शरद पवार से क्यों मिले एकनाथ शिंदे? केंद्रीय मंत्री अठावले ने बताई ये वजह
महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है. वजह है कि एनसीपी चीफ शरद पवार के भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो चुकी हैं. इस बात को बल तब मिला जब एकनाथ शिंदे गुरुवार को शरद पवार से मिले. हालांकि इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट की तरह देखा गया, मगर इससे राजनीतिक चर्चाओं को ताकत मिली है.
एनडीए में शामिल होने का प्रस्ताव
इस बीच केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के एक बयान ने माहौल और गर्मा दिया है. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि शरद पवार महाराष्ट्र के बड़े नेता हैं. कई बार पवार को एनडीए (NDA) में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया था. अगर वे 2014 में एनडीए में शामिल हो जाते तो वे देश के राष्ट्रपति भी बन जाते. अठावले ने कहा कि अब हालात बदले हैं. शरद पवार एनडीए में शामिल हो सकते हैं. इसलिए एकनाथ शिंदे उनसे मिलने पहुंचे थे. उनके बीच क्या बात हुई इसके बारे में पता नहीं है. अगर वे एनडीए में शामिल होते हैं तो उनका स्वागत है.
#WATCH | दिल्ली: केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, "मुझे लगता है कि शरद पवार महाराष्ट्र के बहुत बड़े नेता हैं। मैंने कई बार शरद पवार को NDA में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। अगर वे 2014 में NDA में शामिल हो जाते, तो देश के राष्ट्रपति भी बन सकते थे, लेकिन वे नहीं हुए... अब… pic.twitter.com/5KhKCjzGEG
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 10, 2026
कांग्रेस और एनसीपी के संग सरकार बनाई थी
वहीं संजय राउत की देशद्रोह वाली टिप्पणी पर अठावले ने कहा कि मुझे नहीं लगता की एकनाथ शिंदे को देशद्रोही कहना सही है. मुझे लगाता है कि संजय राउत और उद्धव ठाकरे ने जनादेश का उल्लंघन किया है. 2019 में उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और एनसीपी के संग सरकार बनाई थी. इसके परिणाम उन्हें भुगतने पड़े.
सियासत गरमा गई थी
आपको बता दें कि बुधवार को डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और शरद पवार की मुलाकात के बाद सियासत गरमा गई थी. इस पर संजय राउत ने कहा था कि शरद पवार बेशक एक बड़े नेता हैं, मगर एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार और राजनीतिक विश्वासघातक की संस्कृति को बढ़ावा दिया. हमें अपने विचार व्यक्त करने में किसी झिझक नहीं है. राउत ने कहा था कि हम ऐसी बैठक से सहमत नहीं है. अगर किसी को लगता है कि यह उचित था, तो यह उनकी मर्जी है. हालांकि, हमारा मानना है कि ऐसे कार्यों से राष्ट्रवादि कांग्रेस पार्टी की विश्वसनीयता कमजोर होगी.
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