मीनाक्षी नटराजन नामांकन विवाद: दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान जीतू पटवारी, उमंग सिंघार सहित कई कांग्रेस नेता हिरासत में, राष्ट्रपति से नहीं हुई मुलाकात
मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में दिल्ली पहुंचे कांग्रेस नेताओं ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक विक्रांत भूरिया सहित कई कांग्रेस नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
इससे पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि एक दिन पहले उन्होंने राष्ट्रपति से मिलने के लिए समय मांगा गया था, लेकिन उन्हें ईमेल के माध्यम से सूचित किया गया कि फिलहाल समय उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायकों से मिलने के लिए राष्ट्रपति के पास समय नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया
मध्यप्रदेश में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने का मामला अब दिल्ली में ज़ोर शोर से गूँज रहा है। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, मीनाक्षी नटराजन, विक्रांत भूरिया, आरिफ़ मसूद सहित अन्य कांग्रेस विधायक आज दिल्ली में हैं। कांग्रेस कार्यालय में संयुक्त प्रेसवार्ता के बाद ये सभी नेता जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए पहुंचे। इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, विक्रांत भूरिया समेत कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया।
राष्ट्रपति ने नहीं दिया मिलने का समय, उमंग सिंघार ने किए सवाल
एक दिन मध्यप्रदेश कांग्रेस ने राष्ट्रपति से मिलने के लिए समय मांगा था। लेकिन कांग्रेस नेताओं को फिलहाल राष्ट्रपति भवन से समय नहीं मिला है। इस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने केंद्र सरकार और चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दिल्ली में मीडिया से चर्चा करते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि राष्ट्रपति से मिलने के लिए समय मांगा गया था, लेकिन ईमेल के माध्यम से सूचित किया गया कि फिलहाल समय उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायकों से मिलने के लिए राष्ट्रपति के पास समय नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वे दुबारा राष्ट्रपति से मिलने के लिए समय की मांग करेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने बीजेपी पर लगाए आरोप
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी कार्यालय में मीनाक्षी नटराजन, हरीश चौधरी, जीतू पटवारी और उमंग सिंघार ने संयुक्त प्रेस वार्ता की। यहां जीतू पटवारी ने कहा कि भारतीय राजनीति में यह पहला मामला है जब किसी राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन निरस्त किया गया है और यह राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस में जिस तरह का उत्साह और एकजुटता थी, उससे भाजपा नेतृत्व घबरा गया था। पटवारी ने आरोप लगाया कि इसी कारण चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया गया और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।
उमंग सिंघार ने कहा “”इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी” की ओर बढ़ रहा है देश
वहीं उमंग सिंघार ने कहा कि देश में बन रही परिस्थितियां लोकतंत्र के लिए चिंताजनक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत धीरे-धीरे “इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी” यानी चुनावी सत्तावाद की ओर बढ़ रहा है, जहां विपक्ष और मीडिया सिर्फ औपचारिक भूमिका तक सीमित रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि कार्यपालिका का केंद्रीकरण, विधायिका की कमजोर होती निगरानी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश और पत्रकारों के उत्पीड़न जैसी स्थितियों पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है।
क्या है मामला
बता दें कि मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया था। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान उनके नामांकन पर बीजेपी द्वारा आपत्तियां दर्ज की गईं। सुनवाई के बाद रिटर्निंग अधिकारी ने उनका नामांकन पत्र निरस्त कर दिया। कांग्रेस ने इस फैसले को अनुचित बताते हुए चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में उनकी याचिका खारिज हो गई है।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। रिटर्निंग अधिकारी ने बाद में तीनों को निर्वाचन प्रमाण-पत्र भी सौंप दिए। कांग्रेस का कहना है कि यदि उसका उम्मीदवार चुनाव मैदान में रहता तो मुकाबला होता, जबकि भाजपा का दावा है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप संपन्न हुई है। इसी मुद्दे को लेकर मध्यप्रदेश से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस का विरोध जारी है।
Shahdol News: CBI की कार्रवाई, सेंट्रल बैंक सहायक प्रबंधक 10000 रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार, कियोस्क की अनुमति के बदले मांगे थे पैसे
मध्यप्रदेश के शहडोल में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। सीबीआई की टीम ने एक सेंट्रल बैंक के एक अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। अधिकारी ने यह रिश्वत बैंकिंग कियोस्क संचालन की अनुमति देने के एवज में मांगी थी।
जानकारी के अनुसार, शहडोल निवासी दीपेंद्र सिंह ने क्षेत्र में चार बैंकिंग कियोस्क संचालित करने के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में आवेदन किया था। इसके एवज में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय शहडोल में पदस्थ सहायक प्रबंधक अभ्यंकर शर्मा ने 10 हजार रुपये की मांग की थी, जिसकी शिकायत दीपेंद्र ने सीबीआई की जबलपुर इकाई से की। पुलिस अधीक्षक एसके राठी के निर्देशन में शिकायत का सत्यापन कराया गया, जिसमें आरोप सही पाए गए।
इसके बाद 11 जून 2026 को सीबीआई ने ट्रैप की योजना बनाकर और आरोपी सहायक प्रबंधक को 8 सदस्यीय टीम ने गुरुद्वारे के पास रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की टीम ने आरोपी बैंक अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जांच में जुटी सीबीआई टीम ने आरोपी सहायक प्रबंधक के ग्वालियर स्थित निवास पर भी छापेमारी की है। गुरुवार देर रात सीबीआई इस मामले से जुड़े अन्य दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर करती रही। अब सीबीआई की टीम द्वारा आरोपी अधिकारी को जबलपुर स्थित विशेष सीबीआई अदालत (CBI Court) में पेश किया जाएगा।
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