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ओडिशा में मिसाइल टेस्ट से पहले 11 गांव खाली कराए:चांदीपुर लॉन्च पैड के आसपास से 11 हजार से ज्यादा लोगों को हटाया

ओडिशा के बालासोर जिले में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के तय मिसाइल टेस्ट से पहले गुरुवार को प्रशासन ने 11 गांव खाली करा लिए। चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) के लॉन्च पैड-3 के 3.5 किलोमीटर दायरे से 11,442 लोगों को अस्थायी तौर पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। बुधवार को भी इन्हीं इलाकों के लोगों को उनके घरों से हटाया गया था। तय अभ्यास पूरा होने के बाद शाम को उन्हें वापस लौटने की अनुमति दे दी गई थी। PTI के मुताबिक प्रशासन ने मिसाइल या परीक्षण की प्रकृति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। हालांकि, लोगों से राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में सहयोग की अपील की गई है। हटाए गए लोगों को चक्रवात केंद्रों में रखा गया जिला प्रशासन और अधिकारियों के मुताबिक, निकाले गए लोगों को बर्धनपुर, भीमपुर और तुंद्रा गांवों के बहुउद्देश्यीय चक्रवात केंद्रों में रखा गया है। उन्हें निधिपदा सेवाश्रम में भी ठहराया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सभी लोगों के लिए भोजन, पीने के पानी और दूसरी जरूरी सुविधाओं का इंतजाम किया गया है। उन्हें दिनभर के लिए पारिश्रमिक भी दिया जा रहा है। एक राजस्व अधिकारी ने कहा कि यह निकासी DRDO से सलाह-मशविरा के बाद एहतियात के तौर पर की गई है। वहीं, बालासोर, भद्रक और केंद्रापड़ा जिलों के तटीय इलाकों में काम करने वाले मछुआरों को दिन के समय समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने इसे सुरक्षा से जुड़ा एहतियाती कदम बताया है। पहले भी कई बार खाली कराए गए हैं गांव ओडिशा के बालासोर जिले में स्थित चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से जब भी लंबी दूरी या रणनीतिक महत्व की मिसाइलों का परीक्षण होता है, तब लॉन्च पैड के आसपास के गांवों को एहतियातन खाली कराया जाता है। सुरक्षा मानकों के तहत संभावित जोखिम वाले क्षेत्र को अस्थायी रूप से खाली कराना DRDO और जिला प्रशासन की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। पिछले कुछ सालों में अग्नि, पृथ्वी, आकाश, ब्रह्मोस और अन्य मिसाइल प्रणालियों के परीक्षणों से पहले भी आसपास के गांवों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। आमतौर पर टेस्ट होने के बाद उसी दिन या अगले दिन लोगों को वापस घर लौटने की अनुमति दे दी जाती है। मछुआरों को समुद्र में जाने से इसलिए रोका जाता है मिसाइल परीक्षण के दौरान समुद्र के एक हिस्से को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित क्षेत्र (नो-सेलिंग जोन) घोषित किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि परीक्षण के दौरान कोई मछली पकड़ने वाली नाव या अन्य पोत मिसाइल के निर्धारित मार्ग में न आए। इसी वजह से बालासोर, भद्रक और केंद्रापड़ा के तटीय इलाकों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। चांदीपुर ITR: भारत के मिसाइल कार्यक्रम की अहम टेस्टिंग लैब ओडिशा के बालासोर जिले में स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR), चांदीपुर देश के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा परीक्षण केंद्रों में शामिल है। इसकी स्थापना 1980 के दशक में DRDO के मिसाइल विकास कार्यक्रम को समर्थन देने के लिए की गई थी। यहां से जमीन से जमीन, जमीन से हवा और क्रूज मिसाइलों समेत कई रणनीतिक हथियार प्रणालियों का परीक्षण किया जाता है। इन प्रमुख मिसाइलों का हो चुका है परीक्षण चांदीपुर रेंज से भारत की कई चर्चित मिसाइलों का सफल परीक्षण किया जा चुका है। इनमें शामिल हैं- अग्नि सीरिज की बैलिस्टिक मिसाइलें, पृथ्वी मिसाइल आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, निर्भय क्रूज मिसाइल, क्यूआरएसएएम (QRSAM), अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल, विभिन्न इंटरसेप्टर और एयर डिफेंस सिस्टम। इन परीक्षणों ने भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें: अग्नि की एडवांस मिसाइल का सफल परीक्षण:एक से ज्यादा परमाणु हथियार ले जा सकती है, एक साथ कई टारगेट पर निशाना लगाने की टेक्नोलॉजी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने शुक्रवार को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल परीक्षण सेंटर से अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया। DRDO ने शनिवार को यह जानकारी दी। पढ़ें पूरी खबर…

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8 रुपये के इस पेनी शेयर ने कर दिया मालामाल, 1 लाख लगाने वाले बने करोड़पति

