Rajasthan SET 2026: राजस्थान एसईटी के लिए आवेदन शुरू, 15 जुलाई तक करें अप्लाई, जानें पूरी प्रक्रिया
Rajasthan SET 2026: राजस्थान में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों के लिए अच्छी खबर है। यूनिवर्सिटी ऑफ कोटा ने राजस्थान स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट (Rajasthan SET) 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि 15 जुलाई 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
राजस्थान SET 2026 राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए पात्रता निर्धारित करने वाली महत्वपूर्ण परीक्षा है। इस परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थी उच्च शिक्षा संस्थानों में अध्यापन के अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
आवेदन के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से संबंधित विषय में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर डिग्री होना आवश्यक है। वहीं ओबीसी, एससी, एसटी और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार अंकों में छूट प्रदान की गई है और उनके लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं।
आवेदन शुल्क की बात करें तो सामान्य वर्ग एवं राजस्थान के बाहर के अभ्यर्थियों के लिए 1500 रुपये फीस तय की गई है। ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 1200 रुपये तथा एससी, एसटी और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों को 750 रुपये आवेदन शुल्क का भुगतान करना होगा।
उम्मीदवार घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद मांगी गई व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी दर्ज करें, आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें और निर्धारित आवेदन शुल्क जमा करें। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भविष्य के लिए आवेदन पत्र का प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।
राजस्थान SET 2026 परीक्षा का आयोजन 6 सितंबर 2026 को राज्य के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर किया जाएगा। परीक्षा से कुछ दिन पहले अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे, जिन्हें आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकेगा। ऐसे में उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें और परीक्षा की तैयारी में जुट जाएं।
टेलीग्राम बैन पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त: केंद्र से पूछा- क्या लाखों लोगों के अधिकारों को रोकना सही है?
Telegram ban In India: दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार, 18 जून को केंद्र सरकार के उस आदेश पर सुनवाई की, जिसमें नीट-यूजी 2026 परीक्षा के दौरान टेलीग्राम की सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाने का निर्णय लिया गया था। जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने इस मामले में सुनवाई पूरी कर ली है और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
कोर्ट ने केंद्र से सख्त लहजे में पूछा कि क्या केवल एक समूह की परीक्षा को लेकर 15 करोड़ से ज्यादा भारतीय उपयोगकर्ताओं के अधिकारों को प्रभावित करना उचित है?
क्या था केंद्र का तर्क?
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि टेलीग्राम की तकनीकी बनावट कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए चुनौती पैदा करती है। सरकार का तर्क है कि टेलीग्राम के बॉट्स और गुमनाम अकाउंट्स के जरिए अवैध सामग्री का प्रसार बहुत तेजी से होता है, जिसे रोकना कठिन है।
केंद्र ने साफ किया कि यह प्रतिबंध केवल अस्थायी है और इसका उद्देश्य नीट परीक्षा की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
टेलीग्राम का पलटवार: 'फैसला बिना सोचे-समझे लिया गया'
टेलीग्राम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता ने दलील दी कि सरकार का यह कदम अनुपातिक नहीं है। उन्होंने कहा कि प्लेटफार्म ने पहले ही कथित नीट-संबंधित अवैध सामग्री के सैकड़ों लिंक्स हटा दिए हैं और एआई तकनीक का इस्तेमाल कर लगातार निगरानी की जा रही है।
टेलीग्राम का दावा है कि सरकार ने पर्याप्त सामग्री का विश्लेषण किए बिना और बिना ठोस आधार के 'आपातकालीन शक्तियों' का इस्तेमाल किया है, जो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के खिलाफ है।
न्यायालय ने 'मध्यस्थ' के तौर पर जिम्मेदारी पर सवाल उठाए
कोर्ट ने टेलीग्राम से उसकी जवाबदेही पर भी कड़े सवाल पूछे। बेंच ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 79 के तहत एक मध्यस्थ होने के नाते टेलीग्राम की अपनी जिम्मेदारी है। कोर्ट ने पूछा कि यदि मंच पर तेजी से गलत सामग्री फैलती है, तो उसे तुरंत रोकने के लिए प्लेटफार्म के पास क्या वास्तविक तंत्र (Real-time surveillance) है?
कोर्ट ने इस चिंता को खारिज कर दिया कि टेलीग्राम का यह दावा कि 'पेपर लीक' की खबरें वास्तविक नहीं हैं, पर्याप्त नहीं है क्योंकि समस्या तो 'पेपर' की मौजूदगी है।
सीईओ पावेल डुरोव की नाराजगी
इस पूरे विवाद के बीच टेलीग्राम के सीईओ पावेल डुरोव ने भी भारत में लगे इस प्रतिबंध की आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा कि इस कदम से उन आम उपयोगकर्ताओं को नुकसान हो रहा है जो शैक्षिक कार्यों के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। उनका दावा है कि प्रतिबंध के बाद भी लीक सामग्री नहीं रुकी, बल्कि वह दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर चली गई है।
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