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भारत में सस्ती होगी विदेशी शराब! मोदी सरकार की इस बड़ी डील से कम होने वाले हैं बादाम, अखरोट और सेब के दाम...

India US Trade Deal: अगले 48 घंटे भारत के बाजार के लिए अहम होने वाले हैं. 22 जून की शाम तक अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर दिल्ली पहुंच रहे हैं. अगले दो दिन यानी 23-24 जून को वे केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मिलेंगे. दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का एक ही मकसद है भारत-अमेरिका ट्रेड डील को अंतिम रूप देना. बता दें इस डील पर फरवरी 2026 से काम चल रहा है.

जानकारी के मुताबिक भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए ये बैठक बेहद महत्वपूर्ण है. अगर बातचीत सफल रहती है तो इसका असर आने वाले महीनों में भारतीय उद्योग, निर्यात, निवेश और उपभोक्ताओं तक दिखाई दे सकता है. 

यह डील आई कहां से? पहले इसका पूरा बैकग्राउंड समझिए...

विदेश मामलों के जानकारों के मुताबिक यह महज एक राजनयिक मुलाकात नहीं है. इसके नतीजे करोड़ों भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डाल सकते हैं. दरअसल, अप्रैल 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामान पर 25 फीसद का 'रेसिप्रोकल टैरिफ' लगा दिया था. ट्रंप ​इसके बाद भी नहीं रुके थे अगस्त 2025 में भारत के रूस से तेल खरीदने पर नाराज होकर यह टैरिफ दोगुना करके 50 फीसद तक कर दिया था. 

कारोबारियों पर कम होगा आर्थिक बोझ, इन चीजों का निर्यात पर खर्च आएगा कम 

टैक्स बढ़ने से भारत से निर्यात होने वाले टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, केमिकल्स समेत अन्य कई सेक्टरों पर आर्थिक बोझ पड़ा. कारोबारियों के विरोध और सरकार की रणनीति के बाद फरवरी 2026 में दोनों देशों ने एक 'फ्रेमवर्क डील' पर हस्ताक्षर किए. उसी डील को पक्का करने के लिए ही अगले दो दिन के लिए अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि दिल्ली आ रहे हैं.

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किन सेक्टरों पर क्या असर पड़ेगा, क्या चीजें होंगी सस्ती?
 
टेक्सटाइल और गारमेंट्स

यह सेक्टर सबसे ज्यादा फायदे में रहेगा. 50 फीसद टैरिफ ने भारतीय कपड़ा उद्योग की कमर तोड़ दी थी। 18 फीसद पर आने से निर्यात फिर पटरी पर आ सकता है. 

जेनेरिक दवाइयां 

भारत अमेरिका को सबसे ज्यादा सस्ती जेनेरिक दवाइयां सप्लाई करता है. करीब 50 फीसद अमेरिकी बाजार भारत से चलता है. डील से दवाइयों पर टैरिफ जीरो हो सकता है. 

हीरे और जेम्स-ज्वेलरी

सूरत से लेकर मुंबई तक के हजारों कारखाने इस डील का इंतजार कर रहे हैं. टैरिफ हटने से निर्यात में तेजी आ सकती है।

ऑटो और ऑटो पार्ट्स

भारत को अमेरिकी ऑटो पार्ट्स के लिए एक 'प्रेफरेंशियल टैरिफ कोटा' मिलेगा. इससे भारत अमेरिकी सप्लाई चेन में और मजबूती से जुड़ सकेगा।

IT और सॉफ्टवेयर

यह सेक्टर इस डील से सीधे प्रभावित नहीं होता, लेकिन बेहतर रिश्तों का फायदा लंबे समय में मिलेगा.

इस डील के बाद भारत में क्या सस्ता होगा?

- अमेरिकी बादाम, अखरोट, सेब जैसे ड्राई फ्रूट्स और फल
- अमेरिकी वाइन और व्हिस्की
- कुछ अमेरिकी मशीनरी और तकनीकी उपकरण
- अमेरिकी ICT यानी सूचना प्रौद्योगिकी उत्पाद

फरवरी 2026 में आया था दोनों देशों का जॉइंट स्टेटमेंट, अभी तक क्या तय हुआ है?

- अमेरिका भारतीय सामान पर टैरिफ 50 फीसद से घटाकर 18 फीसद करेगा.
- फाइनल डील होने के बाद जेनेरिक दवाइयां, हीरे और एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर टैरिफ पूरी तरह हटाने की बात है.
- भारत अमेरिकी औद्योगिक सामान और कुछ कृषि उत्पादों पर टैक्स कम करेगा.
- भारत अगले पांच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर की खरीदारी करेगा, जिसमें ऊर्जा, तकनीक, कोयला और अनाज शामिल होंगे. 
- भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करेगा या कम करेगा.

'डील 99 फीसद तैयार है, बस कुछ मुद्दे बाकी हैं'

भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक अमेरिकी प्रतिनिध की यह यात्रा छोटी लेकिन फैसलाकुन है. दोनों पक्ष 'पहली ट्रांच' यानी डील के पहले हिस्से को लगभग अंतिम रूप देने की कोशिश करेंगे. इसके साथ-साथ बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी BTA की रूपरेखा पर भी बात होगी. बता दें बीते दिनों G7 शिखर सम्मेलन के दौरान PM मोदी और ट्रंप की मुलाकात के बाद ही अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर की यह यात्रा तय हुई. यानी ऊपर से 'हरी झंडी' मिल चुकी है. इतना ही नहीं अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मीडिया में बयान दिया है कि 'डील 99 फीसद तैयार है, बस कुछ मुद्दे बाकी हैं'.