डिफेंस कंपनी निबे लिमिटेड के शेयरों ने 10 साल में 1 लाख रुपये के निवेश को 1.75 करोड़ रुपये से ज्यादा बना दिया है। 5 साल में कंपनी के शेयरों ने 4000% से ज्यादा रिटर्न दिया है। डिफेंस कंपनी अपने निवेशकों को बोनस शेयर का तोहफा भी दे चुकी है।

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  Sports

जमीन बेचकर बेटे को बनाया Cricketer, Bihar के Vaibhav Suryavanshi की Team India तक की संघर्ष गाथा

बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले संजीव सूर्यवंशी की कहानी एक ऐसे पिता की है, जिन्होंने अपने बेटे वैभव सूर्यवंशी के क्रिकेटर बनने के सपने को साकार करने के लिए हर वह त्याग किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं है।

आज 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट का नया चमकता सितारा बन चुके हैं। लेकिन इस सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष और परिवार के बलिदान की लंबी कहानी छिपी हुई है। मौजूद जानकारी के अनुसार वैभव के क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने के लिए उनके पिता ने अपनी पैतृक जमीन तक बेच दी थी, ताकि बेटे को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं मिल सकें।

गौरतलब है कि ग्रामीण भारत में पैतृक जमीन केवल संपत्ति नहीं होती, बल्कि परिवार की पहचान और विरासत का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में जमीन बेचना किसी परिवार के लिए बेहद भावनात्मक फैसला होता है। लेकिन संजीव सूर्यवंशी ने बेटे के सपनों को जमीन और पैसों से अधिक महत्व दिया।

संजीव सूर्यवंशी का कहना है कि अब जब उनका सपना पूरा हो रहा है, तब जमीन और धन की कोई अहमियत नहीं रह गई है। उनके अनुसार वैभव को जो सम्मान और पहचान देश-विदेश में मिल रही है, वही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है।

बता दें कि वैभव सूर्यवंशी का नाम हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली छोटी अवधि की श्रृंखला के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। इसके साथ ही वह भारतीय क्रिकेट टीम में चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं। यह उपलब्धि उन्हें शानदार घरेलू प्रतियोगिता और जूनियर विश्व कप में दमदार प्रदर्शन के बाद मिली है।

मौजूद जानकारी के अनुसार वैभव ने वर्ष 2026 की बड़ी घरेलू प्रतियोगिता में 776 रन बनाकर सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज का गौरव हासिल किया था। उन्होंने पूरे सत्र में एक शतक और पांच अर्धशतक लगाए। इसके अलावा उन्हें सर्वश्रेष्ठ उभरते खिलाड़ी, सबसे मूल्यवान खिलाड़ी, सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज, सर्वश्रेष्ठ प्रहार दर और सबसे अधिक छक्के लगाने जैसे कई पुरस्कार भी मिले थे।

वैभव की क्रिकेट यात्रा तब शुरू हुई थी, जब वह केवल चार साल के थे। उनके पिता ने पहली बार उनके खेल में असाधारण प्रतिभा देखी। इसके बाद प्लास्टिक और टेनिस गेंद से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे पेशेवर प्रशिक्षण तक पहुंचा। समस्तीपुर से पटना तक लगभग 90 किलोमीटर की दूरी तय कर प्रशिक्षण के लिए जाना परिवार के लिए आसान नहीं था, लेकिन संजीव सूर्यवंशी ने कभी हार नहीं मानी।

गौरतलब है कि बेटे को नियमित अभ्यास के लिए ले जाने के उद्देश्य से उन्होंने एक वाहन भी खरीदा था। इसके लिए भी जमीन बेचने से प्राप्त धन का उपयोग किया गया था। आज जब वैभव भारतीय टीम की दहलीज पर खड़े हैं, तब उनके पिता को अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।

संजीव सूर्यवंशी बताते हैं कि वैभव बचपन से ही देश के लिए खेलने का सपना देखते थे और उसी लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे। जब भारतीय टीम में चयन की खबर आई, तब पूरा परिवार भावुक हो गया। घर पर रिश्तेदारों, दोस्तों और गांव के लोगों का तांता लग गया। हर कोई इस उपलब्धि का जश्न मना रहा था।

मौजूद जानकारी के अनुसार चयन की खबर मिलने के समय वैभव श्रीलंका में अभ्यास कर रहे थे। उन्होंने अपने पिता को फोन कर चयन की जानकारी दी और बताया कि वहां मौजूद सभी लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं।

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वैभव को आयरलैंड या इंग्लैंड दौरे पर पदार्पण का मौका मिलता है या नहीं। यदि वह अंतिम एकादश में जगह बनाने में सफल रहते हैं, तो वह भारत के लिए सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। फिलहाल यह रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम दर्ज है। ऐसे में वैभव सूर्यवंशी के सामने इतिहास रचने का सुनहरा अवसर है और पूरा देश उनके अगले कदम का इंतजार कर रहा है।
Thu, 11 Jun 2026 22:58:57 +0530

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