FIFA World Cup 2026: स्पेन की धमाकेदार वापसी, सऊदी अरब को 4-0 से रौंदा; ओयारजाबल और यमाल का जलवा
FIFA World Cup 2026, Spain vs Saudi Arabia: फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अपने पहले मैच में मिली निराशा के बाद स्पेन ने दमदार वापसी की है। अटलांटा में खेले गए मुकाबले में स्पेन ने सऊदी अरब को 4-0 के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी। केप वर्ड (Cabo Verde) के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ के बाद इस जीत ने 'ला रोजा' की राउंड ऑफ 32 में पहुंचने की उम्मीदों को फिर से जीवित कर दिया है।
मैच का पूरा घटनाक्रम
मैच की शुरुआत से ही स्पेन ने सऊदी अरब पर दबाव बनाए रखा। मिकेल ओयारजाबल के सटीक क्रॉस पर लामिन यमाल ने शानदार रन लेते हुए गोल कर टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। इसके बाद सऊदी अरब की रक्षापंक्ति लड़खड़ा गई और स्पेन ने लगातार हमले जारी रखे।
Lamine Yamal vs Saudi Arabia pic.twitter.com/v6UInmNuOJ
— Rafael (@FlickyCuler) June 21, 2026
ओयारजाबल ने सऊदी अरब की गलती का फायदा उठाते हुए अपनी टीम की बढ़त को दोगुना कर दिया। इसके ठीक तीन मिनट बाद, उन्होंने एक और गोल कर स्कोर 3-0 कर दिया। स्पेन की टीम ने पहले ड्रिंकिंग ब्रेक से पहले ही मैच पर अपना शिकंजा कस लिया था।
दूसरे हाफ में भी दबदबा
हाफ-टाइम तक तीन गोल से आगे होने के बावजूद स्पेन की टीम ने दूसरे हाफ में भी अपनी लय बरकरार रखी। मैच का चौथा गोल सऊदी अरब के लिए दुर्भाग्यपूर्ण रहा। स्पेन के मार्क कुकुरेला की वॉली को सऊदी अरब के गोलकीपर मोहम्मद अल-ओवैस ने रोकने की कोशिश की, लेकिन गेंद डिफेंडर हसन अल्तम्बक्ति से टकराकर खुद उनके ही नेट में चली गई (आत्मघाती गोल)।
Spain pick up their first win at the #FIFAWorldCup ????????✔️
— FIFA World Cup (@FIFAWorldCup) June 21, 2026
अगले मैच में उरुग्वे से भिड़ेगा स्पेन
इस बड़ी जीत के बाद स्पेन अंक तालिका में मजबूत स्थिति में है। अब स्पेन को अपना अंतिम ग्रुप मैच उरुग्वे के खिलाफ खेलना है। स्पेन को राउंड ऑफ 32 में जगह पक्की करने के लिए इस मैच में केवल एक अंक की आवश्यकता है। वहीं, सऊदी अरब को अब अपनी उम्मीदें बनाए रखने के लिए केप वर्ड के खिलाफ होने वाले करो या मरो के मुकाबले पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
गायत्री जयंती 2026: मानसिक तनाव और नकारात्मकता से मुक्ति दिलाता है गायत्री मंत्र, जानें इसका आध्यात्मिक महत्व
गायत्री जयंती भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन वेदमाता मां गायत्री के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को श्रद्धालु मां गायत्री की विशेष पूजा-अर्चना कर ज्ञान, विवेक और सद्बुद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां गायत्री समस्त वेदों की जननी और दिव्य ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी हैं, जिनकी कृपा से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब संसार अज्ञान, भ्रम और अधर्म के अंधकार में घिरने लगा, तब मानवता को सही दिशा दिखाने और ज्ञान का प्रकाश फैलाने के लिए मां गायत्री का अवतरण हुआ। उनके स्वरूप में ज्ञान, शक्ति, करुणा और चेतना का अद्भुत समन्वय माना जाता है। यही कारण है कि उन्हें भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में विशेष सम्मान प्राप्त है।
गायत्री जयंती का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष गायत्री महामंत्र है, जिसे ऋषियों ने चारों वेदों का सार बताया है। यह मंत्र केवल धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक विकास का माध्यम भी माना जाता है। नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जप करने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति की सोच में स्पष्टता आती है। धार्मिक मान्यता है कि यह मंत्र बुद्धि को सही दिशा देने और जीवन में विवेकपूर्ण निर्णय लेने की प्रेरणा प्रदान करता है।
आज के दौर में जब लोग मानसिक तनाव, चिंता और जीवन की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं, तब गायत्री मंत्र की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। विशेषज्ञों और आध्यात्मिक विचारकों का मानना है कि मंत्र जप से मन एकाग्र होता है, नकारात्मक विचारों में कमी आती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। यही कारण है कि युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, बड़ी संख्या में लोग गायत्री मंत्र को अपनी दैनिक साधना का हिस्सा बनाते हैं।
गायत्री जयंती हमें यह संदेश भी देती है कि वास्तविक सफलता केवल भौतिक उपलब्धियों में नहीं, बल्कि चरित्र, संस्कार और आत्मिक विकास में निहित है। मां गायत्री की उपासना व्यक्ति के भीतर सेवा, करुणा, अनुशासन, सहिष्णुता और मानवता जैसे गुणों का विकास करती है। यही गुण एक स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र की नींव बनते हैं।
यह पावन पर्व आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच और ज्ञान के प्रसार का संदेश देता है। गायत्री जयंती के अवसर पर श्रद्धालु मां गायत्री की आराधना कर अपने जीवन में सद्बुद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं। मां गायत्री की कृपा से प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, विवेक और सद्भाव का प्रकाश फैले, यही इस पर्व का मूल संदेश है।
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