टाटा मोटर्स ने यात्री वाहनों की कीमतों को 1.5 प्रतिशत तक बढ़ाया, एक जुलाई से होंगी लागू
नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (टीएमपीवी) ने शुक्रवार को अपनी ईंधन (पेट्रोल, डीजल और सीएनजी) और इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया। नई कीमतें एक जुलाई से लागू होंगी।
कंपनी की ओर से जारी की गई एक्सचेंज फाइलिंग में कहा गया कि कीमतों में बढ़ोतरी की वजह इनपुट लागत में बढ़ोतरी होना था।
टीएमपीवी ने कहा कि वह लागत में हुई बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही है, जबकि हालिया कीमत संशोधन के जरिए बढ़ोतरी का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल रही है।
कंपनी ने कहा कि कीमत में बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल और वैरिएंट के हिसाब से अलग-अलग होगी।
कंपनी ने आगे कहा कि यह कदम टाटा मोटर्स की पैसेंजर गाड़ियों की रेंज पर लागू होगा, जिसमें पारंपरिक ईंधन वाली गाड़ियों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी शामिल हैं।
टाटा मोटर्स के मुताबिक, कीमतों में यह बदलाव इस तरह से किया गया है ताकि लागत बढ़ने के बावजूद उसके प्रोडक्ट्स वैल्यू फॉर मनी रहें।
इसके बाद, बीएसई पर टीएमपीवी के शेयर 385.60 रुपये पर ऊपर ट्रेड कर रहे थे।
हाल के महीनों में, दूसरी बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी नए प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी में निवेश जारी रखते हुए अपने मुनाफे (मार्जिन) को बनाए रखने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी का रास्ता चुना है।
पिछले महीने, हुंडई मोटर इंडिया ने जून से अपनी गाड़ियों की रेंज की कीमतों में 12,800 रुपए तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया था। कंपनी ने इसके लिए इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी, कमोडिटी की ऊंची कीमतों और ऑपरेशनल खर्चों में बढ़ोतरी का हवाला दिया था।
इसी तरह, मारुति सुजुकी इंडिया ने भी जून से अपने पोर्टफोलियो की कीमतों में 30,000 रुपए तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी और इस फैसले के पीछे इनपुट कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी को वजह बताया था।
इसके अलावा, महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम) ने भी इस साल की शुरुआत में अपनी एसयूवी और कमर्शियल गाड़ियों की रेंज की कीमतों में बदलाव किया था।
--आईएएनएस
एबीएस
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फिनलैंड की धरती से विदेश मंत्री जयशंकर की यूरोपीय देशों को दो टूक, कहा- 'हमने कभी नहीं पहुंचाया यूरोप को खतरा'
S Jaishankar Slams Europe: विदेश मंत्री एस. जयशंकर यूरोप के दौरे पर हैं. जहां फिनलैंड में आयोजित कुल्तारांता वार्ता में विदेश मंत्री ने शिरकत की. फिनलैंड की धरती से विदेश मंत्री ने यूरोपीय देशों को आईना दिखाया. भारतीय विदेश मंत्री ने यूरोप की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी यूरोपीय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि जबकि वर्षों से यूरोपीय हथियार भारत के खिलाफ इस्तेमाल किए जाते रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत ने कभी यूरोप की सुरक्षा को खतरा नहीं पहुंचाया.
विदेश मंत्री जयशंकर ने यूरोप को दिखाया आईना
फिनलैंड कें आयोजनत कुल्तारांत वार्ता के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस से तेल खरीदने के भारत के फैसले का भी जोरदार तरीके से बचाव किया. उन्होंने साफ कहा कि भारत हमेशा अपने देश के हितों की रक्षा करता है और उसी के आधार पर व्यावहारिक तरीके से फैसले लेता है. विदेश मंत्री ने यूरोपीय देशों पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी यूरोपीय देश पर आज तक भारत में बने हथियारों से हमला नहीं किया गया. उन्होंने यूरोपीय देशों को आईना दिखाते हुए कहा कि यूरोपीय देश ऐसे हथियार बेचते हैं जिनका इस्तेमाल भारत पर हमला करने के लिए किया जाता रहा है.
यूरोप की धरती से यूरोप को करारा जवाब
बता दें कि विदेश मंत्री जयशंकर ने गुरुवार को फिनलैंड में आयोजित कुल्तारांता वार्ता में शामिल हुए. जहां उन्होंने "उभरती शक्तियां और नई भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा" विषय पर आयोजित चर्चा में भाग लिया. इस दौरान एक पत्रकार ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत की नीति पर सवाल उठाया. उसने कहा कि भारत रूस के प्रति जरूरत से ज्यादा सहानुभूति रखता है. साथ ही रूस से तेल खरीदने के लिए बहुत ज्यादा तैयार रहता है.
विदेश मंत्री को यूरोप को दो टूक
इस सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए व्यावहारिक तरीके से फैसले लेता है. उन्होंने आगे कहा, "मैं दो बातें कहना चाहता हूं. एक हम तेल उसकी कीमत और उपलब्धता के आधार पर खरीदते हैं. उस वक्त बाजार में उपलब्ध ज्यादा तेल रूसी था. क्योंकि यूरोपीय देश खासकर मध्य पूर्व से तेल खरीदते रहे थे, जो हमारा पारंपरिक निर्यातक रहा है. यही वजह है कि परिस्थितियों ने हमें एक खास दिशा में जाने के लिए मजबूर कर दिया."
अमेरिका भी मान चुका है भारत की भूमिका का असर
इस दौरान विदेश मंत्री ने इस बाद का भी जिक्र किया कि 2022 में खुद अमेरिका भी मान चुका है कि दुनिया में आर्थिक संतुलन बनाए रखने में भारत की अहम भूमिका रही है. उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका ने भारत को रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे ऊर्जा बाजार स्थिर रहे और रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद वैश्विक महंगाई में बढ़ते खतरे को रोका जा सके.
विदेश मंत्री ने कहा, "उस वक्त यूएसए ने भारत से सीधे कहा था कि तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए रूसी तेल खरीदना जरूरी है. ऐसे में हम तेल उसकी कीमत और उपलब्धता के आधार पर खरीदते हैं." यही नहीं विदेश मंत्री ने पश्चिमी देशों की प्रतिबंध नीतियों के विरोधाभासी स्वरूप को लेकर भी कई सवाल किए. उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दों को चुनिंदा नैतिक नजरिये से नहीं देखना चाहिए.
'भारतीय हथियारों का यूरोप के किसी देश पर नहीं हुआ इस्तेमाल'
इसके अलावा विदेश मंत्री जयशंकर ने वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी यूरोप की पुरानी और नैतिक विरोधाभासों वाली नीतियों का जिक्र किया. विदेश मंत्री ने कहा, "किसी भी यूरोपीय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं किया गया. काश मैं भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले यूरोपीय हथियारों के बारे में भी यही बात कह पाता."
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