंह, असम से एम देव बर्मन, गुजरात से रोहन गुप्ता और दिल्ली से जय प्रकाश शामिल हैं।
Allahabad High Court का फैसला: समय पूर्व रिहाई में मनमानी नहीं होगी, आदेश रद्द
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत समय पूर्व रिहाई देने की राज्यपाल की शक्ति एक संप्रभु कार्यकारी शक्ति है, लेकिन इसका मनमाने ढंग से प्रयोग नहीं किया जा सकता क्योंकि यह शक्ति लागू नियमों और सजा में छूट देने की नीति से नियंत्रित होती है। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत सात साल की सजा पाए एक दोषी को समय पूर्व रिहा करने से इनकार कर दिया गया था। अदालत ने पाया कि समय पूर्व रिहाई से इनकार करने का फैसला एक तथ्यात्मक त्रुटि के कारण था, क्योंकि अभिलेखों में याचिकाकर्ता द्वारा गुजारी गई कारावास अवधि गलत दर्ज की गई थी।
फतेहपुर के अपर सत्र न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता राम प्रताप सिंह को हत्या के प्रयास के एक मामले में 2002 में दोषी ठहराया था और सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। उस पर 2,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। उच्च न्यायालय में उसकी आपराधिक अपील 2019 में खारिज कर दी गई थी।
इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने भी उसकी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज कर दी थी। सितंबर 2022 में जेल अधिकारियों और फतेहपुर के जिलाधिकारी को उसकी समय पूर्व रिहाई का प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन उस पर कोई फैसला नहीं हुआ। इसके बाद याचिकाकर्ता ने फरवरी 2025 में आवेदन देकर अपने प्रस्ताव पर निर्णय लेने का अनुरोध किया।
उसने कहा था कि वह अपनी आधी से अधिक सजा काट चुका है। जेल रिपोर्ट के अनुसार, उसने बिना छूट के चार वर्ष, छह महीने और छह दिन तथा छूट सहित पांच वर्ष और चार महीने की सजा काटी थी। उसकी कुल सजा सात वर्ष थी और जेल में उसका आचरण संतोषजनक पाया गया था।
हालांकि, जून 2025 में उसे समय पूर्व रिहा करने से इस आधार पर इनकार कर दिया गया कि उसने बिना छूट के केवल दो वर्ष और छह दिन तथा छूट सहित दो वर्ष, एक महीने और 27 दिन की सजा काटी है। उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि इस निर्णय में जेल की रिपोर्ट को नजरअंदाज किया गया और याचिकाकर्ता द्वारा जेल में बिताई गई अवधि की गणना गलत तरीके से की गई। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित आदेश में याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी प्रतिकूल सामग्री का उल्लेख नहीं किया गया था।
अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश बंदी रिहाई, 1983 के नियम 4 के उपनियम (3) के तहत एक दोषी व्यक्ति बिना छूट के अपनी एक-तिहाई सजा काटने के बाद समय पूर्व रिहाई के लिए पात्र हो जाता है। अदालत ने पाया कि दोषी अपनी कुल सजा की आधी से अधिक अवधि पहले ही काट चुका था। अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल की शक्ति की प्रकृति पर अदालत ने कहा कि इसका मनमाने ढंग से प्रयोग नहीं किया जा सकता।
अदालत ने हालांकि कहा कि यदि कारावास की सही अवधि की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी गई होती, तो मामले में निष्कर्ष अलग हो सकता था। इसके मद्देनजर उच्च न्यायालय ने रिट याचिका स्वीकार कर ली और 26 जून 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें समय पूर्व रिहाई से इनकार किया गया था। अदालत ने 10 अगस्त 2026 को दिए अपने फैसले में समय पूर्व रिहाई के अनुरोध पर एक महीने के भीतर नए सिरे से निर्णय लेने के लिए मामला राज्यपाल के समक्ष भेज दिया।
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