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Venezuela संकट में भारत का 'ऑपरेशन अमिस्ताद'! मलबे के बीच भारतीय सेना ने शुरू किया 24 घंटे मुफ्त अस्पताल, 1450 से ज्यादा की मौत

सदी के सबसे विनाशकारी भूकंप से जूझ रहे वेनेजुएला की मदद के लिए भारत सरकार ने संकटमोचक की भूमिका निभाई है। 'ऑपरेशन अमिस्ताद' (Operation Amistad) के तहत भारतीय सेना का एक अत्याधुनिक फील्ड अस्पताल वेनेजुएला में पूरी तरह सक्रिय हो गया है। अधिकारियों द्वारा सोमवार को दी गई जानकारी के अनुसार, यह अस्पताल प्रभावित लोगों को 24 घंटे सातों दिन (24/7) पूरी तरह से मुफ्त आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहा है।

वेनेजुएला में भारतीय दूतावास ने बताया कि बहुत अनुभवी चिकित्सकों वाली एक भारतीय मेडिकल टीम ने कराकस के इंटरनेशनल ला रिंकोनाडा रेसट्रैक पर एक शिविर लगाया है।

सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया है, ‘‘चिकित्सा शिविर अब पूरी तरह से चालू है। यहां 24 घंटे सेवाएं उपलब्ध हैं और सभी सेवाएं मुफ्त हैं।’’ दूतावास ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि इस मुश्किल घड़ी में भारत वेनेजुएला के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। बुधवार शाम को आया 7.2 और 7.5 तीव्रता का भूकंप वेनेजुएला में एक सदी से भी अधिक समय में आये सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक था और इसके झटके पूरे इलाके में महसूस किये गए।

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वेनेज़ुएला में आए भूकंप से मरने वालों की संख्या रविवार को बढ़कर 1,450 हो गई। साथ ही, हजारों लोग घायल हैं और कई लोग लापता बताये जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी कहा कि वेनेज़ुएला में ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ चलाया जा रहा है। जायसवाल ने कहा कि भारतीय सेना के चिकित्सक लोगों का उपचार कर रहे हैं।

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उन्होंने यह भी बताया कि वेनेजुएला के स्वास्थ्य उप-मंत्री ने इस अस्पताल का दौरा किया है। भारतीय वायुसेना ने रविवार को बताया कि जबरदस्त भूकंप के बाद वेनेजुएला को मानवीय सहायता देने के लिए भारत ने ऑपरेशन अमिस्ताद शुरू किया। इसके तहत वायुसेना के दो सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों से 66 टन राहत सामग्री पहुंचाई गई। इसमें भारतीय सेना का एक अस्थायी अस्पताल, 35 टन से अधिक राहत सामग्री, दवाइयां, मेडिकल उपकरण आदि शामिल हैं।

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India-US Relations | लेटरहेड का नाम बदलने के पीछे क्या है अमेरिका की चाल? इंडो-पैसिफिक विवाद पर अमेरिकी राजदूत ने खोला राज

अमेरिकी सैन्य कमान के नाम से 'इंडो' शब्द हटाए जाने को लेकर हाल ही में उपजे विवाद पर भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस विवाद को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि "लेटरहेड पर लिखा नाम" महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह देखना जरूरी है कि अमेरिका वास्तव में जमीन पर क्या कर रहा है। सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित 'यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट' को संबोधित करते हुए राजदूत गोर ने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के रणनीतिक और सैन्य संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं।

गोर की यह टिप्पणी ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ से ‘इंडो’ शब्द हटाए जाने को लेकर पैदा हुए विवाद के बीच आई है। वर्ष 1947 में स्थापित अमेरिकी पैसिफिक कमांड अमेरिका की सबसे पुरानी एकीकृत सैन्य कमानों में से एक है, जिसका क्षेत्र अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान भारत के बढ़ते रणनीतिक महत्व को देखते हुए पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ किया गया था। हालांकि, इसी महीने अमेरिका ने इस एकीकृत कमान का पुराना नाम फिर से बहाल कर दिया।