 

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डॉट कॉम क्रैश से खतरनाक हो सकता है एआई बबल:दामोदरन की चेतावनी; एआई बूम में गिरावट आई तो संभलना नामुमकिन

दुनियाभर की बड़ी टेक कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई की रेस में आगे निकलने के लिए ट्रिलियन (लाखों करोड़ रुफए) डॉलर का निवेश कर रही हैं। इसे इतिहास के सबसे बड़े तकनीकी निवेशों में से एक माना जा रहा है। लेकिन इस बीच कॉर्पोरेट जगत में ‘डीन ऑफ वैल्यूएशन’ के नाम से मशहूर न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के फाइनेंस प्रोफेसर अश्वथ दामोदरन ने एक बड़ी चेतावनी दी है। भारतीय-अमेरिकी मूल के प्रोफेसर दामोदरन का मानना है कि भविष्य में आने वाला एआई मार्केट करेक्शन साल 2000 के डॉट-कॉम क्रैश से भी कहीं ज्यादा दर्दनाक हो सकता है। ‘एक्सेस रिटर्न्स’ यूट्यूब चैनल पर दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी बाजार में किसी चीज को लेकर जरूरत से ज्यादा उत्साह होता है, तो उसके बाद गिरावट जरूर आती है। एआई में भी मंदी आने की पूरी आशंका है, जिसका असर केवल वॉल स्ट्रीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी सोसाइटी को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। भारी कर्ज, डिफॉल्ट और प्राइवेट कैपिटल का संकट आम जनता की जेब तक पहुंच सकता है। डॉट-कॉम एआई- इस बार जोखिम इतना बड़ा क्यों है? जानें तीन बड़ी वजह डॉट कॉम में सीमित खर्च था, लेकिन एआई में इतिहास का बड़ा निवेश अश्वथ दामोदरन ने दोनों दौर के अंतर को समझाते हुए बताया कि डॉट-कॉम के दौर में कंपनियों के पास सिर्फ वेबसाइट्स, सॉफ्टवेयर और इंटरनेट आधारित आइडिया थे। लेकिन एआई में अब तक का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च हो रहा है। इसकी तुलना 100 साल पहले के ऑटोमोबाइल बिजनेस की शुरुआत से की जा सकती है। डेटा सेंटर्स, सेमीकंडक्टर, कंप्यूटिंग पावर और भारी ऊर्जा खपत वाले सिस्टम पर भारी-भरकम पूंजी लगाई जा रही है। पूंजी का यह आकार ही सबसे बड़ा खतरा है। 2008 का सबक- कर्ज न चुका पाना सबसे ज्यादा दर्दनाक प्रोफेसर दामोदरन ने साफ किया कि वह 2008 जैसी वैश्विक आर्थिक मंदी की भविष्यवाणी नहीं कर रहे हैं, पर 2008 की मंदी का टेकअवे यह है कि जब कर्ज देने वाले जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ जाते हैं और कम ब्याज दरों पर पैसा बांटते हैं, तो सुधार आने पर दर्द पूरी दुनिया को झेलना पड़ता है। यदि आप समय पर कर्ज नहीं चुकाते हैं, तो सामाजिक लागत बहुत बड़ी होती है। यह स्थिति शेयर 90% टूटने के दर्द से कहीं ज्यादा भयानक होती है। लोन के पैसे से खड़ी हो रही है एआई की इमारत, ये बड़ी चिंता डॉट-कॉम बबल जब 2000-01 में फूटा, तो टेक शेयरों की वैल्यू जरूर गिरी और निवेशकों को 70 से 90% तक का नुकसान हुआ। इसके चलते कई टेक कंपनियां पूरी तरह खत्म हो गई। लेकिन यह नुकसान सिर्फ शेयरधारकों तक सीमित रहा। बैंक और आम बिजनेस सुरक्षित रहे। इसके विपरीत, मौजूदा एआई एक्सपेंशन के लिए कर्ज लिया जा रहा है। यह बैंकों के बजाय प्राइवेट कैपिटल मार्केट्स से आ रहा है।

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अब रवींद्र जडेजा का आ गया नंबर, जल्द ले सकते है बड़ा फैसला, इंग्लैंड दौरे पर ना चुनकर अजित अगरकर ने दे दिए संकेत

संकेत तो यहीं कह रहे है कि जडेजा ने भारत के लिए अपना आखिरी वनडे खेल लिया है? 2027 वर्ल्ड कप में अभी 15 महीने का समय बाकी है, जिसमें भारत करीब 24 वनडे मैच खेलेगा. टीम संयोजन को देखते हुए, अक्षर पटेल बाएं हाथ के स्पिनर के रूप में पहली पसंद हैं. जब तक अक्षर चोटिल नहीं होते, जडेजा के लिए दक्षिण अफ्रीका जाना मुश्किल है Mon, 22 Jun 2026 17:40:42 +0530

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