वैश्विक अनिश्चितता के बीच कीमती धातुओं में तेजी, सोने-चांदी में 1 प्रतिशत तक की बढ़त
Gold Price Today: पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच भारतीय कमोडिटी बाजार में सोमवार के सत्र में कीमती धातुओं में तेजी देखने को मिली. इस बीच, पीले धातु (सोने) और सफेद धातु (चांदी) की कीमतों में 1 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई. शुरुआती कारोबार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना पिछले बंद 1,54,506 रुपए से 1,649 रुपए यानी 1.06 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,56,155 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला, जो कि दिन का हाई रहा.
आज कितने बढ़े सोने-चांदी के दाम?
खबर लिखे जाने तक गोल्ड 0.40 प्रतिशत यानी 614 रुपए की तेजी के साथ 1,55,120 रुपए पर ट्रेड करते नजर आया. हालांकि मौजूदा कीमतें अभी भी इस वर्ष के रिकॉर्ड उच्च स्तर 1,80,779 रुपए प्रति 10 ग्राम से काफी नीचे हैं.
वहीं, चांदी की कीमतों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई. सितंबर डिलीवरी वाला सिल्वर अपने पिछले बंद 2,35,924 रुपए 1,576 रुपए यानी 0.66 प्रतिशत की उछाल के साथ 2,37,500 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुला, और दिन के कारोबार में यह 1.08 प्रतिशत यानी 2,555 रुपए की तेजी के साथ 2,38,479 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ. चांदी का वार्षिक रिकॉर्ड उच्च स्तर 4,20,048 रुपए प्रति किलोग्राम रहा है, जिससे मौजूदा भाव अभी काफी कम है.
विश्लेषकों ने सोने और चांदी की कीमतों के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखा है, साथ ही हालिया बढ़त के बाद अस्थिरता और स्थिरीकरण की संभावना पर भी जोर दिया है. इन कारण से सोने और चांदी की कीमतों पर नजर बनी हुई है.
पिछले सप्ताह एमसीएक्स पर भी बढ़ी थी कीमतें
पिछले सप्ताह, एमसीएक्स पर सोने के वायदा भाव में लगभग 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि चांदी में 1.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, कॉमेक्स पर सोने में लगभग 1 प्रतिशत और चांदी में 2.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई. सोने की इस वृद्धि को सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की कम उम्मीदों से बल मिला, क्योंकि गैर-कृषि रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे और मुद्रास्फीति स्थिर रही.
क्यों बढ़ रहे सोने-चांदी के दाम?
मध्य पूर्व और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग ने भी सोने को समर्थन दिया. व्यापारी वैश्विक आर्थिक संकेतकों और फेडरल रिजर्व की बैठक के कार्यवृत्त पर भी नजर रख रहे थे, ताकि मौद्रिक नीति से संबंधित और संकेत मिल सकें.
मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं में मांग बनी हुई है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं जारी रहेंगी, तब तक सोने को मजबूत समर्थन मिलता रह सकता है.
स्रोत- आईएएनएस
पुराने वाहनों के लिए ई20 के साथ फिर से ई10 पेट्रोल उपलब्ध कराने की जरूरत: सीईए नागेश्वरन
नई दिल्ली, 17 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने देश के पुराने वाहन बेड़े, विशेषकर पुराने दोपहिया वाहनों को ध्यान में रखते हुए ई20 पेट्रोल के साथ ई10 पेट्रोल को वापस लाने का प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि इससे पुराने वाहनों के इंजन की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर लोगों की चिंताएं भी कम होंगी।
द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक लेख में नागेश्वरन ने कहा कि ई20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन को व्यापक नुकसान पहुंचने की आशंकाओं का समर्थन उपलब्ध वैज्ञानिक और परीक्षण संबंधी प्रमाण नहीं करते। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर ई20 को लेकर कई दावे किए गए हैं, लेकिन वास्तविक आंकड़े उनसे काफी अलग हैं।
नागेश्वरन के अनुसार, एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में लगभग दो-तिहाई ऊर्जा सामग्री होती है। इस कारण ई20 पेट्रोल के उपयोग से ईंधन दक्षता पर कुछ असर पड़ता है, लेकिन यह प्रभाव लगभग 7 प्रतिशत तक सीमित है, न कि उतना अधिक जितना कई मंचों पर दावा किया जाता है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका और भारत में किए गए परीक्षणों में यह नहीं पाया गया कि ई20 के लिए प्रमाणित नहीं किए गए वाहनों में इंजन घिसाव या यांत्रिक क्षति में कोई उल्लेखनीय वृद्धि हुई हो।
हालांकि, उन्होंने एक वास्तविक चिंता की ओर ध्यान आकर्षित किया। उनके अनुसार, भारत में करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन अभी भी चलन में हैं, जिन्हें बीएस-IV मानकों से पहले बनाया गया था और जिनमें कार्ब्यूरेटर तकनीक का उपयोग होता है।
नागेश्वरन ने कहा कि कार्ब्यूरेटर अतिरिक्त ऑक्सीजन वाली एथेनॉल मिश्रित ईंधन संरचना के अनुसार खुद को समायोजित नहीं कर पाता। परिणामस्वरूप ई20 का उपयोग करने पर इंजन को आवश्यक अनुपात में ईंधन नहीं मिल पाता और वह अपेक्षाकृत अधिक गर्म होकर चल सकता है। इसके अलावा पुराने वाहनों में लगे कुछ रबर सील और पुर्जे एथेनॉल के लंबे संपर्क में आने पर प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार के मूल एथेनॉल मिश्रण रोडमैप में यह अनुमान लगाया गया था कि पुराने वाहनों के लिए कम मिश्रण वाला ईंधन उपलब्ध रखा जाएगा। लेकिन समय के साथ यह विकल्प अधिकांश पेट्रोल पंपों से लगभग समाप्त हो गया।
अपने लेख में नागेश्वरन ने लिखा, पेट्रोल पंपों पर ई20 के साथ ई10 पेट्रोल का विकल्प दोबारा उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे लोगों की चिंताएं कम होंगी, पुराने वाहन बेड़े को सुरक्षा मिलेगी और रेट्रोफिटिंग कार्यक्रम को लागू करने के लिए पर्याप्त समय भी मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल भारत को ई20 स्तर पर ही स्थिर रहना चाहिए और उससे आगे एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से पहले विस्तृत लागत-लाभ विश्लेषण किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इस मूल्यांकन में खाद्यान्न बनाम ईंधन बहस, जल उपयोग, मूल्य निर्धारण और खाद्य तेल नीति से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया जाना चाहिए।
--आईएएनएस
डीबीपी
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