Surya ko jal chadhane ka mahatva: हिंदू धर्म में सूर्य देव को साक्षात देवता माना जाता है, और यही कारण है कि हर सुबह सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि सूर्य को जल चढ़ाने से न सिर्फ आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि इससे व्यक्ति के जीवन में ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का भी संचार होता है।
धार्मिक ग्रंथों में सूर्य पूजा का महत्व धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सूर्य को नवग्रहों में सबसे प्रमुख माना जाता है और इन्हें आत्मा का कारक ग्रह भी कहा जाता है। मान्यता है कि नियमित रूप से सूर्य को जल अर्पित करने से व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है, जिससे मान-सम्मान, आत्मविश्वास और सफलता में बढ़ोतरी होती है। कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि सूर्य देव की उपासना करने से पिता के साथ रिश्ते भी मजबूत होते हैं, क्योंकि ज्योतिष में सूर्य को पिता का कारक ग्रह माना जाता है।
सूर्य को जल चढ़ाने का सही समय और तरीका धार्मिक परंपराओं के अनुसार, सूर्य को जल अर्पित करने का सबसे उत्तम समय सूर्योदय के तुरंत बाद का माना जाता है। जल चढ़ाते समय तांबे के लोटे का इस्तेमाल करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जल में लाल फूल, अक्षत या रोली मिलाकर अर्पित करने से इसका फल और भी बढ़ जाता है।
सूर्य को जल चढ़ाते समय व्यक्ति को पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़ा होना चाहिए और जल की धारा के बीच से सूर्य को देखने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही "ॐ सूर्याय नमः" या गायत्री मंत्र का जाप करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।
सूर्य को जल चढ़ाने के वैज्ञानिक लाभ भी हैं खास धार्मिक महत्व के साथ-साथ सूर्य को जल चढ़ाने की इस परंपरा को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि सुबह के समय सूर्य की किरणों के सामने खड़े होने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिलता है, जो हड्डियों की मजबूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा सुबह जल्दी उठकर यह क्रिया करने से मानसिक तनाव कम होने और दिनभर ऊर्जावान बने रहने में भी मदद मिलती है, ऐसा माना जाता है।
किन बातों का रखें खास ध्यान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य को जल चढ़ाते समय स्नान करना अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि बिना स्नान किए की गई पूजा अधूरी मानी जाती है। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि जल चढ़ाते समय लोटे से गिरने वाली जल की धार में इंद्रधनुष जैसा प्रभाव देखना शुभ संकेत माना जाता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, रविवार के दिन सूर्य को जल अर्पित करना विशेष रूप से फलदायी होता है, क्योंकि यह दिन सूर्य देव को ही समर्पित माना जाता है।
आज भी करोड़ों लोग निभाते हैं यह परंपरा समय के साथ भले ही जीवनशैली में कई बदलाव आए हों, लेकिन सूर्य को जल चढ़ाने की यह परंपरा आज भी करोड़ों लोगों द्वारा श्रद्धापूर्वक निभाई जाती है। चाहे शहर हो या गांव, आज भी सुबह के समय लोग तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करते हुए नजर आते हैं, और इसे अपने दिन की शुभ शुरुआत का हिस्सा मानते हैं।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। किसी भी उपाय, व्रत या धार्मिक कर्मकांड को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विद्वान या पंडित से सलाह अवश्य लें।
हर वर्ष सावन माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन कामिका एकादशी मनाई जाती है। यह पर्व भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन भगवान विष्णु एवं धन की देवी मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। 9 अगस्त को सावन महीने की एकादशी का व्रत किया जाएगा। जिसका नाम कामिका एकादशी है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 8 अगस्त 2026 को रात 3:29 मिनट से आरंभ होगी और 9 अगस्त 2026 को रात 12:34 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। कामिका एकादशी व्रत की कथा सुनना यज्ञ करने के समान है। इस व्रत के बारे में ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद को बताया कि पाप से भयभीत मनुष्यों को कामिका एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। एकादशी व्रत से बढ़कर पापों के नाशों का कोई उपाय नहीं है। स्वयं प्रभु ने कहा है कि कामिका व्रत से कोई भी जीव कुयोनि में जन्म नहीं लेता। जो इस एकादशी पर श्रद्धा-भक्ति से भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पण करते हैं, वे इस समस्त पापों से दूर रहते हैं। पुराणों में कहा गया है कि इस तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली इस एकादशी पर भगवान विष्णु को तुलसी पत्र चढ़ाने से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं। इस दिन तीर्थ स्नान और दान से कई गुना पुण्य फल मिलता है।