गोर ने कहा, ‘‘मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं, क्योंकि कई लोगों ने नाम बदलने के मुद्दे को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लेटरहेड पर क्या नाम लिखा है। असली बात यह है कि अमेरिका वास्तव में क्या कर रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हां, नाम बदला है, लेकिन हम अब भी वहीं हैं। भारत आज भी अमेरिका के साथ किसी भी अन्य देश की तुलना में कहीं अधिक संयुक्त सैन्य अभ्यास करता है। हर महीने कुछ न कुछ गतिविधि होती रहती है, चाहे भारतीय सैनिक अमेरिका आएं या अमेरिकी सैनिक इस क्षेत्र में जाएं।’’

अमेरिकी राजदूत ने बताया कि अगले दो सप्ताह में भारतीय नौसेना का एक प्रतिनिधिमंडल अमेरिका की यात्रा करेगा। गोर ने इस धारणा को भी खारिज किया कि भारत-अमेरिका संबंध कमजोर हुए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते आज भी मजबूत आधार पर खड़े हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग सोशल मीडिया पर बैठकर यह कहते हैं कि यह संबंध संकट में है, उन्हें तथ्यों को देखना चाहिए। चाहे व्यापार हो, रक्षा सहयोग हो या लोगों के बीच संबंध, हर क्षेत्र में भारत-अमेरिका संबंध मजबूत स्थिति में हैं।’’ गोर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ संबंधों को अत्यधिक महत्व देते हैं और व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा तथा निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

अमेरिकी राजदूत ने एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि कुछ महीने पहले ट्रंप मियामी में आयोजित ‘अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप’ (यूएफसी) मुकाबला देखने गए थे। गोर ने कहा, ‘‘कुछ महीने पहले मैं राष्ट्रपति के साथ मियामी में यूएफसी कार्यक्रम में था। हम मंच के पीछे बैठे थे, तभी उन्होंने मुझसे कहा, ‘चलो प्रधानमंत्री (मोदी) को फोन करते हैं’।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने राष्ट्रपति से कहा, ‘सर, भारत में अभी सुबह के छह बजे हैं।’ इस पर उन्होंने कहा, ‘‘वह (मोदी) जाग गए होंगे। वह मेरी तरह हैं।’’

गोर ने बताया कि जब तक उन्होंने नयी दिल्ली में कुछ अधिकारियों से संपर्क किया, तब तक ट्रंप यूएफसी के मंच पर पहुंच चुके थे और अंततः प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत अगले दिन के लिए तय की गई। उन्होंने कहा कि यह घटना ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच रिश्तों को दर्शाती है। गोर ने कहा, ‘‘इस घटना का सबसे बड़ा संदेश यह है कि जब आप किसी के मित्र होते हैं, तो हर बात पहले से तय करने की आवश्यकता नहीं होती। राष्ट्रपति (ट्रंप) वास्तव में प्रधानमंत्री (मोदी) को अपना मित्र मानते हैं।’’ उन्होंने कहा कि ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के संबंध उनके पहले कार्यकाल से ही चले आ रहे हैं तथा ट्रंप के मन में भारत की बेहद सुखद यादें हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारे लिए एक बड़ा लाभ है। अमेरिका भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहता है।’’ गोर ने कहा कि आने वाले दो वर्ष भारत-अमेरिका संबंधों की आगामी कई दशकों की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘ये अगले दो वर्ष आने वाले कई दशकों के लिए इस संबंध की दिशा निर्धारित करेंगे। इसलिए यहां मौजूद सभी लोगों को इसे दीर्घकालिक परियोजना के रूप में देखना चाहिए। यह केवल एक या दो साल का प्रयास नहीं है, बल्कि आज जो हम बोएंगे, वही आने वाले दशकों तक हमारे संबंधों को मजबूत बनाए रखेगा।

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