Responsive Scrollable Menu

हॉकी विश्व कप में इंग्लैंड से क्यों हार गई भारत की टीम? हेड कोच ने बताई हार की वजह

भारत के मुख्य कोच क्रेग फुल्टोन ने सोमवार को कहा कि इंग्लैंड के खिलाफ पुरुष हॉकी विश्व कप के दूसरे पूल मैच के तीसरे क्वार्टर में टीम की रक्षात्मक चूक भारी पड़ी जिसके कारण उसे 2-4 से हार का सामना करना पड़ा।

Continue reading on the app

IPO Review: मजबूत ग्रोथ के बावजूद Lalithaa Jewellery Mart में ये बड़ा रिस्क, निवेश से पहले जान लें पूरी बात

Lalithaa Jewellery Mart IPO Review: साउथ इंडिया की बड़ी ज्वेलरी रिटेलर कंपनी ललिता ज्वेलरी मार्ट सोना, चांदी और हीरे के गहने बेचती है. कंपनी 51 शहरों में 61 स्टोर चलाती है. इसके IPO की वैल्यू ₹1,700 करोड़ तक है, जिसमें ₹1200 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹500 करोड़ का ऑफर फॉर सेल शामिल है. शेयर ₹190 से ₹201 के प्राइस बैंड में ऑफर किए जा रहे हैं. प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹11,250 करोड़ है. इस IPO की एक दिलचस्प बात है. यह कंपनी हर स्टोर से बहुत ज्यादा बिक्री करती है. फिर भी लिस्टेड दूसरी ज्वेलरी कंपनियों की तुलना में इसकी वैल्यूएशन (P/E रेशियो) काफी कम है. सवाल यह है कि क्या यह डिस्काउंट कोई मौका है या किसी असली जोखिम का संकेत, इस रिव्यू में, हम कंपनी के बिजनेस, इंडस्ट्री के मौकों, फाइनेंशियल हेल्थ, रिस्क और वैल्यूएशन को समझने की कोशिश करेंगे. 

Lalithaa Jewellery Mart IPO GMP

ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) एक अनौपचारिक आंकड़ा है. यह बाजार की मांग पर आधारित होता है और इसमें तेजी से उतार-चढ़ाव हो सकता है. यह न तो लिस्टिंग से होने वाले मुनाफे की गारंटी देता है और न ही IPO की सही कीमत बताता है. निवेश का फैसला लेने से पहले सिर्फ GMP पर निर्भर रहने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स, वैल्यूएशन, फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और जोखिमों पर विचार करना चाहिए. 

यह भी पढ़ें- Gold Price Today: रक्षा बंधन से पहले सस्ता हुआ सोना, चांदी की कीमतों में आई 2500  रुपये की गिरावट

Lalithaa Jewellery Mart कमाई कैसे करती है?

कंपनी का बिजनेस मॉडल सीधा-सादा है. यह ज्वेलरी या तो खरीदती है या खुद बनाती है. उसे अपने शोरूम में रखती है और सीधे ग्राहकों को बेचती है. इसके प्रोडक्ट्स में सोने, चांदी और हीरे की ज्वेलरी के साथ-साथ चांदी के चम्मच और बर्तन जैसी चीजें भी शामिल हैं. इसकी खास बात यह है कि कंपनी अपने 79% से ज्यादा प्रोडक्ट खुद बनाती है और इसके लिए तमिलनाडु की 2 फैक्टरियों में कारीगर काम करते हैं. इससे कंपनी का डिजाइन, प्रोडक्शन और वेस्ट मैनेजमेंट पर बेहद कंट्रोल रहता है और बाहरी मैन्युफैक्चर्स पर निर्भरता भी कम होती है. यह इसलिए जरूरी है क्योंकि ज्वेलरी की कीमत सिर्फ सोने की लागत से तय नहीं होती. कस्टमर्स को मेकिंग चार्ज में देना पड़ता है. अपनी ज्यादातर ज्वेलरी खुद बनाकर और बर्बादी को कम करके, कंपनी इन लागतों को कम रख पाती है, जिससे उसकी वैल्यू फोकस्ड पहचान और मजबूत होती है. 

