भाजपा की नई टीम में 65 मेंबर, इनमें 51 नए:कुल 12 महिलाएं; अगले साल चुनाव वाले यूपी से 8, उत्तराखंड-गुजरात से 4-4 नाम
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नई टीम का ऐलान कर दिया है। इसमें 65 सदस्य हैं। इनमें से 12, यानी 18% महिला सदस्य हैं। 14 सदस्यों को दोबारा जिम्मेदारी दी गई है, जबकि 51 नए सदस्य हैं। 73 साल की वसुंधरा राजे सबसे सीनियर हैं। जबकि 35 साल डॉक्टर हेमांग जोशी सबसे युवा है। अगले साल चुनाव वाले उत्तर प्रदेश से 8, उत्तराखंड से 4, गुजरात से 4 और पंजाब से 2, यानी कुल 18 चेहरे नई टीम में शामिल हैं। नितिन की "नवीन टीम" के बारे में रोचक जानकारी 5 ग्राफिक्स में पढ़िए.. 2027 के विधानसभा चुनाव वाले राज्यों से 18 चेहरे भाजपा की नई टीम में 2027 में विधानसभा चुनाव वाले 7 राज्यों में से 4 राज्यों को प्रतिनिधित्व मिला है। उत्तर प्रदेश से 8, उत्तराखंड से 4, गुजरात से 4 और पंजाब से 2, यानी कुल 18 चेहरे नई टीम में शामिल हैं। वहीं गोवा, मणिपुर और हिमाचल प्रदेश से कोई नाम नहीं है। 65 सदस्यों में केवल 12 महिलाएं भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में कई महिला नेताओं को अहम संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय महासचिव, सचिव और मोर्चा व सोशल मीडिया से जुड़े पद शामिल हैं। 65 में से सिर्फ 14 पुराने चेहरे नई टीम में 14 पुराने चेहरों को दोबारा जगह मिली है, जबकि 51 नए चेहरे शामिल किए गए हैं। यानी 65 सदस्यों वाली टीम में करीब 78.5% नए चेहरे हैं। इससे साफ है कि संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव किया गया है, हालांकि कुछ अनुभवी नेताओं को भी बरकरार रखा गया है। सभी मोर्चों के अध्यक्ष हटे, कुल 29 चेहरे ड्रॉप पिछली टीम के 29 चेहरों को नई राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिली है। इनमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे प्रमुख संगठनात्मक पदों पर रहे नेता भी शामिल हैं। इसके अलावा मोर्चा, कार्यालय और मीडिया से जुड़े कुछ पुराने पदाधिकारियों को भी नई टीम में जगह नहीं दी गई। वसुंधरा सबसे उम्रदराज, हेमांग सबसे युवा भाजपा की नई 65 सदस्यीय टीम में सबसे उम्रदराज चेहरा वसुंधरा राजे हैं, जिनकी उम्र 17 अगस्त 2026 को 73 साल है। वहीं सबसे युवा चेहरा डॉ. हेमांग जोशी हैं, जिनकी उम्र 35 साल है। यानी नई टीम में सबसे ज्यादा उम्र और सबसे कम उम्र के चेहरों के बीच 38 साल का अंतर है। हालांकि सभी 65 नेताओ की उम्र की अभी पूरी डिटेल सामने नहीं आई है। ------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… भाजपा IT सेल के इंचार्ज अमित मालवीय हटाए गए:नितिन नवीन की नई टीम में राम माधव–स्मृति ईरानी की वापसी; बीएल संतोष संगठन महामंत्री बने रहेंगे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने पद संभालने के 209 दिन बाद सोमवार को 65 सदस्यों की कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया। राम माधव को उपाध्यक्ष और स्मृति ईरानी को महासचिव बनाकर वापस लाया गया है। पूरी खबर पढ़ें…
326 सांसदों, 14 राज्यों के CM पर आपराधिक केस:सुप्रीम कोर्ट में पेश रिपोर्ट: लोकसभा के 251 और राज्यसभा के 75 सदस्यों पर मामले
सुप्रीम कोर्ट में राजनीति के अपराधीकरण पर पेश रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा के 543 में से 251 सदस्यों पर आपराधिक मामले हैं। राज्यसभा के 233 में से 75 सदस्यों के खिलाफ भी मामले दर्ज हैं। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एफिडेविट के मुताबिक, सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4 हजार से ज्यादा आपराधिक मामले लंबित हैं। 