Face Hair Problem: चेहरे पर बढ़ रहे हैं बाल, कहीं किसी बीमारी का संकेत तो नहीं? जानिए ऐसा कब होता है
Unwanted Facial Hair: चेहरे पर बाल ज्यादातर लोगों को होते हैं, लेकिन अगर इतने हो जाए कि देखने पर बुरे लगे तो यह चिंता का विषय हो सकता है. ऐसा होना कई बीमारियों के होने का संकेत देता है, जिसकी वक्त पर पहचान करना जरूरी है.
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बुर्का और पर्दा पहनने वाली महिलाओं पर इम्तियाज अली ने उठाए सवाल, बोले- 'आप पीड़िता बन गई हैं'
Imtiaz Ali on Women: अपनी फिल्मों में सेंसिटिव कहानियां और मजबूत महिला किरदार पेश करने के लिए पहचाने जाने वाले मशहूर फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली (Imtiaz Ali) एक बार फिर सुर्खियों में हैं. हालांकि इस बार चर्चा उनकी किसी फिल्म या किरदार को लेकर नहीं, बल्कि महिलाओं के बुर्का और पर्दा प्रथा पर दिए गए एक बयान को लेकर हो रही है. उनके हालिया इंटरव्यू का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद लोगों के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस छिड़ गई है.
इम्तियाज अली ने एक बातचीत के दौरान कहा कि जब महिलाएं ये कहती हैं कि वो बुर्का या पर्दे में सहज महसूस करती हैं, तो उन्हें ये बात अच्छी नहीं लगती. उनका मानना है कि किसी भी ऐसे सामाजिक ढांचे को सामान्य मान लेना, जो व्यक्ति की स्वतंत्रता पर किसी तरह की पाबंदी लगाता हो, समाज के लिए चिंता का विषय है.
'पाबंदियों को सहज मान लेना सही नहीं'
'अनफिल्टर्ड बाय समदीश' को दिए इंटरव्यू में इम्तियाज अली ने समाज में मौजूद कुछ परंपराओं और सामाजिक मान्यताओं पर अपनी राय रखी. इसी दौरान उन्होंने बुर्का और पर्दा प्रथा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें ये विचार स्वीकार्य नहीं लगता कि कोई व्यक्ति ऐसी व्यवस्था में सहज महसूस करे, जहां उसकी आजादी सीमित होती हो.
उन्होंने कहा कि जब कोई महिला ये कहती है कि वो बुर्के या पर्दे में पूरी तरह सहज है, तो ये उन्हें परेशान करता है. उनके अनुसार, अगर समाज में लोग ऐसी पाबंदियों को सामान्य और आरामदायक मानने लगें, तो ये उस सामाजिक व्यवस्था की ओर इशारा करता है जहां लंबे समय से चली आ रही बंदिशें लोगों की सोच का हिस्सा बन जाती हैं. इम्तियाज का कहना था कि किसी भी तरह की सामाजिक पाबंदी को बिना सवाल किए स्वीकार कर लेना स्वस्थ समाज की निशानी नहीं माना जा सकता.
'यह किसी समुदाय पर टिप्पणी नहीं'
बयान को लेकर विवाद बढ़ने के बाद इम्तियाज अली ने इंटरव्यू में ये भी स्पष्ट किया कि उनका इरादा किसी विशेष धर्म, समुदाय या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं था. उन्होंने कहा कि वो किसी की पर्सनल पसंद या लाइफस्टाइल पर सवाल खड़े करने वाले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि उन्होंने केवल अपने विचार साझा किए हैंजीवनशैली निर्देशक ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का अधिकार है और वो किसी को ये बताने की स्थिति में नहीं हैं कि उसे क्या पहनना चाहिए या कैसे रहना चाहिए. हालांकि, उन्होंने ये जरूर कहा कि सामाजिक मुद्दों पर चर्चा और विचार-विमर्श होना जरूरी है.
Imtiaz Ali called the burkha/parda concept weak, backward & problematic. But this d@lla Samdish is shielding it by saying if the community has normalized it, how can we question? Imtiaz is lietrally from that community. Wah re ???? Absolute hypocrite @UFbySamdishh pic.twitter.com/3azvE5G0SV
— Annihilator ???? (@Gargi16191) June 18, 2026
'मैं किसी को टोकने वाला कौन हूं?'
इम्तियाज अली ने बातचीत के दौरान कहा कि आज के समय में किसी भी विषय पर बैलेंस्ड चर्चा करना कठिन होता जा रहा है. लोग अक्सर किसी भी राय को तुरंत समर्थन या विरोध के खांचे में रख देते हैं. उन्होंने कहा, "मैं किसी को टोक नहीं रहा हूं. मैं कौन होता हूं किसी की जिंदगी पर सवाल उठाने वाला? मैं सिर्फ ये कह रहा हूं कि समाज में सहनशीलता और संयम की भावना बनी रहनी चाहिए." उनके मुताबिक, आजकल लोग बेहद जल्दी किसी विचार को लेकर कट्टर रुख अपना लेते हैं, जिससे संवाद की गुंजाइश कम होती जा रही है. उन्होंने कहा कि मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इसके बावजूद लोगों को एक-दूसरे के साथ सम्मानपूर्वक रहना चाहिए.
सोशल मीडिया पर बंटी राय
इम्तियाज अली के इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई. कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि महिलाओं की स्वतंत्रता और सामाजिक दबावों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए. वहीं दूसरी ओर कई लोगों ने इसे महिलाओं की पर्सनली पसंद और धार्मिक आजादी से जोड़ते हुए आलोचना भी की. कई यूजर्स का कहना था कि अगर कोई महिला अपनी इच्छा से बुर्का या पर्दा पहनती है, तो उस फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए. वहीं कुछ लोगों ने तर्क दिया कि सामाजिक परंपराओं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर बातचीत जरूरी है.
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