सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने शुक्रवार को टेलीविज़न चैनलों, रेडियो स्टेशनों, DTH ऑपरेटरों और अन्य ब्रॉडकास्टिंग सेवाओं को एक ही रेगुलेटरी फ़्रेमवर्क के तहत लाने के लिए नियमों का ड्राफ़्ट जारी किया। टेलीकम्युनिकेशन (टेलीविज़न, रेडियो और संबंधित सेवाएं) नियम, 2026 का ड्राफ्ट, टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 के तहत कई तरह की गाइडलाइंस और परमिशन की जगह एक ही नियम-पुस्तिका (unified rulebook) लाना चाहता है। मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित नियम टेलीविज़न चैनलों, DTH सेवाओं, हेडएंड-इन-द-स्काई (HITS) ऑपरेटरों, प्राइवेट FM रेडियो, कम्युनिटी रेडियो और IPTV सेवाओं से जुड़े छह मौजूदा पॉलिसी फ्रेमवर्क को मिलाकर नियमों का एक ही सेट बनाना चाहते हैं।
इस ड्राफ्ट को सलाह-मशविरे के लिए पब्लिक डोमेन में रखा गया है और 27 जुलाई तक इस पर अपनी राय दी जा सकती है। MIB के एक अधिकारी ने HT को बताया कि इसका मकसद ब्रॉडकास्टर्स के लिए एक आसान और पहले से अनुमान लगाने योग्य सिस्टम बनाना है। अधिकारी ने कहा कि इसका मकसद चीज़ों को आसान बनाना और 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' (कारोबार करने में आसानी) को बढ़ावा देना है। छह अलग-अलग गाइडलाइंस की जगह अब नियमों का एक ही मिला-जुला सेट लागू किया जाएगा। 'ग्रांट ऑफ़ परमिशन एग्रीमेंट' (GoPA) को खत्म कर दिया गया है। समय-सीमा, फीस के ढांचे और मंज़ूरी की प्रक्रियाओं को भी आसान बना दिया गया है।
ड्राफ्ट नियमों में निजी ब्रॉडकास्टर्स के लिए जनहित से जुड़े प्रोग्राम दिखाने की पुरानी शर्त को भी बरकरार रखा गया है। टेलीविज़न चैनलों को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयों पर हर दिन कम से कम 30 मिनट का कंटेंट दिखाना होगा। यह नियम सबसे पहले 2022 की अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग गाइडलाइंस के ज़रिए लागू किया गया था और बाद में जनवरी 2023 में MIB की एक एडवाइज़री के ज़रिए इसे अमल में लाया गया, जिसमें चैनलों को हर महीने इसके पालन की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया था।
Continue reading on the app