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि कामिका एकादशी पर शंख, चक्र, गदाधारी भगवान विष्णु का पूजन होता है। भीष्म पितामह ने नारदजी को इस एकादशी का महत्व बताया है। उन्होंने कहा कि जो मनुष्य इस एकादशी को धूप, दीप, नैवेद्य आदि से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उन्हें गंगा स्नान के फल से भी उत्तम फल की प्राप्ति होती है। इस एकादशी की कथा सुनने से ही वाजपेय यज्ञ का फल मिल जाता है। भीष्म कहते हैं कि व्यतिपात योग में गंडकी नदी में और सूर्य-चन्द्र ग्रहण के दौरान स्नान करने से जितना पुण्य मिलता है। उतना ही महापुण्य सावन महीने में आने वाली कामिका एकादशी पर व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से मिल जाता है। इस दिन तुलसी पत्र से भगवान विष्णु की पूजा करने का भी विधान बताया गया है।
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 8 अगस्त 2026 को रात 3:29 मिनट से आरंभ होगी और 9 अगस्त 2026 को रात 12:34 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।
शुभ योग
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि पंचांग के अनुसार कामिका एकादशी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। यह शुभ योग सुबह 6:03 मिनट से 6:22 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि इस योग में भगवान विष्णु की पूजा और दान-पुण्य करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
व्रत का संकल्प
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि स्कंद पुराण में बताया गया है कि सावन महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी पर व्रत, पूजा और दान से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं। लेकिन, जानबूझकर दोबारा कोई पाप या अधर्म नहीं होगा, ऐसा संकल्प भगवान विष्णु के सामने लेने पर ही इसका फल मिलता है। ये व्रत साल की 24 एकादशियों में खास माना गया है।
विष्णु पूजा
कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि महाभारत और भविष्य पुराण में बताया गया है कि सावन महीने के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इनके अलावा विष्णुधर्मोत्तर पुराण में भी जिक्र है कि सावन महीने में भगवान विष्णु की पूजा और व्रत-उपवास से मिलने वाला पुण्य कभी खत्म नहीं होता है। पुराणों में कहा गया है कि सावन महीने के दौरान पंचामृत और शंख में दूध भरकर भगवान विष्णु का अभिषेक करने से जाने-अनजाने में हुए हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं।
निर्जल व्रत
भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि सावन महीने में आने वाली एकादशियों को पर्व भी कहा जाता है। सावन मास में भगवान नारायण की पूजा करने वालों से देवता, गंधर्व और सूर्य आदि सब पूजित हो जाते हैं। एकादशी के दिन स्नानादि से पवित्र होने के बाद पूजा का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु की मूर्ति की पूजा करना चाहिए। भगवान विष्णु को फूल, फल, तिल, दूध, पंचामृत और अन्य सामग्री चढ़ाकर आठों प्रहर निर्जल रहना चाहिए। यानी पूरे दिन बिना पानी पीए विष्णु जी के नाम का स्मरण करना चाहिए। एकादशी व्रत में ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा का भी बहुत महत्व है। इस प्रकार जो यह व्रत रखता है उसकी कामनाएं पूरी होती हैं।
गौ दान का पुण्य
भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि पितामह ने बताया कि पूरे साल भगवान विष्णु की पूजा न कर सकें तो कामिका एकादशी का उपवास करना चाहिए। इससे बछड़े सहित गौदान करने जितना पुण्य मिल जाता है। सावन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और उपवास करने से सभी देवता, नाग, किन्नर और पितरों की पूजा हो जाती है। जिससे हर तरह के रोग, शोक, दोष और पाप खत्म हो जाते हैं।
मिलता है स्वर्ग
कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि कामिका एकादशी के व्रत के बारे में खुद भगवान ने कहा है कि मनुष्यों को अध्यात्म विद्या से जो फायदा मिलता है उससे ज्यादा फल कामिका एकादशी का व्रत करने से मिल जाता है। इस दिन व्रत करने से मनुष्य को यमराज के दर्शन नहीं होते हैं। बल्कि स्वर्ग मिलता है। जिससे नरक के कष्ट नहीं भोगने पड़ते।
दीपदान
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि भीष्म ने नारदजी को बताया कि कामिका एकादशी की रात में जागरण और दीप-दान करने से जो पुण्य मिलता है। उसको लिखने में चित्रगुप्त भी असमर्थ हैं। एकादशी भगवान विष्णु के सामने घी या तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए। जो ऐसे दीपक लगाता है उसे सूर्य लोक में भी हजारों दीपकों का प्रकाश मिलता है। ऐसे लोगों के पितरों को स्वर्ग में अमृत मिलता है।
ind won left handers domination: गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम की स्पिन-अनुकूल पिच पर भारतीय टीम ने श्रीलंका को उसके ही घर में मात देकर एक ऐतिहासिक टेस्ट जीत दर्ज की. टेस्ट क्रिकेट में गॉल के मैदान पर श्रीलंका को हराना हमेशा से दुनिया की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक माना जाता है, लेकिन युवा और जोश से भरी इस भारतीय टीम ने इस मुश्किल चुनौती को 'बाएं हाथ का खेल' बना दिया Wed, 19 Aug 2026 13:54:22 +0530