बीड़ी और खदान श्रमिकों के बच्चों के लिए काम की खबर, छात्रवृत्ति के लिए 31 अक्टूबर तक करें आवेदन, जानें पूरी डिटेल्स
बीड़ी और खनन क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के बच्चों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए दी जाने वाली छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पात्र विद्यार्थी 31 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने मध्य प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को पात्र छात्रों तक योजना की जानकारी पहुंचाने तथा समय-सीमा में आवेदन एवं सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं।
उच्च शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए छात्रवृत्ति आवेदन राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) पर एक जून से प्रारंभ हो चुके हैं। पात्र विद्यार्थी 31 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। विभाग ने महाविद्यालयों से अधिकाधिक पात्र विद्यार्थियों को योजना से जोड़ने और उनके आवेदनों का समयबद्ध सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा है। शिक्षण संस्थान द्वारा सत्यापित नहीं किए गए आवेदनों पर विचार नहीं किया जायेगा। सभी विद्यार्थी इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आवेदन के बाद अपने विद्यालय/महाविद्यालय में संपर्क स्थापित कर अपने आवेदन को स्कॉलरशिप पोर्टल (https://scholarships.gov.in) के माध्यम से ही सत्यापित करवाना सुनिश्चित करें।
योजना के तहत कितनी मिलती है छात्रवृत्ति
- योजना के अंतर्गत कक्षा 1 से लेकर व्यावसायिक पाठ्यक्रमों तक अध्ययनरत छात्रों को प्रतिवर्ष 1,000 रुपये से 25,000 रुपये तक की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।
- कक्षा 1 से चौथी तक के छात्रों को 1,000 रुपये, कक्षा 5 से 8 तक 1,500 रुपये, कक्षा 9 एवं 10 के छात्रों को 2,000 रुपये, कक्षा 11 एवं 12 के छात्रों को 3,000 रुपये दी जाती है।
- आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं डिग्री पाठ्यक्रमों के छात्रों को 6,000 रुपये की सहायता दी जाती है। वहीं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्रों को 25,000 रुपये प्रतिवर्ष तक की छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाती है।
- यह सहायता राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से हस्तांतरित की जाती है।
बता दें कि भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत बीड़ी एवं खदान श्रमिकों के अध्ययनरत संतानों को स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। योजना का लाभ बीड़ी श्रमिकों, लौह अयस्क, मैंगनीज एवं क्रोम अयस्क खदान श्रमिकों, चूना पत्थर एवं डोलोमाइट खदान श्रमिकों के पात्र बच्चों को दिया जाता है।
विवादों में घिरी अजय देवगन की ‘चौहान’, क्षत्रिय समाज ने जताई आपत्ति, कहा- राजपूत इतिहास राजनीतिक चारा नहीं
बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन की फिल्म चौहान इन दिनों काफी चर्चा में बनी हुई है। एक्शन से भरपूर इस फिल्म का टीजर कुछ दिनों पहले ही रिलीज हुआ है। टीजर सामने आने के बाद फिल्म एक नए विवाद फंस गई है। दरअसल, क्षत्रिय परिषद ने फिल्म में दिखाई गई चीजों की आलोचना की है।
क्षत्रिय परिषद की ओर से फिल्म में राजपूत इतिहास के हथियार के तौर पर इस्तेमाल और राजपूत पहचान को हड़पने की कोशिशें की आलोचना की गई है। संगठन का यह कहना है कि यह कोशिश चुनावी या फिर वैचारिक मकसद से की जा रही है। चलिए लेते हैं कि पूरा मामला क्या है।
क्षत्रिय परिषद का क्या कहना
क्षत्रिय परिषद ने सांप्रदायिक राजनीति के लिए चौहान वंश के नाम का इस्तेमाल करने की कोशिशें की कड़ी निंदा की है। परिषद ने कहा कि चौहान एक ऐतिहासिक राजपूत वंश है। जिसकी विरासत इतिहास से जुड़ी है ना कि किसी पक्षपाती अभियान या मीडिया द्वारा खड़े किए गए विवाद से। संगठन द्वारा सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया गया है जिसमें इसे बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि राजपूत पहचान को एक बार फिर राजनीतिक नैरेटिव में घिसा जा रहा है। एक ऐसा नैरेटिव जिससे राजपूत ने ना तो शुरू किया है और ना ही इसकी मांग की है।
We strongly condemn the attempt by Neeraj Yadav and Ajay Devgn’s upcoming film Chauhaan to appropriate the Chauhan clan name for contemporary communal politics.
Rajput history is not a political prop. The legacy of the Chauhans belongs to Rajput history , not to electoral… pic.twitter.com/nDRRKoikv4
— Kshatriya Parishad (@kshatriya_org) June 29, 2026
संगठन ने जताई नाराजगी
संगठन ने कहा कि जब मुख्य धारा की मीडिया पर सार्वजनिक चर्चाओं में राजपूतों की आवाज को कम प्रतिनिधित्व मिल रहा है तो सिर्फ जाति और सांप्रदायिक भावनाओं को उकसाने, आक्रोश भड़काने और राजनीतिक तमाशा खड़ा करने के लिए किसी कबीले के नाम का इस्तेमाल करना अपमानजनक और गैर जिम्मेदाराना हरकत है।
बताई राजपूतों की गाथा
संगठन की ओर से राजपूत की गाथा का उल्लेख भी किया गया। वह उदाहरण दिए गए जब अफगान और राजपूतों ने एक साथ मिलकर लड़ाई लड़ी थी। संगठन ने कहा कि इतिहास की यह घटनाएं बताती है कि मध्यकालीन राजनीतिक गठबंधन राज्य संचालित वफादारी और सैन्य रणनीति से तय होते थे। उन्होंने वैचारिक मकसद से राजपूत इतिहास को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने की हर कोशिश को खारिज किया। ये अपील की गई की भारत के अतीत को जिम्मेदारी से देखते हुए ऐतिहासिक जटिलताओं का सम्मान करें ना कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक बहस के लिए चारे के तौर पर करें।
किन चीजों पर विवाद
बता दें कि फिल्म के टीजर में कुछ ऐसे डायलॉग और इशारे थे जिन्हें आपत्तिजनक बताया जा रहा है। अजय के डायलॉग पठानों से कह दो चौहान आ रहा है का भी जबरदस्त विरोध किया गया। कश्मीर विवाद दिखाये जाने के दौरान पैलेट गन से बहुत कम नुकसान होता वाली बात की भी निंदा की गई। जियो स्टूडियो और कलर येलो प्रोडक्शन के बैनर तले बनी ये फिल्म 1 अक्टूबर 2027 को रिलीज की जाएगी।




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