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Explainer: भगवान जगन्नाथ साल में सिर्फ एक बार ही मंदिर से बाहर क्यों निकलते हैं? जानें यात्रा के पीछे की सुंदर कहानी

Jagannath Rath Yatra 2026: जगन्नाथ महाप्रभु को भगवान श्रीहरी विष्णु का स्वरूप कहते हैं. वे कलियुग के देवता है. उनकी मूर्तियां भी अधूरी है. जगन्नाथ जी और उनके भाई-बहन, तीनों पुरी के श्रीमंदिर में विराजमान है. तीनो विग्रहों के पैर नहीं है, न ही हाथ है. इसलिए, उन्हें दारु मूर्ति कहते हैं. हर साल पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन होता है. रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने गर्भगृह से बाहर निकलते हैं. अपने विशाल रथ में विराजमान होकर वे नगर भ्रमण करते हैं. साथ ही उनके भाई-बहन भी जाते हैं. इस साल रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को है. वहीं, बहुदा यात्रा 25 जुलाई को है.

क्या आप जानते हैं सनातन धर्म में सिर्फ महाप्रभु श्री जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों की ही असली मूर्तियों को बाहर लाया जाता है. जबकि अन्य देवी-देवताओं की यात्रा होने पर उनकी प्रतिकात्मक मूर्तियों को बाहर लाया जाता है. ऐसा क्यों होता है. इसकी कथा क्या है? आइए इस बारे में विस्तार से इस कथा में जानते हैं.

क्या है रथ यात्रा की परंपरा?

रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ मुख्य मंदिर से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर जाते हैं. इस यात्रा पर भगवान की अपनी मौसी के घर जाने की यात्रा मानते हैं. यहां वे कुछ दिनों तक विश्राम करते हैं और फिर बहुदा यात्रा के माध्यम से वापस अपने धाम को लौटते हैं. दरअसल, गुंडिचा देवी की कोई संतान नहीं थी. इसलिए, जगन्नाथ जी उनके पास मातृत्व प्रेम पाने के लिए हर साल जाते हैं.

Jagannath Rath Yatra 2026 Photograph: (AI-Generated)

गर्भगृह से बाहर आते हैं साक्षात ईश्वर

दरअसल, ओडिशा के पुरी में स्थित श्रीमंदिर माता लक्ष्मी का ससुराल कहलाता है. यह मंदिर सिर्फ सनातन धर्म को मानने वाले लोगों को ही प्रवेश की अनुमति देता है. ऐसे में प्रभु के कई ऐसे भक्त, जो किसी कारण मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाते हैं, उन्हें स्वयं दर्शन देने के लिए बाहर आते हैं. जगन्नाथ रथ यात्रा का हिस्सा हर जाति-वर्ग का मुनष्य बन सकता है. रथ यात्रा के दौरान उनके रथ और उनकी मूर्ति का स्पर्श कोई भी कर सकता है. जगन्नाथ जी इसलिए, मंदिर से स्वयं अपने साक्षात रूप में बाहर आते हैं ताकि कोई भी पृथ्वी पर रहने वाला प्राणी उनके दर्शन से वंचित न रहें. इसलिए, रथ यात्रा के पावन पर्व को समानता का पर्व भी कहते हैं. ओडिशा के लोगों के लिए यह सिर्फ पर्व नहीं बल्कि एक भव्य उत्सव होता है.

जगन्नाथ जी की मौसी के घर जाने की सुंदर कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंद पुराण और अन्य ग्रंथों में बताया जाता है कि महाप्रभु जगन्नाथ जी का मंदिर बनाने से पहले समंदर किनारे एक दारु यानी बड़ा लकड़ी का टुकड़ा मिला था. उस समय राजा इंद्रद्युमन को स्वपन में जगन्नाथ जी ने दर्शन दिए थे और मंदिर बनाने का आदेश दिया था. इसके बाद राजा ने राज्य के सभी अलग-अलग बढ़ई को बुलाया ताकि उस लकड़ी के टुकड़े से मूर्तियों का निर्माण किया जा सके. मगर एक से एक महान कारीगर आए पर कोई उस लकड़ी को काट भी नहीं पाया. इसके बाद दो मजदूर स्वयं राजा के महल आए. उनमें से एक बूढ़ा कारीगर था. उन्होंने राजा से कहा की वे मूर्तियों को निर्माण कर सकते हैं. मगर इसके लिए उनकी एक शर्त थी. उन दोनों ने राजा से वचन लिया था कि वे जब तक मूर्तियां बनाएंगे, उनका कक्ष बंद रहेंगे. उस कक्ष में किसी के प्रवेश की अनुमति नहीं होगी. वे स्वयं जब मूर्तियां बन जाएगी तो द्वार खोलेंगे और बाहर आएंगे. 