कंपनी ग्राहकों के लिए सेविंग स्कीम भी चलाती है. 'धना वंदनम' जैसी योजनाओं के तहत, ग्राहक 11 महीनों तक हर महीने पैसे जमा करते हैं और बाद में जमा हुई रकम से गहने खरीदते हैं. 31 मार्च 2026 तक, 4.73 लाख से ज्यादा ग्राहक इस योजना में शामिल हो चुके थे, जिससे कुल ₹5,042.75 करोड़ का एडवांस डिपॉजिट जमा हुआ. इससे ग्राहकों का एक बड़ा समूह तैयार होता है, जिनके भविष्य में खरीदारी के लिए स्टोर पर वापस आने की संभावना होती है. कंपनी का कारोबार पहले से ही बड़ा है. FY26 में कंपनी ने 25,023.93 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कमाया. इसमें अकेले गोल्ड ज्वेलरी का हिस्सा 92.33% रहा. कंपनी के 61 स्टोर्स में से 58 लीज पर हैं, यानी प्रॉपर्टी के मामले में यह मॉडल हल्का है.

इंडस्ट्री की ग्रोथ में कहां खड़ी है Lalithaa?

RHP के अनुसार, FY26 में भारत के जेम्स और ज्वैलरी रिटेल मार्केट की वैल्यू लगभग ₹12.89 करोड़ थी. FY22 में इसमें सालाना 20.7% की दर से बढ़ोतरी हुई है. इस सेक्टर में साउथ इंडिया की अहम भूमिका है. क्योंकि देश की कुल ज्वैलरी डिमांड का लगभग 40% यहीं से आता है. 

कई वजहें ऑर्गेनाइज्ड ज्वैलरी रिटेलर्स को बढ़ावा दे रही हैं. जैसे बढ़ती इनकम, शहरीकरण, शादियां और त्योहारों के कारण डिमांड बनी रहती है. इसके अलावा, GST, PAN और हॉलमार्किंग जैसे नियमों की वजह से लोकल ज्वैलर्स के मुकाबले ऑर्गेनाइज्ड मार्केट ज्यादा आकर्षक बनता जा रहा है. 

RHP के अनुसार, साउथ इंडिया में ऑर्गेनाइज्ड ज्वेलरी मार्केट का हिस्सा FY26 में 54-59% से बढ़कर FY30 तक 58-63% होने का अनुमान है. यह बड़ी चेन के लिए एक बड़ा मौका है. 

हालांकि इंडस्ट्री के बढ़ने का मतलब यह नहीं कि ललिता (Lalithaa) भी उसी रफ्तार से बढ़ेगी. असल में, साउथ इंडिया में कंपनी का मार्केट शेयर FY24 में 6.46% से घटकर FY26 में 4.97% हो गया. इसके सभी 61 स्टोर दक्षिण भारत में हैं और अकेले तमिलनाडु से ही FY26 में इसके रेवेन्यू का 53.98% हिस्सा आया. 

यानी यह एक बड़ा मौका है. लेकिन कंपनी को अभी यह साबित करना बाकी है कि वह सिर्फ इंडस्ट्री की ग्रोथ पर निर्भर रहने के बजाय अपना मार्केट शेयर बढ़ा सकती है. नए शहरों में विस्तार करने की योजनाएं मददगार हो सकती हैं, लेकिन ऑनलाइन बिक्री न होना और सोने पर बहुत ज्यादा निर्भरता अभी भी बड़ी कमियां हैं. 

Lalithaa Jewellery Mart की ताकत क्या है?

