Explainer: क्या यूरोप में रहने वाले भारतीयों पर बढ़ा खतरा? 'प्रवासी विरोध' की आग में क्यों मुश्किल होता जा रहा है 'यूरोपियन ड्रीम'
Europe Immigration Crisis: भारत में रहने वाले लाखों लोगों का सपना रहता है कि वह ब्रिटेन, आयरलैंड, जर्मनी, नीदरलैंड, फ्रांस या यूरोप महाद्वीप के अन्य किसी देश में जाएं वहां नौकरी, व्यवसाय करके अपना आशियाना बनाएं. लेकिन अब यूरोप वैसा नहीं रहा जैसा लगभग 10 साल पहले था. दरअसल, इन दिनों ब्रिटेन, आयरलैंड, जर्मनी, नीदरलैंड, फ्रांस करीब हर यूरोपीय देश में 'प्रवासी विरोध' की आग फैली हुई है.
यूरोप के कई देशों के लोगों में भारतीय ही नहीं अन्य दुनिया के अन्य देशों से आए प्रवासियों को लेकर गुस्सा भरा हुआ है. यहां सड़कों आगजनी, दंगे हो रहे हैं, कहीं लोगों के घरों में आग लगाई जा रही है और कहीं राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे पर अपनी रोटियां सेंक रही हैं. यही वजह है कि अब विश्व भर की मीडिया की खबरों में आने वाले वक्त में 'यूरोपियन ड्रीम' की राह मुश्किल बताई जा रही है.
After years of political deadlock, false starts and dead ends, a major overhaul of EU migration policy kicks in today.
— POLITICOEurope (@POLITICOEurope) June 12, 2026
Here's what you need to know about it.https://t.co/F1l1NSmtKN
क्या है पूरा मामला? पहले समझें..., यूरोप में पढ़ने, काम करने का सपना देखने वालों के लिए महत्वपूर्ण
यूरोपियन मीडिया के अनुसार बीते 9 जून 2026 की रात उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट में एक सूडानी शरणार्थी पर एक व्यक्ति को चाकू मारने का आरोप लगा. तुरंत इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. बस फिर क्या था पूरा शहर देखते ही देखते में आग की लपटों की चपेट में आ गया. जगह-जगह हिंसा होने लगी और दंगे भड़क उठे. बताते हैं स्थानीय पुलिस ने बड़ी मुश्किल से स्थिति को काबू किया. हल्के बल प्रयोग के बाद दंगों में शामिल करीब 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया. बता दें इस पूरे प्रकरण में करीब 12 पुलिसकर्मी घायल हुए थे.
क्यों होती हैं हिंसक घटनाएं, क्या कोई पैटर्न किया जा रहा फॉलो ?
एक रिपोर्ट के अनुसार यूरोप के अलग-अलग देशों में आए दिन ऐसी हिंसक घटनांए होती रहती हैं और हर बार प्रवासी चाहे वह किसी भी देश के हों स्थानीय लोगों के निशाने पर रहते हैं. जानकारी के अनुसार जून 2025 में भी उत्तरी आयरलैंड के शहर बैलीमेना में दो रातें लगातार दंगे हुए थे, जब दो युवकों पर यौन हमले का आरोप लगा था. 2024 में इंग्लैंड के साउथपोर्ट में तीन बच्चियों की हत्या के बाद पूरे ब्रिटेन में दंगे भड़के थे.
???????? | Ireland is waking up!
— Mr. Whale (@CryptoWhale) June 12, 2026
Thousands marching in Dublin: “Coolock says NO to mass immigration”, “Irish Lives Matter”. Irish flags everywhere and a clear message - enough of open-door policies.
Will the rest of Europe finally follow? pic.twitter.com/tAyfQXjzQT
यूरोप के अलग-अलग देशों में हिंसक घटनाओं की कुछ वजहें
-कई शहरों में घर मिलना बेहद मुश्किल हो गया है और किराया काफी ज्यादा हो गया है.
-स्थानीय लोगों को लगता है कि सीमित संसाधनों पर मुकाबला बढ़ रहा है.
-सरकार हजारों शरणार्थियों के खाने, रहने और कानूनी प्रक्रिया का खर्च जनता के पैसों से कर रही है, जिससे आम लोग गुस्सा हैं.
-किसी एक घटना के बाद पूरे प्रवासी समुदाय को लेकर बहस छिड़ जाती है.
-सोशल मीडिया पर अधूरी या गलत जानकारी बिजली की रफ्तार से फैलती है और आग में घी का काम करती है.