28 राज्यों में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जिनमें गंभीर मामले भी शामिल हैं। यह एफिडेविट वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने दाखिल किया है। वे सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों का जल्द निपटारा कराने की मांग वाली जनहित याचिका में कोर्ट की मदद कर रहे हैं। तेलंगाना CM पर 89 मामले एफिडेविट मे बताया गया कि तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी पर 89 केस हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल के CM सुवेंदु अधिकारी पर 29 और कर्नाटक के CM डीके शिवकुमार पर 19 मामले हैं। हंसारिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट मामलों की निगरानी कर रहे हैं, ताकि सुनवाई जल्द पूरी हो। इसके बावजूद 2018 से सांसदों और विधायकों के खिलाफ पेंडिंग केस की संख्या लगभग उसी स्तर पर बनी हुई है। हाईकोर्ट से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में 1,243 आपराधिक मामलों का फैसला हुआ। इसी साल 1,050 नए मामले दर्ज किए गए। पूर्व और मौजूदा सांसदों-विधायकों के खिलाफ कुल 4,192 मामले पेंडिंग हैं। लोकसभा के 170 मामले गंभीर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट का हवाला देते हुए एफिडेविट में कहा गया है, “लोकसभा में 543 सदस्यों में से 251 पर आपराधिक मामले हैं। इनमें 170 मामले गंभीर हैं, जिनमें 5 साल या उससे ज्यादा की सजा हो सकती है।” एफिडेविट में कहा गया है, “राज्यसभा में 233 में से 75 यानी 33% सदस्यों पर आपराधिक मामले हैं। इनमें 40 यानी 18% मामले गंभीर हैं, जिनमें 5 साल या उससे ज्यादा की सजा हो सकती है।” वरिष्ठ वकील ने उत्तर प्रदेश को छोड़कर विभिन्न हाईकोर्ट की ओर से दाखिल रिपोर्ट का विश्लेषण भी कोर्ट में पेश किया। इलाहाबाद हाईकोर्ट से रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण उत्तर प्रदेश का आंकड़ा इसमें शामिल नहीं किया गया। केरलम के 95% सांसदों पर केस सेन्हा कलिता के जरिए दाखिल हलफनामे के मुताबिक, केरलम के 20 में से 19 सांसद यानी 95% सांसदों पर आपराधिक आरोप हैं। इनमें 11 सांसद गंभीर मामलों का सामना कर रहे हैं। तेलंगाना के 17 में से 14 सांसदों यानी 82% पर आपराधिक मामले हैं। ओडिशा में 21 में से 16 सांसद यानी 76%, झारखंड में 14 में से 10 यानी 71% और तमिलनाडु में 39 में से 26 यानी 67% सांसदों पर मामले हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे अन्य बड़े राज्यों के करीब 50% सांसदों पर आपराधिक मामले हैं। हरियाणा के 10 सांसदों में से एक और छत्तीसगढ़ के 11 सांसदों में से एक पर आपराधिक आरोप हैं। पंजाब में 13 में से 2, असम में 14 में से 3, दिल्ली में 7 में से 3, राजस्थान में 25 में से 4, गुजरात में 25 में से 5 और मध्य प्रदेश में 29 में से 9 सांसदों पर आपराधिक मामले हैं। विशेष अदालतों में सिर्फ सांसद-विधायकों के केस चलाने की मांग विजय हंसारिया ने कहा कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुप्रीम कोर्ट से निगरानी जरूरी है, ताकि इनका जल्द निपटारा हो सके। उन्होंने मांग की कि सांसद-विधायकों के लिए बनाई गई विशेष अदालतें सिर्फ उन्हीं के मामलों की सुनवाई करें। उन्होंने कहा कि इन मामलों की सुनवाई पूरी होने के बाद ही विशेष अदालतों में दूसरे मामलों की सुनवाई शुरू की जाए। अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर कोर्ट की कार्रवाई हंसारिया सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों का जल्द निपटारा कराने के लिए अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर जनहित याचिका में कोर्ट की मदद कर रहे हैं। 9 नवंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ 5 हजार से ज्यादा आपराधिक मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए हाईकोर्ट को विशेष बेंच बनाने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालतों से ऐसे मामलों में सुनवाई टालने से भी मना किया था। कोर्ट ने कहा था कि सुनवाई सिर्फ “दुर्लभ और मजबूर करने वाली वजहों” से ही टाली जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट, जिला जजों और सांसदों-विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालतों को कई निर्देश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामलों को प्राथमिकता दी जाए।
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