कंपनी की सबसे बड़ी ताकत इसके प्रोडक्टिव स्टोर्स हैं. FY26 में हर स्टोर ने ₹410.23 करोड़ का रेवेन्यू कमाया. यह आंकड़ा कल्याण ज्वेलर्स या सेंको गोल्ड के मुकाबले काफी ज्यादा है. इसका मतलब है कि कंपनी को अच्छी-खासी कमाई करने के लिए बहुत सारे स्टोर खोलने की जरूरत नहीं है. इसके बड़े साइज के स्टोर में एक ही जगह पर कई तरह की ज्वैलरी मिलती है. जैसे विजयवाड़ा शोरूम का कारपेट एरिया एक लाख स्क्वायर फीट है. निवेशकों के लिए यह बात इस तरह से फायदेमंद साबित है कि इससे पता चलता है कि कंपनी सैकड़ों नए स्टोर खोले बिना भी मजबूत रेवेन्यू कमाना जारी रख सकती है. 

दूसरी बड़ी ताकत है ज्वेलरी बनाने की लागत पर कंट्रोल. 79% से ज्यादा प्रोडक्ट कंपनी खुद बनाती है. इससे प्रोडक्शन वेस्ट को अच्छे से मैनेज किया जा सकता है. इसके साथ ही, कंपनी की प्राइसिंग स्ट्रैटेजी वैल्यू पर आधारित है. यानी कि कंपनी खुद को प्रीमियम के बजाय एक किफायती विकल्प के तौर पर पेश करती है. TIER-2 और TIER-3 सिटीज पर फोकस करने से कंपनी उन ग्राहकों तक भी पहुंत पाती है जो लोकल ज्वेलर्स से हटकर ऑर्गेनाइज्ड ब्रांड्स की ओर जा रहे हैं. इसके 61 स्टोर्स में से 45 इन्हीं शहरों में हैं, जो FY26 के रेवेन्यू में 60.25% का योगदान देते हैं. 

एक और बड़ी खूबी है इसकी मजबूत कैपिटल एफिशिएंसी, जिसे कस्टमर एडवांसेज से बढ़ावा मिलता है. FY26 में, ROE 41.60% और ROCE 42.60% रहा. ये आंकड़े लिस्टेड कॉम्पिटिटर्स की तुलना में काफी ज्यादा हैं. इसमें कस्टमर सेविंग्स स्कीम अहम भूमिका निभाती हैं. FY26 में, कंपनी ने एडवांसेज के तौर पर ₹5042.75 करोड़ जुटाए, जो उसकी सालाना आय का लगभग 5वां हिस्सा है. ये फंड भविष्य में बिना ब्याज के ज्वेलरी खरीदने के लिए प्रभावी ढंग से फाइनेंसिंग का काम करते हैं. यही वजह है कि बड़ी इन्वेंट्री की जरूरत के बावजूद नेट डेट-टू-EBITDA रेशियो सिर्फ 0.73x रहा. 

यह भी पढ़ें- वैश्विक तनावों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से शेयर बाजार पर दबाव; 24,250 के नीचे फिसला निफ्टी

कंपनी की कमजोरियां क्यां हैं?

सबसे बड़ी कमजोरी एक ही इलाके में कारोबार का सिमटा होना है. कंपनी के सभी स्टोर साउथ इंडिया में हैं और अकेले तमिलनाडु से ही उसकी आधी से ज्यादा कमाई होती है. इसका मतलब है कि अगर उस इलाके में मंदी आती है या ग्राहकों की पसंद बदलती है, तो कंपनी पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है. इसलिए, भौगोलिक रूप से कारोबार का विस्तार न सिर्फ तरक्की का मौका है, बल्कि जोखिम कम करने के लिए भी जरूरी है. जब तक ऐसा नहीं होता, निवेशकों को यह समझना चाहिए कि अच्छी-खासी कमाई के बावजूद, यह अभी भी एक क्षेत्रीय कारोबार ही है.