मगर राजा की पत्नी यानी रानी गुंडिचा मूर्ति निर्माण कार्य के दौरान बहुत व्याकुल रहती थी. वे बार-बार राजा से कहती कि एकबार कक्ष का दरवाजा खोले और दोनों कारीगरों को देखें. आखिर मूर्तियां कितनी बनी है. लेकिन राजा हर बार अपने वचन के कारण पीछे हट जाते थे. एक दिन रानी की उत्सुकता बढ़ गई और उन्होंने कक्ष का दरवाजा खोल दिया. दरवाजा खुलते ही रानी की आंखे फटी की फटी रह गई क्योंकि जो उन्होंने देखा था, वह बिल्कुल दिव्य था. 

दिव्य आलौकिक मूर्तियों के किए दर्शन

रानी ने भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों की अधूरी मूर्तियां देखी. ये मूर्तियां इतनी दिव्य और चमत्कारी थी कि रानी देखते ही मनमोहित हो गई. मूर्तियों से एक तेज निकल रहा था, जो अलौकिक था. अचानक रानी ने देखा कि मूर्तियों के पैर नहीं है. सुभद्र के न ही कान है और न ही हाथ-पैर थे. जबकि दोनों भाइयों के हाथ अधूरे थे. इन अधूरी मूर्तियों का पूजन कैसे होगा, यह सोचकर रानी ने सोचा कि मूर्तियों का काम पूरा होने दिया जाएं. मगर ये क्या कक्ष खोलते ही मूर्तियों के तो दर्शन हुए लेकिन दोनों कारीगर वहां नहीं थे. बूढ़ा बढ़ई और उसका साथी वहां नहीं थे. वे अदृश्य हो चुके थे. राजा ने उन्हें ढूंढने के लिए सैनिकों को भेजा लेकिन वह नहीं मिले. 

Jagannath Rath Yatra 2026 Photograph: (AI-Generated)

राजा चिंतित हो गए कि शायद उनसे कोई गलती हो गई है और अब भगवान की मूर्तियां अधूरी है तो उनको मंदिर में स्थापित कैसे किया जाए. उस रात राजा के सपने में फिर से जगन्नाथ जी आए. उन्होंने राजा से कहा कि वे उन अधूरी मूर्तियों को ही मंदिर में स्थापित करवाएं. भक्तों को दर्शन से वंचित न रखें. साथ ही बताया कि वे दोनों कारीगर कोई और नहीं बल्कि स्वयं भगवान विश्वकर्मा थे. इसलिए, कक्ष का द्वारा खुलते ही वह अदृश्य हो गए थे. इसके बाद मंदिर में इसी रूप में भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण), उनके बड़े भाई बलभद्र (बलराम) और बहन सुभद्रा की पूजा आज भी पुरी में की जाती है. 

नवकलेवर उत्सव क्या है?

नवकलेवर उत्सव में भगवान जगन्नात की दारु मूर्तियों का फिर से निर्माण होता है. इन मूर्तियों को बनाने के लिए नीम के पेड़ की लकड़ियों की आवश्यकता होती है. यह उत्सल हर 12 साल से 19 साल के अंतराल में किया जाता है. पिछली बार नवकलेवर उत्सल साल 2015 में हुआ था. इसके बाद अब साल 2034 में इसका आयोजन होने वाला है. नवकलेवर में भगवान जगन्नाथ जी की मूर्तियों में ब्रह्म पदार्थ स्थापित किया जाता है. कहते हैं कि ये भगवान श्रीकृष्ण का हृदय होता है. जब मूर्तियों का निर्माण हो जाता है तो ब्रह्म पदार्थ को नई मूर्तियों में स्थापित करने के लिए पुरी शहर में ब्लैक आउट हो जाता है. सारे शहर का पावर कट होता है और अंधेरा किया जाता है.

स्नान पूर्णिमा और बीमारी की मान्यता 

हर साल रथ यात्रा से पहले स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का 108 कलशों के जल से अभिषेक करते हैं. मान्यता है कि इसके बाद भगवान बीमार हो जाते हैं और 15 दिनों तक भक्तों को दर्शन नहीं देते हैं. इस अवधि को "अनवसर काल" कहते हैं. इसके बाद स्वस्थ होने पर भगवान रथ पर सवार होकर भक्तों के बीच आते हैं, जिसे देखने के लिए लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं. इस भव्य उक्सव को ही रथ यात्रा कहते हैं.

ये भी पढ़ें- Devshayani Ekadashi 2026: भगवान विष्णु चार महीने के लिए करेंगे योगनिद्रा में प्रवेश, जानें देवशयनी एकादशी की सही तारीख व महत्व

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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भारत में सस्ती होगी विदेशी शराब! मोदी सरकार की इस बड़ी डील से कम होने वाले हैं बादाम, अखरोट और सेब के दाम...

India US Trade Deal: अगले 48 घंटे भारत के बाजार के लिए अहम होने वाले हैं. 22 जून की शाम तक अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर दिल्ली पहुंच रहे हैं. अगले दो दिन यानी 23-24 जून को वे केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मिलेंगे. दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का एक ही मकसद है भारत-अमेरिका ट्रेड डील को अंतिम रूप देना. बता दें इस डील पर फरवरी 2026 से काम चल रहा है.

