पुराने वाहनों के लिए ई20 के साथ फिर से ई10 पेट्रोल उपलब्ध कराने की जरूरत: सीईए नागेश्वरन
नई दिल्ली, 17 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने देश के पुराने वाहन बेड़े, विशेषकर पुराने दोपहिया वाहनों को ध्यान में रखते हुए ई20 पेट्रोल के साथ ई10 पेट्रोल को वापस लाने का प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि इससे पुराने वाहनों के इंजन की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर लोगों की चिंताएं भी कम होंगी।
द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक लेख में नागेश्वरन ने कहा कि ई20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन को व्यापक नुकसान पहुंचने की आशंकाओं का समर्थन उपलब्ध वैज्ञानिक और परीक्षण संबंधी प्रमाण नहीं करते। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर ई20 को लेकर कई दावे किए गए हैं, लेकिन वास्तविक आंकड़े उनसे काफी अलग हैं।
नागेश्वरन के अनुसार, एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में लगभग दो-तिहाई ऊर्जा सामग्री होती है। इस कारण ई20 पेट्रोल के उपयोग से ईंधन दक्षता पर कुछ असर पड़ता है, लेकिन यह प्रभाव लगभग 7 प्रतिशत तक सीमित है, न कि उतना अधिक जितना कई मंचों पर दावा किया जाता है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका और भारत में किए गए परीक्षणों में यह नहीं पाया गया कि ई20 के लिए प्रमाणित नहीं किए गए वाहनों में इंजन घिसाव या यांत्रिक क्षति में कोई उल्लेखनीय वृद्धि हुई हो।
हालांकि, उन्होंने एक वास्तविक चिंता की ओर ध्यान आकर्षित किया। उनके अनुसार, भारत में करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन अभी भी चलन में हैं, जिन्हें बीएस-IV मानकों से पहले बनाया गया था और जिनमें कार्ब्यूरेटर तकनीक का उपयोग होता है।
नागेश्वरन ने कहा कि कार्ब्यूरेटर अतिरिक्त ऑक्सीजन वाली एथेनॉल मिश्रित ईंधन संरचना के अनुसार खुद को समायोजित नहीं कर पाता। परिणामस्वरूप ई20 का उपयोग करने पर इंजन को आवश्यक अनुपात में ईंधन नहीं मिल पाता और वह अपेक्षाकृत अधिक गर्म होकर चल सकता है। इसके अलावा पुराने वाहनों में लगे कुछ रबर सील और पुर्जे एथेनॉल के लंबे संपर्क में आने पर प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार के मूल एथेनॉल मिश्रण रोडमैप में यह अनुमान लगाया गया था कि पुराने वाहनों के लिए कम मिश्रण वाला ईंधन उपलब्ध रखा जाएगा। लेकिन समय के साथ यह विकल्प अधिकांश पेट्रोल पंपों से लगभग समाप्त हो गया।
अपने लेख में नागेश्वरन ने लिखा, पेट्रोल पंपों पर ई20 के साथ ई10 पेट्रोल का विकल्प दोबारा उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे लोगों की चिंताएं कम होंगी, पुराने वाहन बेड़े को सुरक्षा मिलेगी और रेट्रोफिटिंग कार्यक्रम को लागू करने के लिए पर्याप्त समय भी मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल भारत को ई20 स्तर पर ही स्थिर रहना चाहिए और उससे आगे एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से पहले विस्तृत लागत-लाभ विश्लेषण किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इस मूल्यांकन में खाद्यान्न बनाम ईंधन बहस, जल उपयोग, मूल्य निर्धारण और खाद्य तेल नीति से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया जाना चाहिए।
--आईएएनएस
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Jharkhand: रांची सदर अस्पताल होगा हाईटेक, 3 महीने में शुरू होंगी कैथ लैब, PET-CT और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी मिलेंगी बड़ी सुविधाएं
Jharkhand: रांची सदर अस्पताल को आने वाले महीनों में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस करने की तैयारी तेज हो गई है. अस्पताल में अगले तीन महीने के भीतर कैथ लैब और पीईटी-सीटी स्कैन की सुविधा शुरू करने का लक्ष्य है. वहीं, छह महीने में बोन मैरो स्टेम सेल प्रत्यारोपण इकाई शुरू करने की योजना है. इसके अलावा अस्पताल को झारखंड के बड़े डिजिटल स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा.
तीन महीने में कैथ लैब और पीईटी-सीटी
सदर अस्पताल में कैथ लैब और पीईटी-सीटी स्कैन की सुविधा शुरू करने की तैयारी चल रही है. सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद के अनुसार, पीईटी-सीटी के लिए जनवरी में सरकारी ई-निविदा जारी की गई थी. इसे पीपीपी मॉडल के तहत शुरू किया जाएगा. राज्य के 2026-27 के बजट में कैंसर उपचार के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. पीईटी-सीटी से कैंसर की जांच और बीमारी की स्थिति का पता लगाने में मदद मिलेगी. वहीं, कैथ लैब शुरू होने से हृदय रोगियों की जांच और इलाज में सुविधा होगी. इससे मरीजों को दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत कम हो सकती है.
छह महीने में बोन मैरो ट्रांसप्लांट
सदर अस्पताल में बोन मैरो स्टेम सेल प्रत्यारोपण इकाई स्थापित करने के लिए सरकार ने 13.45 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी है. इसका उद्देश्य थैलेसीमिया और अन्य गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को राज्य में ही बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है. हालांकि, इस सुविधा को सुचारु रूप से चलाने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारियों, आधुनिक प्रयोगशाला और संक्रमण नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं जरूरी होंगी.
डिजिटल स्वास्थ्य का बनेगा केंद्र
सदर अस्पताल को राज्य स्तरीय टेली-एसएनसीयू और ई-संजीवनी हब के रूप में विकसित करने की भी तैयारी है. इससे जिला और ग्रामीण अस्पतालों को सदर अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों से ऑनलाइन जोड़ा जाएगा. गंभीर नवजात मरीजों के इलाज में स्थानीय डॉक्टर विशेषज्ञों से तुरंत सलाह ले सकेंगे. ई-संजीवनी के जरिए दूरदराज के मरीजों को भी विशेषज्ञों से ऑनलाइन परामर्श मिल सकेगा. इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि मरीज को रांची रेफर करना जरूरी है या स्थानीय स्तर पर इलाज जारी रखा जा सकता है.
पहले से मौजूद हैं कई सुविधाएं
सदर अस्पताल में टेली-रेडियोलॉजी और टेली-आईसीयू जैसी डिजिटल सेवाएं पहले से उपलब्ध हैं. यहां 128-स्लाइस सीटी स्कैन, एमआरआई, डिजिटल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, कलर डॉप्लर, डायलिसिस, ईसीजी और टीएमटी की सुविधा भी है. नई सुविधाओं की सफलता के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर और प्रशिक्षित स्टाफ जरूरी होगा. यदि सभी योजनाएं समय पर शुरू होती हैं, तो सदर अस्पताल रांची के साथ पूरे झारखंड की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है.
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