पानी पर जंग की गीदड़भभकी: पाक रक्षा मंत्री ने दी भारत को धमकी, सिंधु जल संधि पर गरमाया विवाद
Pakistan threat to India: पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी पुरानी आदत दोहराते हुए भारत को युद्ध की धमकी दी है। इस बार यह धमकी पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की ओर से आई है, जिन्होंने सिंधु जल संधि को लेकर भारत के खिलाफ जहरीले तेवर अपनाए हैं।
एक टीवी चैनल से बातचीत में आसिफ ने दावा किया कि अगर पाकिस्तान को लगा कि उसकी जल सुरक्षा खतरे में है, तो वह भारत से जंग छेड़ने में भी पीछे नहीं हटेगा। हालांकि, अपनी इस धमकी के बीच उन्होंने यह भी स्वीकार कर लिया कि उन्हें संधि से जुड़े हालिया घटनाक्रमों और भारत के कदमों की पूरी जानकारी नहीं है।
क्यों बंद है सिंधु जल संधि?
साल 2025 में पहलगाम में हुए खौफनाक आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। भारत सरकार का नजरिया एकदम स्पष्ट है कि सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के साथ किसी भी तरह के जल समझौते को तब तक बहाल नहीं किया जाएगा, जब तक कि पाकिस्तान ठोस और निर्णायक कदम नहीं उठाता।
पाकिस्तान में गहराता जल संकट
भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान प्रांत में पानी के लिए त्राही-त्राही मची हुई है। सिंचाई विभाग के आंकड़े बताते हैं कि नॉर्थ वेस्ट कैनाल में 64.1%, राइस कैनाल में 38% और दादू कैनाल में 82% तक पानी घट चुका है। सुक्कुर बैराज में पानी का स्तर घटने से पाकिस्तान की पूरी कृषि व्यवस्था और अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।
समझौते का संक्षिप्त इतिहास
सिंधु तंत्र की छह नदियों- सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज को लेकर विवाद बंटवारे के समय से ही था। 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने इस समझौते पर कराची में हस्ताक्षर किए थे। यह संधि दशकों से दोनों देशों के बीच जल संसाधनों के बँटवारे का आधार रही है।
खतरे में पाक की बिजली और खेती
पाकिस्तान की कृषि भूमि का 90% हिस्सा इसी सिंधु तंत्र से सिंचित होता है, जो वहां की नेशनल इनकम का 23% हिस्सा है। पानी की भारी कमी के कारण मंगल और तारबेला जैसे प्रमुख हाइड्रोपावर डैम सूखने की कगार पर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पाकिस्तान में बिजली उत्पादन 30% से 50% तक गिर सकता है, जिसका असर वहां के उद्योगों और आम नागरिकों की जीविका पर पड़ना तय है।
Share Market Today: सेंसेक्स 372 अंक ऊपर, निफ्टी 24,120 के पार, एआई शेयरों के दम पर एशियाई बाजार भी चढ़े
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को वापसी देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे दिग्गज शेयरों में खरीदारी के दम पर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। सुबह 11 बजे तक सेंसेक्स 503.45 अंक यानी 0.66 प्रतिशत बढ़कर 77,306.35 अंक पर कारोबार कर रहा था। इसके बाद शुरु हुई प्राफिट बुकिंग की वजह से कुछ गिरावट आई। 12.33 बजे तक सेंसेक्स 372.98 अंक या 0.45% की बढ़त के साथ 77,180.34 पर आ गया। जबकी, एनएसई का निफ्टी 109.35 अंक या 0.46% बढ़त के साथ 24,122.45 पर आ गया है। एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स को छोड़कर निफ्टी के लगभग सभी प्रमुख सेक्टर हरे निशान में हैं। व्यापक बाजार में भी मजबूती देखने को मिल रही है।
बाजार में तेजी के प्रमुख कारण
निवेशकों का भरोसा उस समय बढ़ा जब अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता के पहले दौर में सकारात्मक प्रगति की खबर सामने आई। दोनों पक्षों ने अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए रोडमैप तैयार करने की दिशा में प्रगति की है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता आगे बढ़ने से बाजार की रिकवरी जारी रहने की संभावना है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता केवल वर्षा की कमी (रेनफॉल डेफिसिट) को लेकर है। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.5 प्रतिशत गिरकर 79.36 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय शेयर बाजार में खरीदारी जारी रखी। उन्होंने 4,859.07 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे, जिससे बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला।
