भारत-US Trade Deal पर दिल्ली में बड़ा मंथन, Piyush Goyal के सामने Tariff की नई चुनौती
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने मंगलवार को यहां द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण से जुड़े मुद्दों पर बातचीत शुरू की। एक अधिकारी ने बताया कि ग्रीर व्यापार समझौते पर चर्चा के लिए आधिकारिक यात्रा पर नयी दिल्ली में हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और भारत के मुख्य वार्ताकार एवं वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन इस बैठक में शामिल हैं। यह बैठक वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुख्यालय वाणिज्य भवन में जारी है। बैठक इस महीने की शुरुआत में (दो से चार जून) राष्ट्रीय राजधानी में हुए मुख्य वार्ताकार स्तर की चर्चाओं के बाद हो रही है।
राजेश अग्रवाल ने 15 जून को कहा था कि दोनों मंत्रियों के बीच बातचीत मुख्य रूप से समझौते के ढांचे को अंतिम रूप देने पर केंद्रित रहने की उम्मीद है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 17 जून को कहा था कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के ‘‘बेहद करीब’’ हैं। इससे पहले पांच जून को पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत और अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दोनों पक्ष अगले महीने के मध्य तक बीटीए के पहले चरण को लागू कर सकते हैं। दोनों पक्षों ने फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण की रूपरेखा तय की थी। यह रूपरेखा अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क पर आधारित थी। हालांकि, 20 फरवरी को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए इन व्यापक शुल्कों को निरस्त कर दिया।
इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी को व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत सभी देशों पर 150 दिन के लिए 10 प्रतिशत शुल्क लगाया, जो इस वर्ष 24 जुलाई को समाप्त होगा। अमेरिकी शुल्क व्यवस्था में हुए इन बदलावों के कारण दोनों पक्षों के बीच यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत और अमेरिका ने 13 फरवरी 2025 को औपचारिक रूप से बीटीए वार्ता शुरू की थी। सात फरवरी 2026 को दोनों पक्षों ने पारस्परिक एवं लाभकारी अंतरिम समझौते के लिए एक ढांचा तैयार करने की घोषणा की थी। इस ढांचे के तहत अमेरिका ने भारत पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई थी।
रूस से तेल खरीदने को लेकर लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क को भी हटाया गया था और शेष 25 प्रतिशत को समझौते के तहत 18 प्रतिशत तक कम किया जाना था। हालांकि, अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने इन शुल्कों को निरस्त कर दिया। ढांचे के तहत भारत ने सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कई खाद्य एवं कृषि उत्पादों जैसे डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स (डीडीजी), लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन व स्पिरिट्स पर शुल्क समाप्त या कम करने का प्रस्ताव रखा।
भारत ने अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान तथा उनके कलपुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोल खरीदने की मंशा भी जताई है। अमेरिका में शुल्क ढांचे में बदलाव के बाद दोनों पक्ष समझौते की रूपरेखा पर पुनर्विचार कर रहे हैं। फरवरी के संयुक्त बयान में यह प्रावधान भी है कि यदि किसी देश के शुल्क में बदलाव होता है, तो दूसरा देश भी अपनी प्रतिबद्धताओं में संशोधन कर सकता है। इस बीच, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने 11 और 12 मार्च को धारा 301 के तहत लगभग 60 देशों के खिलाफ जांच शुरू की जिनमें भारत भी शामिल है। पहले चरण के समझौते की रूपरेखा तय होने के समय भारत को आसियान देशों (इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, फिलीपीन, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार, कंबोडिया), श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों पर बढ़त हासिल थी।
अमेरिका ने तब भारतीय वस्तुओं पर 18 प्रतिशत शुल्क तय किया था, जबकि प्रतिस्पर्धी देशों पर यह 19-20 प्रतिशत था। हालांकि अब सभी देशों पर समान रूप से 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लागू है। ऐसे में यह महत्वपूर्ण हो गया है कि भारत इस व्यापार समझौते में शुल्क के मोर्चे पर अपने प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बढ़त हासिल करे। अमेरिका 2025-26 में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। गत वित्त वर्ष में भारत का अमेरिका को निर्यात 0.92 प्रतिशत बढ़कर 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 15.95 प्रतिशत बढ़कर 52.9 अरब डॉलर हो गया। व्यापार अधिशेष घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया, जो 2024-25 में 40.89 अरब डॉलर था।
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