पाकिस्तान के अशांत प्रांत यानी कि बलूचिस्तान से एक बड़ी और विवादास्पद खबर सामने आई है। बलोच अधिकारियों की मुखर आवाज और बलचिस्तान की शेरनी के नाम से चर्चित एक्टिविस्ट मेहरंग बलोच को एंटी टेररिज्म कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुना दी है। यह फैसला जुलाई 2024 में ग्वादर में आयोजित बलोच सभा और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक सुरक्षा अधिकारियों की मौत से जुड़े मामले सामने आए। अदालत ने बलूच कमेटी बीवाईसी के नेता सिगुतुल्लाह शाह को भी दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। हालांकि इस फैसले ने पाकिस्तान ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और बलूच समुदाय के बीच भी तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। अब बीवाईसी और मेहरंग के समर्थकों का यह आरोप है कि यह मुकदमा राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित था और इसका मकसद बलूच आंदोलन को कुचलना है। संगठन का यह कहना है कि अदालत ने कमजोर और संदिग्ध सबूतों के आधार पर यह फैसला दिया है और दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इसे कानून के शासन और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई का हिस्सा बता रही है।
महरंग बलोच पिछले कुछ वर्षों से बलस्तान में कथित जबरन गायब किए गए लोगों को लेकर मानवाधिकार उल्लंघनों और संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकार की मांग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी हैं और यह कारण है कि उनकी गिरफ्तारी और अब उम्र कैद की सजा को बलोच राजनीति में एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञ यह मानते हैं कि यह मामला सिर्फ एक एक्टिविस्ट की सजा का नहीं है बल्कि उस बलूचिस्तान का है जिस पर दुनिया की बड़ी शक्तियों की नजर इस वक्त टिकी हुई है। प्राकृतिक गैस, तांबा, सोना, रेयर अर्थ, मिनरल्स और अरब सागर से जुड़ी रणनीतिक स्थिति के कारण बलूचिस्तान पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और भू राजनीति का एक केंद्र बन चुका है। और ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सीपेक और ग्वादर पोर्ट प्रोजेक्ट के जरिए यहां अरबों डॉलर का निवेश कर चुका है। और ऐसे में माना यह जा रहा है कि इससे यानी कि जो कदम सरकार की ओर से उठाया गया इससे हालात बहुत ज्यादा खराब होने की संभावना है।
बलस्तान पाकिस्तान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
सबसे पहले बात करते हैं पाकिस्तान के कुल भूभाग की तो लगभग 44% हिस्सा बलस्तान में इसका है और ऐसे में अरब सागर से जुड़ा सबसे रणनीतिक प्रांत और ग्वादर पोर्ट पाकिस्तान का भविष्य का व्यापारिक हब रहा है। बता दें कि ईरान और अफगानिस्तान से अंतरराष्ट्रीय जो सीमाएं हैं जो यहां का पूरा एरिया है वो लगता है और ऐसे में चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी कि सेपेक का ये सबसे बड़ा केंद्र रहा है और दूसरी तरफ ऊर्जा और खनिज संसाधनों का ये सबसे बड़ा भंडार रहा है और यही वजह है कि बार-बार यहां पर अपने इस्तेमालों के लिए पाकिस्तान कई बार ऐसे कदम उठा लेता है जिसे लेकर कई सवाल पाकिस्तान की नीति को लेकर उठते रहे हैं। पाकिस्तान की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था का रणनीति आधार रहा है और इसलिए बता दें कि पाकिस्तान की नजर उस हिस्से पर रहती है और देखिए 44% हिस्सा बलिस्तान में लगता है और यहां पर जो नेचुरल खनिज है यह बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है जिसे लेकर अलग-अलग तरीके से पाकिस्तान यहां पर कदम उठाते रहता है और वहां पर लोगों पर जुल्म ढा रहा है।