एशिया के उभरते बाजारों में देखने को मिली तेजी
उधर, अधिकांश उभरते हुए एशियाई शेयर बाजारों में सोमवार को मजबूती देखने को मिली। इस तेजी का नेतृत्व ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों ने किया, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी हुई। हालांकि, दूसरी ओर एशियाई मुद्राओं पर दबाव बना रहा, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है। एमएससीआई इमर्जिंग एशिया इंडेक्स 1.5 प्रतिशत से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। इस बढ़त में ताइवान और दक्षिण कोरिया की एआई तथा सेमीकंडक्टर कंपनियों की अहम भूमिका रही, जिनका इस सूचकांक में लगभग 60 प्रतिशत योगदान है।
ताइवान और द. कोरिया के बाजारों में रिकॉर्ड तेजी
ताइवान का प्रमुख शेयर सूचकांक 3 प्रतिशत से अधिक उछलकर 47,871.190 अंकों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह लगातार छठे कारोबारी सत्र की संभावित बढ़त की ओर बढ़ता दिखाई दिया। वहीं दक्षिण कोरिया का मुख्य कोस्पी सूचकांक 2 प्रतिशत से अधिक चढ़ गया और हाल ही में बने अपने रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया। ब्रोकरेज फर्म एसीसीएम के रिसर्च डायरेक्टर ग्लेन यिन ने कहा कि सोमवार का कारोबार यह दिखाता है कि एआई सेक्टर अभी भी भू-राजनीतिक तनाव और ऊंची ब्याज दरों जैसी चुनौतियों के मुकाबले निवेशकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बना हुआ है।
एआई निवेश का उत्साह भू-राजनीतिक चिंताओं पर भारी
विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण कोरिया और ताइवान को सेमीकंडक्टर तथा एआई निवेश चक्र का सबसे बड़ा लाभार्थी माना जा रहा है। वहीं जापान को भी बड़ी तकनीकी और एआई आधारित कंपनियों के कारण अतिरिक्त समर्थन मिल रहा है। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक शेयर बाजारों में एआई से जुड़ा निवेश तेजी से बढ़ा है। निवेशक मान रहे हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों की भविष्य की कमाई इतनी मजबूत हो सकती है कि वह ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों जैसी चिंताओं को पीछे छोड़ दे।
अमेरिका-ईरान वार्ता और होर्मुज की चिंता
मध्यस्थ देशों द्वारा जारी बयान में कहा गया कि अमेरिका और ईरान ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप पर सहमति बनाई है। लेकिन इसके साथ ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की बात कही, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले फिर से शुरू करने की चेतावनी दोहराई। इन विरोधाभासी संकेतों ने निवेशकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
एशियाई मुद्राओं पर बढ़ा दबाव
दूसरी ओर, मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण एशियाई मुद्राएं दबाव में रहीं। एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट करेंसी इंडेक्स लगातार तीसरे सत्र में 0.3 प्रतिशत गिर गया। इंडोनेशियाई रुपिया कमजोर होकर 17,818 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जबकि भारतीय रुपया छह दिनों की लगातार बढ़त के बाद फिसलकर 94.405 प्रति डॉलर पर आ गया। इंडोनेशिया में निवेशकों की नजर अब एमएससीआई की उस महत्वपूर्ण रिपोर्ट पर है, जिसमें देश की उभरते बाजार की स्थिति पर फैसला दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट इंडोनेशियाई बाजार को नई मजबूती दे सकती है या फिर दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए एक और चुनौती साबित हो सकती है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi















/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)