ब्रिटेन में 'नाव वाले प्रवासी' की है कहावत, आयरलैंड में किराए पर मकान मिलना हुआ मुश्किल
ब्रिटेन में एक कहावत है कि प्रवासी इंग्लिश चैनल पार करके छोटी नावों से आते हैं. इनकी संख्या पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ी है. जिससे सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ा है.वहीं, जो आयरलैंड हमेशा से एक खुले दिल वाला देश माना जाता था अब पिछले कुछ सालों से वहां किराया इतना बढ़ गया है कि स्थानीय लोगों को घर मिलना काफी मुश्किल हो गया है.
अगर हालत नहीं सुधरे तो आगे क्या हो सकता है बदलाव?
- स्टूडेंट वीजा और वर्क वीजा के नियम और कड़े हो सकते हैं
- पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट की शर्तें बदल सकती हैं
- परिवार को साथ ले जाने की अनुमति पर पाबंदी बढ़ सकती है
- वीजा प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है
The European Union is set to implement a new set of rules governing how each of its 27 member states will deal with irregular migration and asylum seekers.https://t.co/MEKZL5Ngwm
— Gary Buckley™ (@myrddenbuckley) June 12, 2026
राजनीतिक दल बना रहे मुद्दा, सबके अपने-अपने स्वार्थ
यूरोपियन देशों में राजनीतिक दल प्रवासियों के मुद्दे को उठाते हैं. कुछ कट्टरपंथी लोग इसे सोशल मीडिया पर देश की अस्मिता और अस्तित्व से जोड़कर पेश करते हैं. वहीं, कुछ लोग दो विचारधाराओं में बंटे हैं. बता दें यूरोप के कई देशों में भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स की तादाद लगातार बढ़ रही है. लेकिन यहां भी माहौल बदल रहा है. यूरोप में रहने वाले अधिकतर भारतीय छात्र, डॉक्टर, इंजीनियर, आईटी प्रोफेशनल या कारोबारी हैं. वे कानूनी रास्ते से गए हैं और वहां की अर्थव्यवस्था में योगदान करते हैं. बता दें हालिया प्रदर्शनों का मुख्य निशाना भारतीय समुदाय नहीं रहा है. लेकिन जब किसी देश में प्रवास विरोधी माहौल बनता है तो उसकी आंच सभी को लगती है.
Explainer: क्या होगा जब भारतीय IT सेक्टर में इंसानों के बराबर ही AI वर्कर होंगे?
टाटा मोटर्स ने यात्री वाहनों की कीमतों को 1.5 प्रतिशत तक बढ़ाया, एक जुलाई से होंगी लागू
नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (टीएमपीवी) ने शुक्रवार को अपनी ईंधन (पेट्रोल, डीजल और सीएनजी) और इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया। नई कीमतें एक जुलाई से लागू होंगी।
कंपनी की ओर से जारी की गई एक्सचेंज फाइलिंग में कहा गया कि कीमतों में बढ़ोतरी की वजह इनपुट लागत में बढ़ोतरी होना था।
टीएमपीवी ने कहा कि वह लागत में हुई बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही है, जबकि हालिया कीमत संशोधन के जरिए बढ़ोतरी का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल रही है।
कंपनी ने कहा कि कीमत में बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल और वैरिएंट के हिसाब से अलग-अलग होगी।
कंपनी ने आगे कहा कि यह कदम टाटा मोटर्स की पैसेंजर गाड़ियों की रेंज पर लागू होगा, जिसमें पारंपरिक ईंधन वाली गाड़ियों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी शामिल हैं।
टाटा मोटर्स के मुताबिक, कीमतों में यह बदलाव इस तरह से किया गया है ताकि लागत बढ़ने के बावजूद उसके प्रोडक्ट्स वैल्यू फॉर मनी रहें।
इसके बाद, बीएसई पर टीएमपीवी के शेयर 385.60 रुपये पर ऊपर ट्रेड कर रहे थे।
हाल के महीनों में, दूसरी बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी नए प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी में निवेश जारी रखते हुए अपने मुनाफे (मार्जिन) को बनाए रखने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी का रास्ता चुना है।
पिछले महीने, हुंडई मोटर इंडिया ने जून से अपनी गाड़ियों की रेंज की कीमतों में 12,800 रुपए तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया था। कंपनी ने इसके लिए इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी, कमोडिटी की ऊंची कीमतों और ऑपरेशनल खर्चों में बढ़ोतरी का हवाला दिया था।
इसी तरह, मारुति सुजुकी इंडिया ने भी जून से अपने पोर्टफोलियो की कीमतों में 30,000 रुपए तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी और इस फैसले के पीछे इनपुट कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी को वजह बताया था।
इसके अलावा, महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम) ने भी इस साल की शुरुआत में अपनी एसयूवी और कमर्शियल गाड़ियों की रेंज की कीमतों में बदलाव किया था।
--आईएएनएस
एबीएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.




News Nation


