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अब कुल 70 हजार से अधिक लोग पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। लोग कितने ज्यादा भड़के हुए हैं पाकिस्तान की सरकार पर। क्योंकि पाकिस्तान की सरकार जिस तरीके से पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर के अंदर अपना राज कायम रखने के लिए आम लोगों पर जुल्म सितम कर रही है। उसको लेकर आखिरकार लोगों ने फुल एंड फाइनल मूड बना लिया है जहां पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के अंदर आम आवाम का यह फूटता हुआ गुस्सा साफ तौर पर नजर आ रहा है। हर कश्मीरी का गुस्सा प्रदर्शन में दिख रहा है, वो एक दिन, दो दिन, तीन दिन, चार दिन नहीं बताया जा रहा है कि करीब-करीब 14 दिन से यही कमोबेश हालत है पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर के अंदर जहां पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। और हालात ऐसे हैं साथियों जहां लोग खुलेआम यह कह रहे हैं कि अब जो हक है वह लेकर रहेंगे। चाहे इसके लिए उन्हें जान क्यों ना देनी पड़ जाए।
इस आंदोलन में बच्चे, इस आंदोलन में बूढ़े, इस आंदोलन में जवान हर कोई शामिल है। क्योंकि हर किसी की मांग है बड़ी संख्या में शामिल होकर कि अब पाकिस्तान से उन्हें आजादी चाहिए और पाकिस्तान के खिलाफ वो लगातार नारेबाजी कर रहे हैं। पाकिस्तान के कब्जे का विरोध जिस तरीके से रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में बीते 11 दिनों से दिख रहा है। जहां 70ज़ से अधिक प्रदर्शनकारी जुटे हुए हैं। उससे पता चलता है कि हालात सामान्य नहीं है। और यह मुनीर जो पूरी दुनिया में घूम के ढिंढोरा पीट रहा है अपने मीडिएशन का। यह जो शहबाज शरीफ है जो कह रहा है कि वह दुनिया में शांति लाने के लिए काम कर रहा है वो उसके अपने ऑक्यूपेशन के अंदर उसके कब्जाए हुए जमीन पर विद्रोह की आग जल रही है और हालात ऐसे हैं कि इस वक्त अगर उस भीड़ के सामने मुनीर चला जाए तो मुझे नहीं पता कि वह भीड़ क्या करेगी। इंटेलिजेंस सूत्र कहते हैं कि कई कस्बों और गांवों में भी नए विरोध प्रदर्शन। इसके बाद शुरू हो गई इन तस्वीरों के बाद और बताया जाता है कि सुधनोती जिले के तरार खेल में करीब 10 12 साल के स्कूली बच्चे सार्वजनिक चौराहे पर भी इकट्ठा हुए आजादी के नारे लगाए। मढोल इलाके में सैकड़ों महिलाओं ने मार्च निकाला। महिलाओं ने पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ जमकर नारे लगाए। इसके साथ ही इलाके के में जो कब्जे और अधिकारों की कमी का विरोध हो रहा है। रावलकोट के मुख्य प्रदर्शन स्थल पर कई स्कूली बच्चे तख्तियां लेकर पहुंचे। इन तख्तियों पर लिखा था कि पाकिस्तानी सेना बाहर आ गई है।
पाकिस्तानी सेना कश्मीरियों को मार रही है। कश्मीर पर पाकिस्तानी हमला हो रहा है। हमें बुनियादी अधिकार चाहिए। हमें मुफ्त शिक्षा चाहिए। आंदोलन में बच्चे की भागीदारी की सबसे अहम तस्वीरों में से एक माना जा रहा है। क्योंकि यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा चिंता का कारण है कि भाई बच्चों तक को आवाज उठानी पड़ रही है पाकिस्तान के इस ऑक्यूपेशन की। इससे जो संकेत मिल रहा है वो ये कि पीओके में राजनीतिक दबाव, आर्थिक परेशानियां, सेना का जो एक तरीके से दमनकारी नीति है युवा पीढ़ी के अंदर इससे बड़ी नाराजगी है, गुस्सा है, आग बबूला है और इसीलिए यह आंदोलन की जो शक्ल है वो भड़कती जा रही है और इस आंदोलन के प्रमुख आयोजक सरदार अमन खान ने रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में जो है हजारों लोगों को संबोधित भी किया है। हूं। आप समेत एक एक खान से कहता हूं। पूरी कौम से कहता हूं इन 53 चोरों समेत पाकिस्तान का कोई सियासतदान उसके बाद कश्मीर की गलियों में नहीं आ सकता। नहीं आ सकता। अगर हम जिंदा नहीं रहेंगे तो तुम भी इस कदर में जिंदा नहीं रहोगे। अमन का पैगाम है। अमन का पैगाम ये है कि जो मुतालबात हमारे हैं वो मुतालबात जो तुमने मायने किए हुए हैं वो मुतालबात पूरे करो। जायज मुतालबात पूरे करो। यहां के लोगों को जो है वो मौका दो। यहां के आवाम को मौका दो। यही तुम्हारे पास रास्ता है। इसके अलावा तुम्हारे पास कोई रास्ता नहीं है। और हमारे पास ऑप्शन है। हमारे पास अल्हम्दुलिल्लाह ऑप्शन है। तुम्हारे पास कोई ऑप्शन नहीं है।
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