जानकारी के मुताबिक भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए ये बैठक बेहद महत्वपूर्ण है. अगर बातचीत सफल रहती है तो इसका असर आने वाले महीनों में भारतीय उद्योग, निर्यात, निवेश और उपभोक्ताओं तक दिखाई दे सकता है. 

यह डील आई कहां से? पहले इसका पूरा बैकग्राउंड समझिए...

विदेश मामलों के जानकारों के मुताबिक यह महज एक राजनयिक मुलाकात नहीं है. इसके नतीजे करोड़ों भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डाल सकते हैं. दरअसल, अप्रैल 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामान पर 25 फीसद का 'रेसिप्रोकल टैरिफ' लगा दिया था. ट्रंप ​इसके बाद भी नहीं रुके थे अगस्त 2025 में भारत के रूस से तेल खरीदने पर नाराज होकर यह टैरिफ दोगुना करके 50 फीसद तक कर दिया था. 

कारोबारियों पर कम होगा आर्थिक बोझ, इन चीजों का निर्यात पर खर्च आएगा कम 

टैक्स बढ़ने से भारत से निर्यात होने वाले टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, केमिकल्स समेत अन्य कई सेक्टरों पर आर्थिक बोझ पड़ा. कारोबारियों के विरोध और सरकार की रणनीति के बाद फरवरी 2026 में दोनों देशों ने एक 'फ्रेमवर्क डील' पर हस्ताक्षर किए. उसी डील को पक्का करने के लिए ही अगले दो दिन के लिए अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि दिल्ली आ रहे हैं.

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किन सेक्टरों पर क्या असर पड़ेगा, क्या चीजें होंगी सस्ती?
 
टेक्सटाइल और गारमेंट्स

यह सेक्टर सबसे ज्यादा फायदे में रहेगा. 50 फीसद टैरिफ ने भारतीय कपड़ा उद्योग की कमर तोड़ दी थी। 18 फीसद पर आने से निर्यात फिर पटरी पर आ सकता है. 

जेनेरिक दवाइयां 

भारत अमेरिका को सबसे ज्यादा सस्ती जेनेरिक दवाइयां सप्लाई करता है. करीब 50 फीसद अमेरिकी बाजार भारत से चलता है. डील से दवाइयों पर टैरिफ जीरो हो सकता है. 

हीरे और जेम्स-ज्वेलरी

सूरत से लेकर मुंबई तक के हजारों कारखाने इस डील का इंतजार कर रहे हैं. टैरिफ हटने से निर्यात में तेजी आ सकती है।

ऑटो और ऑटो पार्ट्स

भारत को अमेरिकी ऑटो पार्ट्स के लिए एक 'प्रेफरेंशियल टैरिफ कोटा' मिलेगा. इससे भारत अमेरिकी सप्लाई चेन में और मजबूती से जुड़ सकेगा।

IT और सॉफ्टवेयर

यह सेक्टर इस डील से सीधे प्रभावित नहीं होता, लेकिन बेहतर रिश्तों का फायदा लंबे समय में मिलेगा.

इस डील के बाद भारत में क्या सस्ता होगा?

- अमेरिकी बादाम, अखरोट, सेब जैसे ड्राई फ्रूट्स और फल
- अमेरिकी वाइन और व्हिस्की
- कुछ अमेरिकी मशीनरी और तकनीकी उपकरण
- अमेरिकी ICT यानी सूचना प्रौद्योगिकी उत्पाद

फरवरी 2026 में आया था दोनों देशों का जॉइंट स्टेटमेंट, अभी तक क्या तय हुआ है?

- अमेरिका भारतीय सामान पर टैरिफ 50 फीसद से घटाकर 18 फीसद करेगा.
- फाइनल डील होने के बाद जेनेरिक दवाइयां, हीरे और एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर टैरिफ पूरी तरह हटाने की बात है.
- भारत अमेरिकी औद्योगिक सामान और कुछ कृषि उत्पादों पर टैक्स कम करेगा.
- भारत अगले पांच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर की खरीदारी करेगा, जिसमें ऊर्जा, तकनीक, कोयला और अनाज शामिल होंगे. 
- भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करेगा या कम करेगा.

'डील 99 फीसद तैयार है, बस कुछ मुद्दे बाकी हैं'

भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक अमेरिकी प्रतिनिध की यह यात्रा छोटी लेकिन फैसलाकुन है. दोनों पक्ष 'पहली ट्रांच' यानी डील के पहले हिस्से को लगभग अंतिम रूप देने की कोशिश करेंगे. इसके साथ-साथ बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी BTA की रूपरेखा पर भी बात होगी. बता दें बीते दिनों G7 शिखर सम्मेलन के दौरान PM मोदी और ट्रंप की मुलाकात के बाद ही अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर की यह यात्रा तय हुई. यानी ऊपर से 'हरी झंडी' मिल चुकी है. इतना ही नहीं अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मीडिया में बयान दिया है कि 'डील 99 फीसद तैयार है, बस कुछ मुद्दे बाकी हैं'.

 

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