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Neet-UG पेपर लीक मामले में जांच तेज, जेल में आरोपियों से पूछताछ करेगी सीबीआई
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी से जुड़े कथित पेपर लीक मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है. इस मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो को जेल में बंद कुछ आरोपियों से पूछताछ की अनुमति मिल गई है. राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई को आरोपी शुभम, मनीषा वाघमारे और धनंजय लोखंडे से जेल के अंदर पूछताछ करने की इजाजत दी है. अदालत के इस फैसले के बाद जांच एजेंसी को मामले की कई अहम कड़ियों तक पहुंचने की उम्मीद है.
जानकारी जुटाने की कोशिश की जाएगी
अदालत ने सीबीआई को 17, 18 और 19 जून को जेल में पूछताछ करने की अनुमति दी है. जांच एजेंसी इन तीनों आरोपियों से अलग-अलग और विस्तार से सवाल पूछ सकती है. माना जा रहा है कि पूछताछ के दौरान उन घटनाओं और संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की जाएगी, जिनका संबंध कथित पेपर लीक नेटवर्क से हो सकता है. जांच एजेंसियां अक्सर ऐसे मामलों में घटनाओं की पूरी श्रृंखला को समझने के लिए आरोपियों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान करती हैं.
जांच पर पूरे देश की नजर बनी हुई
नीट - यूजी परीक्षा हर साल लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती है. देश भर के छात्र मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए इस परीक्षा में शामिल होते हैं. ऐसे में परीक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता का मामला सामने आने पर स्वाभाविक रूप से छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ जाती है. इसी वजह से इस मामले की जांच पर पूरे देश की नजर बनी हुई है.
जेल में बंद आरोपियों से सीधे सवाल-जवाब
सीबीआई इस मामले में पहले भी कई स्थानों पर जांच कर चुकी है और अनेक लोगों से पूछताछ कर चुकी है. अब जेल में बंद आरोपियों से सीधे सवाल-जवाब के जरिए जांच को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है. जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास करेगी कि कथित तौर पर जानकारी किस तरह एक जगह से दूसरी जगह पहुंची और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका हो सकती है.
कानूनी प्रक्रिया के तहत किसी भी आरोपी को तब तक दोषी नहीं माना जाता, जब तक अदालत में आरोप साबित न हो जाएं. इसलिए जांच का उद्देश्य केवल तथ्यों को सामने लाना और उपलब्ध सबूतों की जांच करना होता है. अदालत की निगरानी में चल रही प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि जांच निष्पक्ष और कानून के दायरे में रहकर आगे बढ़े.
महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा
इस मामले में अदालत द्वारा जेल में पूछताछ की अनुमति देना जांच के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. कई बार ऐसे मामलों में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां आरोपियों से सीधे बातचीत के दौरान सामने आती हैं, जिससे जांच को नई दिशा मिल सकती है. हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और अदालत में सभी तथ्यों के प्रस्तुत होने के बाद ही सामने आएगा.
अभिभावकों की सबसे बड़ी उम्मीद
छात्रों और अभिभावकों की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आए और परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा मजबूत बना रहे. शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना किसी भी व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसलिए इस मामले की हर कार्रवाई पर लोगों की नजर बनी हुई है.
फिलहाल सीबीआई को अदालत से मिली अनुमति के आधार पर 17 से 19 जून के बीच जेल में पूछताछ करनी है. आने वाले दिनों में जांच से जुड़े नए तथ्य सामने आ सकते हैं. जांच एजेंसी की कोशिश होगी कि उपलब्ध साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सके.
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