दूसरी कमजोरी सोना और इन्वेंट्री से जुड़ा रिस्क है. सोने के गहनों से कंपनी को 92% से ज्यादा रेवेन्यू मिलता है. फिर भी कंपनी सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव नहीं करती है. FY26 में इन्वेंट्री बढ़कर ₹9,816.28 करोड़ हो गई. इन्वेंट्री डेज FY24 में 93 से बढ़कर FY26 में 143 हो गए, जिसका मतलब है कि बिना बिके स्टॉक में ज्यादा समय तक कैपिटल फंसी रहती है. नतीजतन, FY26 में ऑपरेटिंग कैश फ्लो निगेटिव होकर ₹397.76 करोड़ हो गया. इसका मतलब यह नहीं है कि स्टोर्स खराब परफॉर्म कर रहे हैं. यह दबाव मुख्य रूप से ज्यादा इन्वेंट्री लेवल और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों के कारण है. 

वैल्यूएशन बनाम पीयर्स: क्या Lalithaa सस्ती है?

₹201 प्रति शेयर के भाव पर, कंपनी का मार्केट कैप ₹11,250 करोड़ है. इसका मतलब है कि FY26 की कमाई के आधार पर P/E रेश्यो 11.14 गुना है, जो लिस्टेड साथियों के लगभग 29.69 गुना के औसत P/E से काफी कम है. सेल्स को देखने पर यह अंतर और भी साफ दिखता है. कंपनी का P/S रेशियो लगभग 0.45 गुना है, जबकि कल्याण ज्वैलर्स के लिए यह 1.76 गुना, सेंको गोल्ड के लिए 0.66 गुना, थंगामयिल के लिए 1.99 गुना और टाइटन के लिए 5.14 गुना है. सिर्फ मनोज वैभव ही कम मल्टीपल पर ट्रेड करता है खासकर, 0.28 गुना पर.

पहली नजर में यह IPO सस्ता लगता है. लेकिन वैल्यूएशन को कारोबार की गुणवत्ता के साथ देखना जरूरी है. कंपनी का ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन 6.69% है, जो Kalyan के 6.85% के लगभग बराबर है, लेकिन Senco के 11.49 फीसदी से कम है. यानी कंपनी को कम वैल्यूएशन सिर्फ इसलिए नहीं मिल रहा कि उसका हर मेट्रिक बेहतर है. जहां Lalithaa सबसे अलग दिखती है, वह है स्टोर प्रोडक्टिविटी. इसका प्रति स्टोर 410.23 करोड़ रुपये का रेवेन्यू, Kalyan और Senco से कई गुना ज्यादा है. कंपनी का ROE भी 41.60% रहा, जो बताए गए पीयर्स से ऊपर है. सीधे शब्दों में कहें तो कंपनी लगाई गई पूंजी के मुकाबले काफी ज्यादा सेल्स और मुनाफा कमा रही है.

यह भी पढ़ें- कंपनी के कितने शेयर बाजार में हैं उपलब्ध? Free Float Market Cap से समझें

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए दी गई है और इसे निवेश की सलाह नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी निवेश फैसले से पहले कृपया अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें.

Continue reading on the app

  Sports

हॉकी विश्व कप में इंग्लैंड से क्यों हार गई भारत की टीम? हेड कोच ने बताई हार की वजह

भारत के मुख्य कोच क्रेग फुल्टोन ने सोमवार को कहा कि इंग्लैंड के खिलाफ पुरुष हॉकी विश्व कप के दूसरे पूल मैच के तीसरे क्वार्टर में टीम की रक्षात्मक चूक भारी पड़ी जिसके कारण उसे 2-4 से हार का सामना करना पड़ा। Tue, 18 Aug 2026 12:41:31 +0530

  Videos
See all

Lucknow News: पहले पुलिस पर हमला, अब हमलावरों पर एक्शन | Lucknow | UP Police | Illegal Dairy #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-18T07:45:30+00:00

सुकमा की पुनर्वासित महिलाओं के रैंप वॉक पर सियासत | Congress | BJP | Chhattisgarh News #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-18T07:44:01+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers